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Delhi: सेंट्रल रिज के 673 हेक्टेयर को मिला ‘आरक्षित वन’ का दर्जा, दिल्ली को मिलेंगे मजबूत ग्रीन लंग्स

Sat, 09 May 2026 11:25 AM IST
Vijay Singh Pundir आदित्य पाण्डेय, अमर उजाला, नई दिल्ली
आदित्य पाण्डेय, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vijay Singh Pundir Updated Sat, 09 May 2026 11:25 AM IST
सार

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सेंट्रल रिज के करीब 673.32 हेक्टेयर क्षेत्र को भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 20 के तहत ‘आरक्षित वन’ घोषित किया है। ये इलाका वन विभाग के पश्चिमी वन प्रभाग के अंतर्गत आता है और सरदार पटेल मार्ग व राष्ट्रपति भवन एस्टेट के आसपास फैला हुआ है।

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673 hectares of land in Delhi's Central Ridge area have been accorded the status of Reserved Forest
सीएम रेखा गुप्ता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली सरकार ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सेंट्रल रिज के 673.32 हेक्टेयर क्षेत्र को आरक्षित वन घोषित कर दिया है। इससे राजधानी में हरियाली बढ़ेगी, प्रदूषण पर लगाम लगेगी और जैव विविधता को मजबूती मिलेगी।

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मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सेंट्रल रिज के करीब 673.32 हेक्टेयर क्षेत्र को भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 20 के तहत ‘आरक्षित वन’ घोषित किया है। ये इलाका वन विभाग के पश्चिमी वन प्रभाग के अंतर्गत आता है और सरदार पटेल मार्ग व राष्ट्रपति भवन एस्टेट के आसपास फैला हुआ है। सरकार का कहना है कि इस फैसले से दिल्ली के पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने में बड़ी मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि रिज क्षेत्रों को कानूनी सुरक्षा देने का मुद्दा कई दशकों से लंबित था, जिसे अब पूरा कर लिया गया है। इससे न सिर्फ हरित क्षेत्र बढ़ेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर पर्यावरण सुनिश्चित होगा।
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सेंट्रल रिज राजधानी के लिए ग्रीन लंग्स
मुख्यमंत्री कहा कि सेंट्रल रिज राजधानी के बीचोंबीच स्थित है और इसे दिल्ली के ‘ग्रीन लंग्स’ के रूप में जाना जाता है। ये इलाका हवा की गुणवत्ता सुधारने, भूजल स्तर बनाए रखने और शहरी प्रदूषण के असर को कम करने में अहम भूमिका निभाता है। रिज दरअसल प्राचीन अरावली पर्वतमाला का ही विस्तार है, जो प्राकृतिक रूप से शहर को संतुलित रखने में मदद करता है।

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केवल देसी और पर्यावरण के अनुकूल पौधे लगाए जाएंगे
सरकार ने ये भी साफ किया है कि आरक्षित वन घोषित किए गए क्षेत्रों में जहां भी खाली और उपयुक्त जमीन उपलब्ध होगी, वहां बड़े पैमाने पर देसी और पर्यावरण के अनुकूल पौधे लगाए जाएंगे। इनमें नीम, पीपल, शीशम, जामुन, इमली और आम जैसे फलदार पेड़ भी शामिल होंगे। इस पहल का मकसद सिर्फ हरियाली बढ़ाना नहीं, बल्कि पूरे इलाके की पारिस्थितिकी को मजबूत करना है।

लंबे समय से लंबित थी ये प्रक्रिया
मुख्यमंत्री के मुताबिक, यह प्रक्रिया काफी समय से लंबित थी। वर्ष 1994 में दिल्ली के सभी पांच रिज क्षेत्रों को भारतीय वन अधिनियम की धारा 4 के तहत अधिसूचित किया गया था, लेकिन उन्हें अंतिम कानूनी संरक्षण नहीं मिल पाया था। अब सेंट्रल रिज को आरक्षित वन घोषित करने के साथ यह लंबा इंतजार खत्म हुआ है।

इससे पहले 4080.82 हेक्टेयर क्षेत्र रिजर्व घोषित 
इससे पहले पिछले साल 24 अक्टूबर को दक्षिणी रिज के करीब 4080.82 हेक्टेयर क्षेत्र को भी आरक्षित वन घोषित किया गया था। सेंट्रल रिज की नई अधिसूचना के बाद अब तक कुल 4754.14 हेक्टेयर रिज क्षेत्र को यह दर्जा मिल चुका है। सरकार का कहना है कि बाकी रिज क्षेत्रों को भी जल्द ही इसी तरह आरक्षित वन घोषित किया जाएगा और इसके लिए प्रक्रिया तेजी से चल रही है।

वन क्षेत्र को मजबूत कानूनी सुरक्षा मिली
आरक्षित वन का दर्जा मिलने के बाद अब इन इलाकों को मजबूत कानूनी सुरक्षा मिलेगी। इससे अतिक्रमण, अवैध निर्माण और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही वन विभाग को संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन के कामों को और बेहतर तरीके से लागू करने का मौका मिलेगा।

प्रदूषण के खिलाफ भविष्य के लिए योजना
सरकार का मानना है कि ये कदम सिर्फ आज के लिए नहीं, बल्कि भविष्य के लिए भी बेहद जरूरी है। बढ़ते प्रदूषण और तेजी से फैलते शहरीकरण के बीच ऐसे फैसले ही शहर को सांस लेने लायक बनाए रख सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पर्यावरण को लेकर गंभीर है और दिल्ली की हरित संपदा को बचाने के लिए लगातार काम करती रहेगी।
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