{"_id":"5ed4d0593c6e44675c1acb37","slug":"78-percent-decline-in-delhi-government-revenue","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिल्ली सरकार के राजस्व में 78 फीसदी की गिरावट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिल्ली सरकार के राजस्व में 78 फीसदी की गिरावट
Mon, 01 Jun 2020 03:24 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Mon, 01 Jun 2020 03:24 PM IST
सार
- केंद्र से मांगा 5000 करोड़ रुपये का आर्थिक मदद पैकेज
- वित्त मंत्री सिसोदिया ने लिखा केंद्रीय वित्त मंत्री को पत्र
विज्ञापन
दुकानों पर खरीदारी करते लोग
- फोटो : amar ujala
विस्तार
कोरोना काल में दिल्ली सरकार के राजस्व में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। पिछले साल की तुलना में इस वित्तीय वर्ष के पहले दो महीने में सिर्फ 22 फीसदी का राजस्व मिला है। यह राशि 1,735 करोड़ रुपये बैठती है। दूसरी तरफ दिल्ली सरकार दो महीने में सिर्फ वेतन और दफ्तर पर 7,000 करोड़ रुपये खर्च करना है। वित्तीय संकट में फंसी दिल्ली सरकार ने केंद्र सरकार से 5,000 करोड़ रुपये का आर्थिक पैकेज मांगा है।
दिल्ली सरकार के वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया ने इस बारे में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र भी लिखा है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार से गुजारिश की है कि आपदा की इस घड़ी में दिल्ली के लोगों की मदद करें। मनीष सिसोदिया ने बताया कि लॉकडाउन की वजह से पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है। दिल्ली भी इससे अछूती नहीं है।
दिल्ली सरकार ने बीते दिनों अपने न्यूनतम खर्च की समीक्षा की है। इसके अनुसार सिर्फ वेतन और कार्यालय चलाने पर हर महीने न्यूनतम 3,500 करोड़ रुपये की जरूरत है, जबकि बीते दो महीनों में सरकार को एक हजार करोड़ रुपये का कर जीएसटी से मिला है। वही, जीएसटी के साथ अन्य स्रोतों को मिलाने से यह रकम 1,735 करोड़ रुपये हो जाती है। पिछले वित्तीय वर्ष की इसी अवधि में 7,799 करोड़ का राजस्व संग्रह हुआ था। इस साल राजस्व में 78 फीसदी की गिरावट आई है। ऐसे हालात में दिल्ली सरकार को फिलहाल न्यूनतम 5,000 करोड़ की आवश्यकता है।
विज्ञापन
केंद्र नहीं करता मदद
मनीष सिसोदिया ने कहा कि केंद्र सरकार ने आपदा राहत कोष से दूसरे राज्यों को मदद दी है, लेकिन दिल्ली सरकार को इसमें कुछ भी नहीं मिला। केंद्र सामान्य तौर पर भी दिल्ली सरकार को कोई आर्थिक सहायता नहीं देता, लेकिन अभी जब दिल्ली में राजस्व संग्रह नहीं हो रहा है तब केंद्र से मदद मिलना जरूरी है। इससे हम कर्मचारियों, शिक्षकों, डॉक्टर, इंजीनियर, सिविल डिफेंस के लोग तथा कोरोना राहत में जुटे अन्य कर्मियों को सैलरी का भुगतान कर पाएंगे।
सिसोदिया ने बताया कि उन्होंने बीते दिनों केंद्रीय वित्त मंत्री को पत्र लिखा है। इसमें बताया गया है कि कोरोना नियंत्रण में दिल्ली देश के अग्रणी राज्यों में है। दिल्ली अपना समस्त खर्च अपने संसाधनों से उठाती है। वित्त वर्ष 2020-21 में दिल्ली विधानसभा ने 65000 करोड़ का बजट पास किया है। इसमें 35500 करोड़ का खर्च स्थापना, नगर निगम को योगदान तथा ब्याज आदि में होता है। सामान्य स्थिति में दिल्ली अपने संसाधनों से अपना खर्च उठाने में सक्षम है, लेकिन मौजूदा संकट के दौर में केंद्र से 5,000 करोड़ अनुदान मिलने पर दिल्ली नगर निगम को वेतन तथा स्थापना व्यय देने में भी सुविधा होगी।
