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दिल्ली दंगा मामला: भजनपुरा पेट्रोल पंप हिंसा मामले में पांच दोषियों को दो साल से अधिक की सजा
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दिल्ली दंगा मामला:
-अलग-अलग धाराओं में दोषी अरिफ, मोहम्मद खालिद, अब्दुल सत्तार, तनवीर अली और हुनैन को अधिकतम 2-2 साल के कठोर कारावास की सजा
-सजा पर बहस के दौरान राज्य की ओर से विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) ने दोषियों को अधिकतम सजा देने की मांग की
अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। कड़कड़डूमा कोर्ट में दिल्ली दंगों के दौरान भजनपुरा इलाके में पेट्रोल पंप के पास हुई हिंसा के मामले में पांच दोषियों को सजा सुनाई गई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह की अदालत ने अलग-अलग धाराओं में दोषी अरिफ, मोहम्मद खालिद, अब्दुल सत्तार, तनवीर अली और हुनैन को अधिकतम 2-2 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही, प्रत्येक पर 13,500 का जुर्माना लगाया। इससे पहले अदालत ने पांच दोषियों को दंगा करने, गैर-कानूनी भीड़ का हिस्सा बनने, सरकारी काम में बाधा डालने और पुलिस पर हमला करने का दोषी ठहराया था।
सजा पर बहस के दौरान राज्य की ओर से विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) ने दोषियों को अधिकतम सजा देने की मांग की। अभियोजन ने कहा कि दोषियों ने पुलिसकर्मियों पर हिंसक तरीके से हमला किया, जबकि पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी कर रहे थे। लिखित दलील में कहा कि यह घटना सामाजिक व्यवस्था और कानून के शासन के लिए गंभीर चुनौती थी। पुलिसकर्मियों को उस समय निशाना बनाया गया, जब वे दंगे को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे थे। अभियोजन ने कहा कि भीड़ ने वर्दी में मौजूद पुलिस अधिकारियों पर पत्थर फेंके और सरकारी कर्मचारियों को उनके कर्तव्यों का पालन करने से स्वेच्छा से रोका। अभियोजन के अनुसार, इस घटना से भय और अराजकता का माहौल पैदा हुआ। राज्य की ओर से यह भी दलील दी गई कि किसी एक दोषी के खिलाफ अलग-अलग हिंसक कृत्य को साबित नहीं किया जाना उनकी सामूहिक आपराधिक जिम्मेदारी को कम नहीं करता।
53 लोगों मारे गए थे, 26 ने दी गवाही : मामला भजनपुरा थाने में एएसआई अरविंद कुमार की शिकायत पर दर्ज हुआ था। शिकायत के अनुसार, 24 फरवरी 2020 को दोपहर करीब एक बजे पुलिस टीम नूरे इलाही क्षेत्र में तैनात थी। करीब दो बजे सूचना मिली कि भजनपुरा पेट्रोल पंप के पास बड़ी संख्या में लोग जुट रहे हैं। पुलिस का दावा था कि करीब 100 से 150 लोगों की भीड़ सीएए और एनआरसी के विरोध में नारेबाजी करते हुए डिवाइडर तोड़कर पेट्रोल पंप की ओर बढ़ी। भीड़ पर पथराव करने, पुलिसकर्मियों से हाथापाई करने और पेट्रोल पंप की मशीनों में तोड़फोड़ कर आग लगाने के आरोप लगाए गए थे। वाहनों और दुकानों को भी आग के हवाले करने का आरोप था। मामले में मुख्य जांच अधिकारी एसआई मोहित कुमार समेत कुल 26 गवाह अदालत में पेश किए गए। फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में 53 लोग मारे गए थे और करीब दो सौ लोग घायल हो गए थे।
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पुलिसकर्मियों के बयानों को माना था विश्वसनीय : अदालत ने एएसआई अरविंद, सेवानिवृत्त एएसआई वेदपाल, सेवानिवृत्त हेड कांस्टेबल अरविंद, हेड कांस्टेबल जगरूप और कांस्टेबल नेमी चंद के बयानों को विश्वसनीय माना। प्रिंस डिजिटल स्टूडियो के संचालक प्रेम सिंह और कैमरामैन अमित शाक्य द्वारा रिकार्ड किए गए वीडियो और तस्वीरों से भी स्थानीय निवासी जगरूप की मौके पर मौजूदगी की पुष्टि हुई। जगरूप ने अदालत में पांच आरोपियों की पहचान भीड़ के सक्रिय सदस्यों के रूप में की। अदालत ने माना था कि भीड़ साझा मकसद से जुटी थी और उसने पुलिसकर्मियों पर भारी पथराव किया, जिसके कारण पुलिसकर्मियों को दीवार फांदकर जान बचानी पड़ी। इसी आधार पर पांचों को दंगा और पुलिस पर आपराधिक बल प्रयोग का दोषी माना गया था।
