एम्स ने घंटो नहीं किया रेप पीड़ित सात वर्षीय मासूम का इलाज
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रेप पीड़िता 7 वर्षीय मासूम का इलाज करीब साढ़े तीन घंटे देरी से शुरू होने के मामले में एम्स प्रशासन ने अपनी गलती मान ली है। दिल्ली महिला आयोग के नोटिस के जवाब में एम्स प्रशासन ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण मानते हुए ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर को कारण बताओ नोटिस जारी करने के साथ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश भी की है।
एम्स ने भरोसा दिलाया है कि भविष्य में दोबारा ऐसी घटना न हो, उसके लिए ड्यूटी इंचार्ज को निर्देश दिए हैं कि ऐसे मामला आते ही वह इसकी जानकारी स्त्री रोग विभाग समेत एमएस को दी जाएगी।
दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल के मुताबिक, आयोग द्वारा भेजे गए नोटिस पर एम्स के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. डीके शर्मा ने पूरे मामले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए गलती मानी है।
एम्स प्रशासन ने ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर (रेजीडेंट डॉक्टर) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसके अलावा स्त्री रोग विभाग समेत चिकित्सा अधीक्षक ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की भी सिफारिश की है।
लिखित शिकायत के बाद शुरू हुआ था इलाज
हालांकि एम्स ने अपने जवाब में लिखा है कि डॉक्टर ऑपरेशन थियेटर में किसी अन्य केस में व्यस्त था, इसके चलते इलाज में देरी हुई थी। बता दें कि 11 दिसंबर रात 8:35 बजे गंभीर हालत में एम्स की इमरजेंसी में बच्ची को लाया गया था।
अत्यधिक रक्तस्राव के बावजूद देर रात 12 बजे तक उसे प्राथमिक चिकित्सा तक नहीं मिल सकी थी। एम्स अस्पताल के अंदर पुलिस के रेप क्राइसिस सेल (आरसीसी) के अधिकारियों ने रात 12 बजे सीएमओ को लिखित शिकायत दी। उसके बाद बाद इलाज शुरू हो सका था। आयोग को इलाज में देरी की जानकारी आरसीसी की शिकायत के आधार पर मिली थी। आरसीसी की काउंसलर ने इस मामले में आयोग को शिकायत दी थी।
इसी शिकायत के आधार पर आयोग ने एम्स को 14 दिसंबर को नोटिस जारी कर 48 घंटे में जवाब देने को कहा था। हालांकि एम्स ने जवाब भेजने में देरी की है।