33 साल बाद पहले रोजे में इबादत 15 घंटे 38 मिनट
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इस बार रोजेदार अल्लाह की इबादत में ज्यादा वक्त गुजारेंगे। 33 साल बाद वे साढ़े 15 घंटे से अधिक समय का रोजा रखेंगे। इस बार पहले रोजे के दिन सहरी तड़के 3:46 बजे और इफ्तार शाम 7:24 बजे होगा।
यानी इस बार पहला रोजा 15 घंटे 38 मिनट बाद खोला जाएगा। कैलेंडर के मुताबिक, 33 साल बाद रमजान का महीना जून में आया है। इससे पहले 1982 में 23 जून से रमजान का महीना शुरू हुआ था, जबकि इस बार 19 जून से शुरू हो रहा है।
इस साल पूरे महीने रोजे की अवधि में ज्यादा कमी नहीं आएगी। पूरे माह सहरी में 15 मिनट की गिरावट आएगी, जबकि इफ्तार में 1 मिनट ही गिरावट होगी। दिन बड़ी और रातें छोटी होने की वजह से हर रोजा 15 घंटे से ज्यादा समय का होगा।
सहरी का वक्त तड़के 3:46 बजे से शुरू होगा
इस्लामी कैलेंडर व मस्जिदों में जारी शेड्यूल के मुताबिक सहरी का वक्त तड़के 3:46 बजे से शुरू होगा और आखिरी रोजे का वक्त 3:59 बजे पर होगा। इसी तरह इफ्तार का वक्त शाम 7:24 बजे से घटकर 7:23 बजे तक हो पाएगा।
स्थानीय जामा मस्जिद के इमाम जान मोहम्मद ने बताया कि रोजा फजर (सुबह की नमाज) से पहले शुरू हो जाता है और मगरिब (दिन डूबने के बाद) की नमाज में खत्म होता है। इसी के अनुसार रोजे का वक्त निकाला जाता है।
जून में दिन लंबा होता है। इस वजह से रोजेदारों को लंबा रोजा रखना होगा। आसमान में चांद की पुष्टि होने पर पहला रोजा शुरू हो जाएगा। इबादत के नजरिये से यह सबसे अहम महीना है।