रिंग रेल ना बन जाए केजरीवाल की मुसीबत, 50 हजार झुग्गी अड़चन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आबोहवा साफ करने के लिए दिल्ली में रिंग रेल दौड़ाने की रेल मंत्री की घोषणा के दूसरे दिन ही रेलवे अधिकारियों को योजना पर रेड सिग्नल दिखने लगा है।
वे इस योजना को पुनर्जीवित करने की सबसे बड़ी चुनौती अतिक्रमण को मान रहे हैं। उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक एके पुठिया और दिल्ली मंडल के प्रबंधक अरुण अरोरा शुक्रवार को बड़ौदा हाउस में मीडिया को बताया कि किसी काम में असफलता का यह मतलब नहीं कि हम सफलता का प्रयास छोड़ दें।
रेलवे को उम्मीद है कि रिंग रेल चलाने को लेकर दिल्ली सरकार का रुख सकारात्मक होगा। इसके लिए जल्द ही राज्य सरकार के साथ बैठक की जाएगी।
अतिक्रमण हटाने पर रेलवे को पहले भी मिला है कड़ा अनुभव
खास बात यह कि आईटीओ मेट्रो स्टेशन के उद्घाटन के मौके पर केंद्रीय शहरी विकास मंत्री एम. वैंकेया नायडू ने भी कहा था कि दिल्ली सरकार का सहयोग मिलने पर रिंग रेल के जीर्णोद्धार होगा।
गौरतलब है कि कुछ वक्त पहले शकूरबस्ती का अतिक्रमण हटाते वक्त रेलवे को दिल्ली सरकार की ओर से कड़वा अनुभव मिल चुका है। रेलवे ने शुक्रवार को गेंद दिल्ली सरकार के पाले में डाल दी।
जीएम उत्तर रेलवे एके पुठिया ने उम्मीद जताई कि दिल्ली सरकार रिंग रेलवे की बाधाओं को दूर करने में सहयोग देगी।
रिंग रेल की जगह लोगों ने बस और मेट्रो को विकल्प के रूप में चुना है
35.34 किमी लंबे सर्किल में फिलहाल 50 हजार से ज्यादा झुग्गियां अतिक्रमण करके बनाई गई हैं। कई रेलवे स्टेशनों के प्रवेश व निकासी मार्ग पर भी अतिक्रमण का बोलबाला है।
रिंग रेल को चलाने के लिए राज्य सरकार की तरफ से बेघरों के लिए पुनर्वास की व्यवस्था करने के साथ स्टेशन तक पहुंचने के लिए परिवहन की व्यवस्था करना जरूरी है।
इस लाइन के स्टेशनों तक पहुंचने के लिए सार्वजनिक परिवहन का भारी अभाव है। रिंग रेल की जगह लोगों ने बस और मेट्रो को विकल्प के रूप में चुना है।