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Delhi NCR News: 7,15,381 आयुष्मान कार्ड जारी, पेचीदगियों से केवल 26,792 मरीजों का इलाज
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- अप्रैल में दिल्ली में योजना लागू हुए हो जाएंगे एक साल
-17,724 क्लेम किए गए दर्ज, जिसकी राशि 45.76 करोड़ रुपये है
ललित कौशिक
नई दिल्ली । दिल्ली में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना को लागू हुए अगले माह एक साल हो जाएगा। योजना के तहत अब तक सात लाख से अधिक आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं, हालांकि इसके तहत उपचार कराने वालों की दर काफी कम है। वहीं, प्रधानमंत्री वय वंदना योजना के तहत वरिष्ठ नागरिकों के लिए 2,72,956 से अधिक कार्ड बनाए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के 17 फरवरी तक के आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत अब तक 150 निजी और 53 सरकारी अस्पतालों को सूचीबद्ध किया गया है। साथ ही 7,15,381 आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं। इन अस्पतालों में 26,792 मरीजों का इलाज और 17,724 क्लेम दर्ज किए गए हैं, जिसकी राशि 45.76 करोड़ रुपये है।
विधवा व दिव्यांग पेंशनधारक किए गए शामिल
बता दें कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना व प्रधानमंत्री वय वंदना योजना के तहत दिल्ली में दस लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार मिलता है। हाल में दिल्ली सरकार ने विधवा और दिव्यांग पेंशनधारकों को प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में शामिल किया गया है। इससे करीब पांच लाख से अधिक लाभार्थियों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा का सीधा लाभ मिलेगा।
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कार्ड बनवाने के बाद भी पिता के ऑपरेशन का इंतजार
नांगल राय निवासी राजकुमार कनौजिया ने बताया कि उन्होंने तीन महीने पहले 71 वर्षीय पिता का प्रधानमंत्री वय वंदना योजना के तहत कार्ड बनवाया था, लेकिन इसका अभी तक कोई लाभ नहीं मिला है। पिता की आंख के मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए जिस अस्पताल से संपर्क किया, उसने योजना के तहत पैनल में शामिल होने की बात जरूर की, मगर ऑपरेशन सुविधा से इनकार कर दिया।
भुगतान अटकने का डर
दिल्ली हाईकोर्ट फ्री बेड इंस्पेक्शन कमेटी के सदस्य अशोक अग्रवाल ने बताया कि कार्ड के तहत उपचार लेने में कई तकनीकी समस्याएं हैं। इस कारण अधिक लोग योजना का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। ओपीडी को इसमें शामिल नहीं किया गया है। किसी बड़े सरकारी अस्पताल में सर्जरी करानी हो तो तारीख लंबी मिलने से भी योजना का लाभ लेने से मरीज वंचित रह जाते हैं। इसके अलावा निजी अस्पताल भी योजना से जुड़ने में संकोच करते हैं, क्याेंकि क्लेम के लिए कई तरह के दस्तावेज संबंधी साक्ष्य देने पड़ते हैं।
दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन नर्सिंग होम फोरम के अध्यक्ष डॉ. वीके मोंगा ने कहा कि योजना में कई सुविधाएं शामिल नहीं होने से मरीजों को ज्यादा लाभ नहीं मिल पाता है। मरीज के भर्ती होने के बाद अस्पतालों को रोजाना फोटोग्राफी, जियो टैगिंग सहित कई दूसरी रिपोर्ट साझा करनी पड़तीं हैं। अगर उसमें कुछ खामी रह जाए तो अस्पताल का भुगतान अटक जाता है।
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-17,724 क्लेम किए गए दर्ज, जिसकी राशि 45.76 करोड़ रुपये है
ललित कौशिक
नई दिल्ली । दिल्ली में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना को लागू हुए अगले माह एक साल हो जाएगा। योजना के तहत अब तक सात लाख से अधिक आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं, हालांकि इसके तहत उपचार कराने वालों की दर काफी कम है। वहीं, प्रधानमंत्री वय वंदना योजना के तहत वरिष्ठ नागरिकों के लिए 2,72,956 से अधिक कार्ड बनाए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के 17 फरवरी तक के आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत अब तक 150 निजी और 53 सरकारी अस्पतालों को सूचीबद्ध किया गया है। साथ ही 7,15,381 आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं। इन अस्पतालों में 26,792 मरीजों का इलाज और 17,724 क्लेम दर्ज किए गए हैं, जिसकी राशि 45.76 करोड़ रुपये है।
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विधवा व दिव्यांग पेंशनधारक किए गए शामिल
बता दें कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना व प्रधानमंत्री वय वंदना योजना के तहत दिल्ली में दस लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार मिलता है। हाल में दिल्ली सरकार ने विधवा और दिव्यांग पेंशनधारकों को प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में शामिल किया गया है। इससे करीब पांच लाख से अधिक लाभार्थियों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा का सीधा लाभ मिलेगा।
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कार्ड बनवाने के बाद भी पिता के ऑपरेशन का इंतजार
नांगल राय निवासी राजकुमार कनौजिया ने बताया कि उन्होंने तीन महीने पहले 71 वर्षीय पिता का प्रधानमंत्री वय वंदना योजना के तहत कार्ड बनवाया था, लेकिन इसका अभी तक कोई लाभ नहीं मिला है। पिता की आंख के मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए जिस अस्पताल से संपर्क किया, उसने योजना के तहत पैनल में शामिल होने की बात जरूर की, मगर ऑपरेशन सुविधा से इनकार कर दिया।
भुगतान अटकने का डर
दिल्ली हाईकोर्ट फ्री बेड इंस्पेक्शन कमेटी के सदस्य अशोक अग्रवाल ने बताया कि कार्ड के तहत उपचार लेने में कई तकनीकी समस्याएं हैं। इस कारण अधिक लोग योजना का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। ओपीडी को इसमें शामिल नहीं किया गया है। किसी बड़े सरकारी अस्पताल में सर्जरी करानी हो तो तारीख लंबी मिलने से भी योजना का लाभ लेने से मरीज वंचित रह जाते हैं। इसके अलावा निजी अस्पताल भी योजना से जुड़ने में संकोच करते हैं, क्याेंकि क्लेम के लिए कई तरह के दस्तावेज संबंधी साक्ष्य देने पड़ते हैं।
दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन नर्सिंग होम फोरम के अध्यक्ष डॉ. वीके मोंगा ने कहा कि योजना में कई सुविधाएं शामिल नहीं होने से मरीजों को ज्यादा लाभ नहीं मिल पाता है। मरीज के भर्ती होने के बाद अस्पतालों को रोजाना फोटोग्राफी, जियो टैगिंग सहित कई दूसरी रिपोर्ट साझा करनी पड़तीं हैं। अगर उसमें कुछ खामी रह जाए तो अस्पताल का भुगतान अटक जाता है।