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नहरपार चल रहीं 30 डाइंग यूनिटें सील
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Fri, 26 Feb 2016 05:53 PM IST
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फरीदाबाद में भू-जल को जहरीला बना रहीं नहरपार की डाइंग यूनिटों पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है। मामला एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) में जाने के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हरकत में आ गया है।
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बोर्ड ने 30 से ज्यादा अवैध डाइंग यूनिटों को सील कर दिया है, जबकि सर्वे के आधार पर 15 अन्य यूनिटों को बंद करने की मंजूरी राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मांगी है।
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पिछले दिनों शहर में चल रहीं 150 डाइंग यूनिटों से संबंधित याचिका एनजीटी में दायर की गई थी, जिसपर विचार करते हुए एनजीटी ने हरियाणा सरकार और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जवाब मांगा था।
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हालांकि, मामले की अगली सुनवाई 14 मार्च को होनी है लेकिन इससे पहले ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कार्रवाई शुरू कर दी है। पानी में जहर घोल रही इन डाइंग यूनिटों का मुद्दा अमर उजाला भी लगातार उठा रहा है।
03 फरवरी के अंक में इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था। इन डाइंग यूनिटों से क्रोमियम, विभिन्न धातुओं के ऑक्साइड, एसिड और अन्य नुकसानदेह केमिकल युक्त करीब एक लाख लीटर पानी नालियों के जरिए बहाया जाता है। आरोप लगते रहे हैं कि भूजल और यमुना के पानी को दूषित कर रहीं यह फैक्ट्रियां प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की लापरवाही की वजह से चल रही हैं।
ईटीपी महज दिखावा
फरीदाबाद स्माल स्केल पॉल्यूशन कंट्रोल कोऑपरेशन सोसायटी की ओर से 2014 में डाइंग यूनिटों को सर्वे किया गया था। सोसायटी की रिपोर्ट के मुताबिक अधिकतर डाइंग यूनिट बिना एफ्ल्यूएंट ट्रीटमेंट प्लांट(ईटीपी) के चलाई जा रही हैं। गिनती के कुछ यूनिटों में दिखावे के लिए ईटीपी लगाया गया है लेकिन वह काम नहीं करता। इन यूनिटों को केमिकल युक्त पानी बिना ट्रीटमेंट के ही नालों में बहाया जा रहा है। यह केमिकल युक्त पानी सीपेज के जरिए भूजल को प्रदूषित कर रहा है और नालों के जरिए यमुना का पानी भी खराब कर रहा है।
मिलीभगत से चल रहा खेल
नहरपार अवैध तरीके से चल रहा अवैध डाइंग कारोबार मिलीभगत का नतीजा है। दरअसल, यह यूनिटें बिजली पर आधारित हैं। अवैध इकाइयों को वैध कनेक्शन कैसे मिले, यह बड़ा सवाल है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से कई बार बिजली निगम को अवगत कराया जा चुका है। कई बार कनेक्शन काटने की कार्रवाई की मांग की गई लेकिन बिजली निगम ने आज तक कोई कार्रवाई नहीं की। डाइंग यूनिट चलाने वालों पर कानूनी शिकंजा कसने के लिए अब बोर्ड ने बिजली निगम से कनेक्शनधारकों का रिकॉर्ड मांगा है।
सर्वे में मिलीं 170 इकाइयां
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की मानें तो लगातार सर्वे किया जाता है। इसके आधार पर नहरपार में 170 से ज्यादा अवैध डाइंग यूनिटों की पहचान की गई है। कई यूनिटों को पहले भी सील किया गया था, लेकिन पुलिस, नगर निगम, हुडा व अन्य संबंधित महकमों का सहयोग न मिलने से सील तोड़कर फिर अवैध तरीके से यूनिटों को शुरू कर दिया जाता है।
नहरपार अवैध तरीके से चल रहीं डाइंग यूनिटों पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। कई यूनिटों को सील कर दिया गया है। पुख्ता कार्रवाई के लिए हमनें नगर निगम, हुडा और बिजली निगम से भी सहयोग मांगा है।-जयभगवान, क्षेत्रीय अधिकारी हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड