गाजीपुर हादसे ने एक बार फिर राजधानी में लैंडफिल साइट की कमी की समस्या को उजागर कर दिया। केंद्र सरकार, डीडीए, दिल्ली सरकार व तीनों एमसीडी भले ही हादसे के लिए एक दूसरे पर आरोप लगाएं और जिम्मेदारी से हाथ खींच लें, लेकिन सभी इसके लिए जिम्मेदार हैं। पढ़ें, हादसे के पीछे 7 कारण...
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ghazipur landfill collapse
1.राजधानी के प्रतिदिन 12 हजार मी. टन कूड़ा निकलता है, लेकिन उठाया बहुत कम जाता है। इस मुद्दे को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। सभी सरकारों व विभागों की उदासीनता को देख अदालत को तलख टिप्पणी करनी पड़ी कि वर्तमान लैंडफिल की ऊंचाई कुतुब मिनार से भी ज्यादा हो चुकी है, क्या इसे हिमालय से भी ऊंचा करने का इंतजार है।
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delhi ghazipur landfill collapes
2.हाईकोर्ट ने कई बार कहा कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं किया गया तो राजधानी जल्द ही लैंडफिल साइट में तब्दील हो जाएगी। अदालत ने कूड़े से बिजली बनाने के संयंत्र लगाने के लिए नगर निगम को जमीन उपलब्ध करवाने का आदेश दिया, इस मुद्दे पर भी कुछ नहीं किया गया।
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ghazipur landfill site
- फोटो : अमर उजाला
3.सर्वोच्च न्यायालय व एनजीटी में यह मामला पहुंच चुका है। हर बार सरकार की और से एक ही जवाब मिलता है कि लैंडफिल के लिए स्थान की तलाश जारी है। जो स्थान देखा गया है, वह उपयुक्त नहीं है। आज तक नई साइट नहीं बनाई गई। यह शुक्रवार को हुए हादसे का एक प्रमुख कारण है।
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4.सात साल में लैंडफिल साइट के लिए राजधानी में 9 से ज्यादा जगह देखी गई, लेकिन इनमें से एक पर भी बात नहीं बनी। जो जगह चिह्नित की गई, कभी वह छोटी पड़ गई तो कभी उसका अधिग्रहण नहीं हो पाया।