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सर गंगा राम अस्पताल के डॉक्टरों का कमाल, इराकी महिला की गले की नली से निकाली 53 पथरी

Thu, 07 Nov 2019 06:56 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Thu, 07 Nov 2019 06:56 PM IST
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53 stones taken out of thin tube of spit of Iraqi woman, doctors said challenge
पीड़ित इराकी महिला - फोटो : अमर उजाला

राजधानी दिल्ली स्थित सर गंगा राम अस्पताल के डॉक्टरों ने हाल ही में एक 66 वर्षीय इराकी मरीज का ऑपरेशन किया और उसकी थूक की नली से 53 पथरी निकालीं। सर गंगा राम अस्पताल के ई.एन.टी. कंसलटेंट डॉ. वरुण राय ने बताया की ऑपरेशन की सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि 3 मि.मी. चौड़ी नली पर कोई जख्म लगे बिना सभी पत्थरों को सफलतापूर्वक हटा दिया जाए। 

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उन्होंने बताया कि शरीर में बिना किसी कट के बास्केट और फोरसेप्स का उपयोग करके पत्थरों को एक-एक करके हटाया गया। इस पूरी प्रक्रिया में दो घंटे लगे और अंत में 53 पत्थर निकाले गए। डॉ. वरुण ने आगे बताया कि दुनियाभर के साहित्य की व्यापक समीक्षा के बाद पता चला कि पैरोटिड ग्लैंड के भीतर से 25 से अधिक पत्थर निकालने की सर्जरी अभी तक कहीं भी नहीं सफल हुई है।

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इराक की राजधानी बगदाद में रहने वाली 66 वर्षीय महिला भोजन या पेय के बाद पैरोटिड ग्रंथि के बार-बार होने वाले दर्द और सूजन से पीड़ित थी। डॉक्टरों से परामर्श के बाद उसे पता चला कि उसके दाएं तरफ पैरोटिड नली में कई पत्थर हैं और सबसे बड़ा पत्थर लगभग 8 मि.मी. आकार का है, जो नली के बीच में अटका हुआ है।

अपने देश और आसपास के अधिकांश डॉक्टरों ने पेरोटिड ग्रंथि को हटाने की एक प्रक्रिया का सुझाव दिया जो चेहरे पर एक भद्दा निशान छोड़ देता और उसके चेहरे को लकवाग्रस्त कर देता । वह सियालेंडोस्कोपी नामक एक प्रक्रिया के बारे में सुनकर भारत आई थी जहां सिर्फ 1.3 मि.मी. माप वाला एक छोटा एंडोस्कोप पैरोटिड ग्रंथि में डाला जाता है और रुकावट का कारण पता किया जाता है। 
 

सर गंगा राम अस्पताल में इलाज की प्रक्रिया की शुरुआत हुई, जहां पैरोटिड नली की एंडोस्कोपी से पता चला और देखा गया कि सीटी स्कैन में बड़ा पत्थर वास्तव में छोटे पत्थरों का एक समूह है जो एक साथ फसा हुआ था। सितम्बर 2019 के आखिरी हफ्ते में इस महिला का ऑपरेशन किया गया। 

डॉ. वरुण राय के नेतृत्व में इस ऑपरेशन को सफल बनाने वाले डॉक्टरों ने कहा कि पैरोटिड ग्रंथि में इतनी बड़ी संख्या में पथरी होना काफी दुर्लभ मामला है। पैरोटिड ग्रंथि में पत्थरों की घटना सामान्य आबादी के 0.02% से कम है और कई पत्थर होना और भी दुर्लभ हैं। मरीज अब बिना दर्द के अपनी पसंद का खाना खा सकती है। रोगी और उसके परिजन ने जब उसकी ग्रंथि से निकाले गए पत्थरों की बड़ी संख्या को दिखाया तो टिप्पणी की कि "इतने सारे पत्थर, मैं अब एक घर बना सकती  हूं।"

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