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आरटीआई में खुलासा, 10 साल में 424 हाथियों की हत्या, 624 शिकारी गिरफ्तार

Fri, 11 Jan 2019 06:03 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा Published by: Vikas Kumar Updated Fri, 11 Jan 2019 06:03 AM IST
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424 elephants killed and 624 hunters arrested in last ten years
Elephants - फोटो : फाइल फोटो

समाजसेवी एवं दिल्ली उच्च न्यायालय के अधिवक्ता रंजन तोमर के वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो में लगाई गई आरटीआई से चौंकाने वाली बात सामने आई है। दस वर्षों में देशभर में 424 हाथियों को शिकारियों ने मार दिया। अब तक 624 शिकारियों को गिरफ्तार किया गया है।

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गौरतलब है कि रंजन तोमर ने ही हाल ही में पिछले दस वर्ष में मारे गए 384 शेरों की खबर आरटीआई के माध्यम से उजागर की थी। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस पर गौर किया गया। पर्यावरण एवं वन्यजीवों के प्रति जाग्रति आई थी। वहीं, 280 प्रजातियों के विलुप्त होने की खबर प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंची थी। इस पर कड़े कानून बनाने की बात भी कही गई थी।
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रंजन ने बताया कि हाथियों को भी न्याय की उम्मीद जगी है। ज्यादातर हाथियों को दांत के लिए मारा जाता है। जो काले बाजार में महंगे दामों पर बिकता है। पहले सवाल में यह जानकारी मांगी थी कि 2018 में हाथियों की कितनी आबादी है। जिस पर जानकारी संकलित न होने की बात ब्यूरो ने कही। साथ ही जितने हाथी दांत शिकारियों से मिले उसकी कीमत का अंदाजा होने से भी ब्यूरो ने इंकार किया। हालांकि, राज्य वार किस साल कितने हाथी मारे गए, इस बाबत जानकारी मिली। 
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केरल में मरे सबसे ज्यादा हाथी 
जवाब में बताया गया कि सबसे ज्यादा हाथी केरल में मारे गए। 2008 से 2014 तक 23 ,22 ,31 ,38 ,15, 6 एवं 1 हाथी मारे गए। कुल योग 136 बनता है। जबकि 2018 के बाद एक भी हाथी नहीं मारा गया। पश्चिम बंगाल में 48, कर्नाटक में 46, तमिलनाडु में 44 एवं ओडिशा में 41, यूपी में 21, उत्तराखंड में 20 हाथी मार दिए गए। 


2014 के बाद मात्र 71 हाथी मारे गए 
इन आंकड़ों को देखा जाए तो सरकार की नीतियों के कारण भी हत्या दर बढ़ती और घटती रही है। 2014 के बाद हाथियों की हत्या में कमी आई है। यानी 2008 से 2014 तक 353 हाथी मारे गए जबकि 2014 के बाद 71 हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को बचाने के लिए जानवरों को बचाना अति आवश्यक है।

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