खुलासा, फर्जी डिग्री के सहारे 250 को नौकरी
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एक ओर जहां सैकड़ों योग्य युवा बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं, वहीं डाक विभाग में फर्जीवाड़ा कर अयोग्य युवाओं को सरकारी नौकरी दे दी गई।
प्रदेशभर में की गईं करीब 250 भर्तियां गाजियाबाद-नोएडा में सक्रिय गिरोह ने कराई हैं। इसमें डाक विभाग के अफसरों को भी शामिल माना जा रहा है। ज्यादातर भर्तियों में एक ही बोर्ड के डाक्यूमेंट लगाए गए हैं।
दिलचस्प बात यह है कि उक्त नाम का कोई बोर्ड और स्कूल देश में है ही नहीं। जबकि रिकार्ड में मार्कशीट-सनद को उक्त विद्यालय-बोर्ड से सत्यापित भी दिखाया गया है।
स्कूल और बोर्ड है ही नहीं
डाक विभाग में विभिन्न पदों पर 2009 में भर्तियां की गई थीं। मेरिट के आधार पर इंटरपास युवाओं का चयन किया गया। नियुक्ति कमेटी ने चयनित युवाओं के स्कूल और बोर्ड से डॉक्यूमेंट सत्यापित कराए। ये वर्तमान में नौकरी कर रहे हैं।
डाक विभाग के एक अधिकारी ने 2013 में इस फर्जीवाड़े की शिकायत जिम्मेदार अफसरों से की, लेकिन मामले को दबा लिया गया। पिछले दिनों मकनपुर डाकघर पर तैनात रविप्रकाश के डॉक्यूमेंट के फर्जीवाड़े की शिकायत जोर-शोर से की गई।
रविप्रकाश ने इंद्रप्रस्थ हाईस्कूल खोड़ा गाजियाबाद से 2004 में हाईस्कूल और 2006 में इंटर उत्तीर्ण होना दिखाया है। इनको बोर्ड आफ हायर सेकेंडरी एजूकेशन दिल्ली से मार्कशीट-सनद प्रदान की गई हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि इस नाम का स्कूल और बोर्ड है ही नहीं।
मामले को दबाने में भी खेल
मामले को दबाने के लिए डाक विभाग के अफसरों ने रविप्रकाश को नौकरी से निकाल दिया है, जबकि कई अन्य की जांच शुरू कराई गई है। रविप्रकाश ने डाक विभाग के ही एक अधिकारी हवलदार सिंह पर फर्जी कागजात तैयार कराने का आरोप लगाया है।
इनको मेरिट में शामिल करने के लिए कागजात तैयार कराए गए। इस आधार पर करीब 250 युवाओं के भर्ती होने की बात अफसर स्वीकार रहे हैं। इनमें से करीब 22 युवक गाजियाबाद-नोएडा में हैं, इनमें से पांच की जांच शुरू कर दी गई है।
जबकि बुलंदशहर-हापुड़ में 20 युवक भर्ती किए गए हैं। आरोपी युवाओं को नौकरी से निकालकर भर्ती करने वाले अफसरों को बचाने की कोशिश की जा रही है।