केजरीवाल की रैली की 5 छिपी हुई बातें
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आम आदमी पार्टी (आप) संयोजक अरविंद केजरीवाल जंतर-मंतर पर बेशक कांग्रेस और भाजपा पर हमला बोल रहे थे, लेकिन उनकी पार्टी ने भी दोनों दलों की राह पकड़ ली है।
दरअसल पार्टी की ओर से पहली बार रैली में लोगों को लाने के लिए बसों का इंतजाम किया था। पार्टी सूत्रों की मानें तो प्रत्येक विधान सभा में औसतन पांच बसों का इंतजाम किया था।
यही नहीं सभी बसों के आने का समय भी तय था। यही वजह रही की दो बजे तक अमूमन खाली दिख रहा जंतर-मंतर एक घंटे में पूरा भर गया।
नेताओं को दी गई भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी
पार्टी के एक नेता ने बताया कि सभी विधानसभाओं क्षेत्रों में सक्रिय नेताओं को लोगों का रैली स्थल तक पहुंचने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
पार्टी कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों से बात कर रहे थे। कोशिश थी कि प्रत्येक कार्यकर्ता न्यूनतम दस लोगों को चलने को तैयार करे।
वहीं, ऑटो यूनियन से जुड़े एक नेता के मुताबिक, रविवार को अवकाश का दिन था। ऐसे में ऑटो, ई-रिक्शा, रिक्शा वाले, रेहड़ी पटरी दुकानदारों समेत झुग्गी झोपड़ी से लोगों को जंतर-मंतर पर लाने में कामयाबी मिली।
फिर भी राखी बिड़लान को नहीं मिले लोग
दिल्ली में चुनाव कराने के लिए आम आदमी पार्टी की ओर आयोजित रैली में भीड़ जुटाने की तमाम कवायदों के बाद भी कई बसें खाली रह गईं।
एक आप नेता के अनुसार पार्टी ने सभी विधायकों को उनके क्षेत्रों से भीड़ जुटाने के लिए कहा था। कई नेता इसमें कामयाब भी रहे।
लेकिन राखी बिड़लान इसपे उतनी खरी नहीं उतरीं। उनकी नाम के पोस्टर लगी बसों में लोगों की संख्या कम थी। इसमें कई सीटें भी खाली भी थीं। इन बसों में मुश्किल से 20-25 लोग ही आए थे। इसके अलावा गुलाब व कुछ अन्य नेता भी भीड़ जुटाने में असफल रहे।
15 रुपये में बिकी चाय
महंगाई से निजात पाने की उम्मीद से जंतर-मंतर पहुंचे आम लोगों को महंगाई का सामना करना पड़ा। दुकानदारों ने केजरीवाल की रैली में चांदी काटी।
यहां आमतौर पर 7-10 रुपये में मिलने वाली एक प्याली चाय 15-20 रुपये में बिकी। वहीं दुकानदारों ने पानी, कोल्ड ड्रिंक्स समेत दूसरी चीजों के लिए भी खरीदारों से ज्यादा पैसे वसूले।
केजरीवाल ने तोड़वाई शादी
केजरीवाल ने कहा कि आरएसएस और बीजेपी की मीटिंग हुई थी। उसमें खरीद-फरोख्त कर बीजेपी सरकार बनाने का फैसला किया गया। कांग्रेस और बीजेपी में सेटिंग हो भी गई थी।
छह कांग्रेस विधायक बीजेपी में जाने वाले थे। 20-20 करोड़ का दहेज दिया जाना था। मंगनी हो गई थी। लेकिन ‘आप’ ने शादी तुड़वा दी। इसके बाद हमारे 15 विधायकों को भी तोड़ने की कोशिश की गई, लेकिन वे नहीं टूटे।