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Delhi NCR News: तिहाड़ से समय से पहले रिहा होंगे 26 उम्रकैद के कैदी
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51 मामलों पर मंथन के बाद सिर्फ 26 को मिली मंजूरी, एक विदेशी कैदी भी सूची में
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
तिहाड़ जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 26 कैदियों को समय से पहले रिहाई मिलेगी। खास बात ये है कि इन कैदियों में से अधिकांश ने अब तक 20 वर्ष की सजा पूरी नहीं की है, इसके बावजूद उन्हें रिहा करने की सिफारिश की गई। यह फैसला सेन्टेंस रिव्यू बोर्ड की बैठक में तमाम पहलुओं पर विचार के बाद लिया गया, जिसे बाद में उपराज्यपाल की मंजूरी मिली। जेल प्रशासन के अनुसार, समय पूर्व रिहाई का यह निर्णय केवल सजा की अवधि के आधार पर नहीं, बल्कि कैदियों के जेल आचरण, सुधार की संभावना, सामाजिक पुनर्वास और कानून-व्यवस्था पर संभावित प्रभाव जैसे पहलुओं को ध्यान में रखकर लिया है। इसके बाद संबंधित कैदियों को रिहा करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इस फैसले का सबसे अहम पहलू यह है कि रिहा किए जा रहे 26 कैदियों में केवल दो ऐसे हैं, जिन्होंने जेल में 20 वर्ष की अवधि पूरी की है। शेष कैदियों में अधिकांश ऐसे हैं, जिनकी सजा के 20 वर्ष पूरे होने में अभी कई साल बाकी हैं। जानकारी के अनुसार, करीब नौ कैदी ऐसे हैं, जिन्होंने अब तक केवल 15 वर्ष की सजा काटी है और जिनके लिए 20 वर्ष की अवधि वर्ष 2031 में पूरी होगी। यह स्थिति इस ओर इशारा करती है कि उम्रकैद के मामलों में अब 20 साल की न्यूनतम अवधि एक कठोर मानक नहीं रह गई है, बल्कि प्रत्येक मामले का अलग-अलग मूल्यांकन हो रहा है। यही कारण कि 51 कैदियों के मामलों पर विचार होने के बावजूद केवल 26 को ही रिहाई के लिए चुना गया। रिहाई पाने वाले कैदियों की सूची में एक विदेशी नागरिक भी शामिल है। हालांकि उन्हें सर्शत रिहाई मिल रही है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
तिहाड़ जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 26 कैदियों को समय से पहले रिहाई मिलेगी। खास बात ये है कि इन कैदियों में से अधिकांश ने अब तक 20 वर्ष की सजा पूरी नहीं की है, इसके बावजूद उन्हें रिहा करने की सिफारिश की गई। यह फैसला सेन्टेंस रिव्यू बोर्ड की बैठक में तमाम पहलुओं पर विचार के बाद लिया गया, जिसे बाद में उपराज्यपाल की मंजूरी मिली। जेल प्रशासन के अनुसार, समय पूर्व रिहाई का यह निर्णय केवल सजा की अवधि के आधार पर नहीं, बल्कि कैदियों के जेल आचरण, सुधार की संभावना, सामाजिक पुनर्वास और कानून-व्यवस्था पर संभावित प्रभाव जैसे पहलुओं को ध्यान में रखकर लिया है। इसके बाद संबंधित कैदियों को रिहा करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इस फैसले का सबसे अहम पहलू यह है कि रिहा किए जा रहे 26 कैदियों में केवल दो ऐसे हैं, जिन्होंने जेल में 20 वर्ष की अवधि पूरी की है। शेष कैदियों में अधिकांश ऐसे हैं, जिनकी सजा के 20 वर्ष पूरे होने में अभी कई साल बाकी हैं। जानकारी के अनुसार, करीब नौ कैदी ऐसे हैं, जिन्होंने अब तक केवल 15 वर्ष की सजा काटी है और जिनके लिए 20 वर्ष की अवधि वर्ष 2031 में पूरी होगी। यह स्थिति इस ओर इशारा करती है कि उम्रकैद के मामलों में अब 20 साल की न्यूनतम अवधि एक कठोर मानक नहीं रह गई है, बल्कि प्रत्येक मामले का अलग-अलग मूल्यांकन हो रहा है। यही कारण कि 51 कैदियों के मामलों पर विचार होने के बावजूद केवल 26 को ही रिहाई के लिए चुना गया। रिहाई पाने वाले कैदियों की सूची में एक विदेशी नागरिक भी शामिल है। हालांकि उन्हें सर्शत रिहाई मिल रही है।