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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   455 beds vacant in GTB, two patients on one bed in Gynaecology ward

Delhi NCR News: जीटीबी में 455 बेड खाली, गायनी वार्ड में एक बेड पर दो मरीज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 24 Sep 2026 06:38 PM IST
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एलईडी स्क्रीन पर करीब 1,400 में से 944 बेड पर भर्ती दिखे मरीज
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अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। जीटीबी अस्पताल में सैकड़ों बेड खाली होने के बावजूद मेटरनल एंड चाइल्ड हेल्थ ब्लॉक के गायनी वार्ड में प्रसूताओं को बेड की कमी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल की एलईडी स्क्रीन पर करीब 1,400 बेड में से 455 खाली दिख रहे हैं। इसके बावजूद, गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों वाली माताओं को एक ही बेड साझा करना पड़ रहा है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है।
कई जगह एक ही बेड पर दो गर्भवती महिलाओं को रखा जा रहा है। प्रसव के बाद भी दो माताओं और उनके नवजात बच्चों को एक ही बेड साझा करना पड़ता है। परिजनों का कहना है कि प्रसव के बाद मां और नवजात बच्चे को साफ-सुथरी और पर्याप्त जगह की जरूरत होती है।
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दिलशाद गार्डन निवासी सद्दाम ने बताया कि एक बेड पर दो से तीन गर्भवती महिलाओं को रखने से काफी दिक्कत होती है। सीमापुरी निवासी रानी के मुताबिक प्रसव के बाद मां और बच्चे के लिए अलग और साफ जगह होनी चाहिए। वार्ड के अंदर बेड की कमी के साथ बाहर तीमारदारों के लिए भी बैठने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। बैठने और आराम करने की व्यवस्था न होने के कारण कई तीमारदार सीढ़ियों पर या वार्ड के बाहर जमीन पर बैठने को मजबूर हैं।
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रोज करीब 100 प्रसव, 250 से 300 बेड की क्षमता
डॉक्टर के अनुसार गायनी विभाग में रोज करीब 100 प्रसव होते हैं, जिनमें सामान्य और सिजेरियन डिलीवरी शामिल हैं। विभाग की क्षमता 250 से 300 बेड की है। मरीजों का दबाव अधिक होने के कारण उपलब्ध बेड पर एक से ज्यादा मरीजों को रखना पड़ता है।


कोट-
गायनी विभाग मरीजों का भार काफी अधिक है और विभाग की बेड क्षमता सीमित है। अस्पताल उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम इस्तेमाल कर मरीजों को सुविधा देने की कोशिश कर रहा है। एलईडी पर खाली दिख रहे बेड दूसरे विभागों के लिए हैं, जिन्हें गायनी में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।
-डॉ प्रवीण कुमार, एडिशनल मेडिकल सुप्रिटेंडेंट, जीटीबी अस्पताल
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