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-अलग-अलग धाराओं में दोषी अरिफ, मोहम्मद खालिद, अब्दुल सत्तार, तनवीर अली और हुनैन को अधिकतम 2-2 साल के कठोर कारावास की सजा
-सजा पर बहस के दौरान राज्य की ओर से विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) ने दोषियों को अधिकतम सजा देने की मांग की
अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। कड़कड़डूमा कोर्ट में दिल्ली दंगों के दौरान भजनपुरा इलाके में पेट्रोल पंप के पास हुई हिंसा के मामले में पांच दोषियों को सजा सुनाई गई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह की अदालत ने अलग-अलग धाराओं में दोषी अरिफ, मोहम्मद खालिद, अब्दुल सत्तार, तनवीर अली और हुनैन को अधिकतम 2-2 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही, प्रत्येक पर 13,500 का जुर्माना लगाया। इससे पहले अदालत ने पांच दोषियों को दंगा करने, गैर-कानूनी भीड़ का हिस्सा बनने, सरकारी काम में बाधा डालने और पुलिस पर हमला करने का दोषी ठहराया था।
सजा पर बहस के दौरान राज्य की ओर से विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) ने दोषियों को अधिकतम सजा देने की मांग की। अभियोजन ने कहा कि दोषियों ने पुलिसकर्मियों पर हिंसक तरीके से हमला किया, जबकि पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी कर रहे थे। लिखित दलील में कहा कि यह घटना सामाजिक व्यवस्था और कानून के शासन के लिए गंभीर चुनौती थी। पुलिसकर्मियों को उस समय निशाना बनाया गया, जब वे दंगे को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे थे। अभियोजन ने कहा कि भीड़ ने वर्दी में मौजूद पुलिस अधिकारियों पर पत्थर फेंके और सरकारी कर्मचारियों को उनके कर्तव्यों का पालन करने से स्वेच्छा से रोका। अभियोजन के अनुसार, इस घटना से भय और अराजकता का माहौल पैदा हुआ। राज्य की ओर से यह भी दलील दी गई कि किसी एक दोषी के खिलाफ अलग-अलग हिंसक कृत्य को साबित नहीं किया जाना उनकी सामूहिक आपराधिक जिम्मेदारी को कम नहीं करता।
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53 लोगों मारे गए थे, 26 ने दी गवाही : मामला भजनपुरा थाने में एएसआई अरविंद कुमार की शिकायत पर दर्ज हुआ था। शिकायत के अनुसार, 24 फरवरी 2020 को दोपहर करीब एक बजे पुलिस टीम नूरे इलाही क्षेत्र में तैनात थी। करीब दो बजे सूचना मिली कि भजनपुरा पेट्रोल पंप के पास बड़ी संख्या में लोग जुट रहे हैं। पुलिस का दावा था कि करीब 100 से 150 लोगों की भीड़ सीएए और एनआरसी के विरोध में नारेबाजी करते हुए डिवाइडर तोड़कर पेट्रोल पंप की ओर बढ़ी। भीड़ पर पथराव करने, पुलिसकर्मियों से हाथापाई करने और पेट्रोल पंप की मशीनों में तोड़फोड़ कर आग लगाने के आरोप लगाए गए थे। वाहनों और दुकानों को भी आग के हवाले करने का आरोप था। मामले में मुख्य जांच अधिकारी एसआई मोहित कुमार समेत कुल 26 गवाह अदालत में पेश किए गए। फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में 53 लोग मारे गए थे और करीब दो सौ लोग घायल हो गए थे।
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पुलिसकर्मियों के बयानों को माना था विश्वसनीय : अदालत ने एएसआई अरविंद, सेवानिवृत्त एएसआई वेदपाल, सेवानिवृत्त हेड कांस्टेबल अरविंद, हेड कांस्टेबल जगरूप और कांस्टेबल नेमी चंद के बयानों को विश्वसनीय माना। प्रिंस डिजिटल स्टूडियो के संचालक प्रेम सिंह और कैमरामैन अमित शाक्य द्वारा रिकार्ड किए गए वीडियो और तस्वीरों से भी स्थानीय निवासी जगरूप की मौके पर मौजूदगी की पुष्टि हुई। जगरूप ने अदालत में पांच आरोपियों की पहचान भीड़ के सक्रिय सदस्यों के रूप में की। अदालत ने माना था कि भीड़ साझा मकसद से जुटी थी और उसने पुलिसकर्मियों पर भारी पथराव किया, जिसके कारण पुलिसकर्मियों को दीवार फांदकर जान बचानी पड़ी। इसी आधार पर पांचों को दंगा और पुलिस पर आपराधिक बल प्रयोग का दोषी माना गया था।