अस्पतालों को अपग्रेड किया
मनीष सिसोदिया ने बताया कि दिल्ली सरकार ने कोरोना से लड़ने के लिए अस्पतालों को अपग्रेड किया है। पीपीई, वेंटिलेटर, टेस्टिंग किट, सैनिटाइजर, एन-95 मास्क आदि का इंतजाम भी किया है। जरूरतमंद लोगों के लिए भोजन तथा राशन वितरण के अलावा प्रवासी मजदूरों को उनके घर भेजने संबंधी रेलवे के किराए का भी दिल्ली सरकार भुगतान कर रही है। ऐसी हालत में केंद्र को दिल्ली सरकार सरकार की मदद करनी चाहिए।
विज्ञापन
दिल्ली सरकार के वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया ने इस बारे में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र भी लिखा है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार से गुजारिश की है कि आपदा की इस घड़ी में दिल्ली के लोगों की मदद करें। मनीष सिसोदिया ने बताया कि लॉकडाउन की वजह से पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है। दिल्ली भी इससे अछूती नहीं है।
विज्ञापन
दिल्ली सरकार ने बीते दिनों अपने न्यूनतम खर्च की समीक्षा की है। इसके अनुसार सिर्फ वेतन और कार्यालय चलाने पर हर महीने न्यूनतम 3,500 करोड़ रुपये की जरूरत है, जबकि बीते दो महीनों में सरकार को एक हजार करोड़ रुपये का कर जीएसटी से मिला है। वही, जीएसटी के साथ अन्य स्रोतों को मिलाने से यह रकम 1,735 करोड़ रुपये हो जाती है। पिछले वित्तीय वर्ष की इसी अवधि में 7,799 करोड़ का राजस्व संग्रह हुआ था। इस साल राजस्व में 78 फीसदी की गिरावट आई है। ऐसे हालात में दिल्ली सरकार को फिलहाल न्यूनतम 5,000 करोड़ की आवश्यकता है।
विज्ञापन
केंद्र नहीं करता मदद
मनीष सिसोदिया ने कहा कि केंद्र सरकार ने आपदा राहत कोष से दूसरे राज्यों को मदद दी है, लेकिन दिल्ली सरकार को इसमें कुछ भी नहीं मिला। केंद्र सामान्य तौर पर भी दिल्ली सरकार को कोई आर्थिक सहायता नहीं देता, लेकिन अभी जब दिल्ली में राजस्व संग्रह नहीं हो रहा है तब केंद्र से मदद मिलना जरूरी है। इससे हम कर्मचारियों, शिक्षकों, डॉक्टर, इंजीनियर, सिविल डिफेंस के लोग तथा कोरोना राहत में जुटे अन्य कर्मियों को सैलरी का भुगतान कर पाएंगे।
सिसोदिया ने बताया कि उन्होंने बीते दिनों केंद्रीय वित्त मंत्री को पत्र लिखा है। इसमें बताया गया है कि कोरोना नियंत्रण में दिल्ली देश के अग्रणी राज्यों में है। दिल्ली अपना समस्त खर्च अपने संसाधनों से उठाती है। वित्त वर्ष 2020-21 में दिल्ली विधानसभा ने 65000 करोड़ का बजट पास किया है। इसमें 35500 करोड़ का खर्च स्थापना, नगर निगम को योगदान तथा ब्याज आदि में होता है। सामान्य स्थिति में दिल्ली अपने संसाधनों से अपना खर्च उठाने में सक्षम है, लेकिन मौजूदा संकट के दौर में केंद्र से 5,000 करोड़ अनुदान मिलने पर दिल्ली नगर निगम को वेतन तथा स्थापना व्यय देने में भी सुविधा होगी।
अस्पतालों को अपग्रेड किया
मनीष सिसोदिया ने बताया कि दिल्ली सरकार ने कोरोना से लड़ने के लिए अस्पतालों को अपग्रेड किया है। पीपीई, वेंटिलेटर, टेस्टिंग किट, सैनिटाइजर, एन-95 मास्क आदि का इंतजाम भी किया है। जरूरतमंद लोगों के लिए भोजन तथा राशन वितरण के अलावा प्रवासी मजदूरों को उनके घर भेजने संबंधी रेलवे के किराए का भी दिल्ली सरकार भुगतान कर रही है। ऐसी हालत में केंद्र को दिल्ली सरकार सरकार की मदद करनी चाहिए।