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कोविड : दिल्ली की सैलून व ब्यूटी पार्लर इंडस्ट्री को उठाना पड़ा 350 करोड़ का नुकसान
Thu, 29 Jul 2021 02:45 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Thu, 29 Jul 2021 02:45 PM IST
सार
- एसोसिएशन द्वारा आयोजित सेमिनार में सैलून एवं ब्यूटी इंडस्ट्री के लिए आयोग बनाने की मांग की गई
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सुरक्षा उपायों के साथ खुले हेयर सैलून
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोविड ने सैलून के साथ ब्यूटी इडस्ट्री को भी नुकसान पहुंचाया है। अनलॉक में कड़ी पाबंदियों की वजह से इस इंडस्ट्री को 350 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान पहुंचा है। साथ ही आने वाले दिनों में भी इस नुकसान का भरपाया होता नहीं दिख रहा है। यह बातें सैलून ऑनर वेलफेयर एसोसिएशन (सोवा) के सेमिनार में सामने आई।
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चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) के नेतृत्व में आयोजित सेमिनार में कोविड की वजह से आ रही परेशानियों पर चर्चा की गई। जिसमें दिल्ली के प्रमुख सैलून और ब्यूटी पार्लर संचालक उपस्थित रहे। सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने सेमिनार में कहा कि कोरोना काल में इंडस्ट्री को करीब 350 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है।
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जीएसटी की दरों ने भी इस इंडस्ट्री को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, क्योंकि ब्यूटी प्रोडक्ट्स पर 18 प्रतिशत जीएसटी वसूला जा रहा है। ग्राहक जीएसटी का भुगतान नहीं करते हैं। इस वजह से यह नुकसान सैलून संचालकों को ही भरना पड़ा है। लिहाजा ब्यूटी प्रॉडक्ट्स पर जीएसटी की दर घटाकर 12 प्रतिशत की जानी चाहिए।
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सीटीआई महिला काउंसिल की अध्यक्ष मालविका साहनी ने कहा कि इस इंडस्ट्री के लिए ऑनलाइन कंपनियों की सर्विस भी चिंता का विषय है। लॉकडाउन में जहां सैलून और पार्लर बंद रहे वहीं ऑनलाइन कंपनियों ने लोगों को घर-घर जाकर सर्विस दी। वो जीएसटी भी नहीं देते। इस वजह से भी खासा नुकसान उठाना पड़ा। सहनी ने ऑनलाइन कंपनियों पर नियंत्रण लाने की मांग की। एसोसिएशन ने सैलून और पार्लर का आयोग बनाने की भी डिमांड की। ताकि इंडस्ट्री की समस्याओं पर त्वरित काम हो।
सेमिनार में सैलून एवं ब्यूटी पार्लर इंडस्ट्री से कुसुम गोयल, उमेश दत्त, प्रेम इस्रानी, मीनाक्षी दत्त, जानवी कौर, धीरज, राहुल मेहंदीरत्ता, टीना मेहंदीरत्ता, संदीप कालरा, पिंकी सिंह, निर्मल रंधावा, राकेश गोगिया, नीलम हरीश समेत अन्य संचालकों का कहना था कि सैलून इंडस्ट्री के लिए सीटीआई अलग से काउंसिल बनाए ताकि सरकार तक परेशानी बताई जा सके।