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नेट बैंकिंग में सेंधमारी: देशभर में हजारों लोगों से करोड़ों रुपयों की ठगी में 23 गिरफ्तार, केवाईसी कराने के नाम पर हैक कर लेते थे मोबाइल

Wed, 30 Mar 2022 09:34 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Wed, 30 Mar 2022 09:34 PM IST
सार

पुलिस ने आरोपियों के पास से 58 मोबाइल फोन, 12 लैपटॉप, 20 डेबिट कार्ड, 202 सिमकार्ड और अन्य सामान बरामद किया है। आरोपियों ने इंटरनेट पर कई फिशिंग पेज तैयार किए हुए थे।

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23 arrested for duping thousands of people across the country used to hack mobiles in the name of getting kyc
Online Fraud - फोटो : istock

विस्तार

नेट बैंकिंग के जरिये केवाईसी करवाने के नाम पर देशभर के हजारों लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने के आरोप में स्पेशल सेल की आईएफएसओ यूनिट ने 23 लोगों को गिरफ्तार किया है। गैंग ने एसबीआई के योनो एप का फर्जी एप तैयार किया हुआ था। उस लिंक भेजकर आरोपी उस पर केवाईसी करवाने की बात करते थे। बाद में पीड़ितों के मोबाइल हैक कर उनके खातों में सेंध लगा ली जाती थी। फिलहाल देशभर की करीब 820 एफआईआर इस गैंग से लिंक हुई हैं। 

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पुलिस ने आरोपियों के पास से 58 मोबाइल फोन, 12 लैपटॉप, 20 डेबिट कार्ड, 202 सिमकार्ड और अन्य सामान बरामद किया है। आरोपियों ने इंटरनेट पर कई फिशिंग पेज तैयार किए हुए थे। जैसे ही पीड़ित इन पेज पर अपनी जानकारियां सांझा करते थे। आरोपी उनके जरिये इनके खातों में सेंध लगा देते थे। सूत्रों का कहना है कि पैन इंडिया फैले इस नेटवर्क के संपर्क में कई सौ लोग शामिल हैं। पुलिस की टीमें बाकी आरोपियों की तलाश कर रही है।
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आईएफएसओ यूनिट के पुलिस उपायुक्त केपीएस मल्होत्रा ने बताया कि पिछले दिनों से उनकी टीम को सूचना मिल रही थी कि कुछ लोग देशभर में लोगों से ऑन लाइन ठगी कर रहे थे। आरोपी पीड़ितों की बैंकिंग डिटेल जुटाकर वारदातों को अंजाम दे रहे थे। इसके लिए फिशिंग पेज, एसबीआई के योनो एप व दूसरे माध्यमों से लोगों को शिकार बनाया जा रहा था। केवाईसी के नाम पर लोग जैसे ही इन फर्जी एप या पेजों पर अपने बैंक खाते की जानकारी शेयर करते थे। आरोपी तुरंत इनके मोबाइल को हैक कर लेते थे। इसके बाद पीड़ितों के खाते में सेंध लगाकर रुपयों को अपने बैंक खातों में ट्रांसफर कर लिया जाता था। 
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आईएफएसओ ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू की। एसबीआई के अधिकारियों को भी पूछताछ में शामिल किया गया। छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला कि इस मॉड्यूल की करीब 100 से अधिक एफआईआर दर्ज थीं। इनमें 51 दिल्ली के लोग थे। पुलिस ने टेक्निकल सर्विलांस की जांच की तो पता चला कि आरोपी सूरत, कोलकाता, गिरिडीह, जामताड़ा, धनबाद और दिल्ली-एनसीआर में फैले हुए हैं। गैंग के सदस्य छह अलग-अलग मॉड्यूल में अपना काम कर रहे थे। आरोपियों की पहचान शुरू की गई।

इसके बाद एसीपी रमन लांबा, इंस्पेक्टर उदय संजीव सोलंकी, अरुण त्यागी, एसआई सुनील सिद्धू व अन्यों की सात अलग-अलग टीमों का गठन किया गया। पुलिस ने देशभर में जाकर इनकी रैकी की। 25 मार्च तड़के छापेमारी के बाद कुल 23 आरोपियों को दबोचा गया। इनमें 12 लोगों को सूरत, 6 को कोलकाता, दो को गिरिडीह, जामताड़ा से एक और धनबाद से दो लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनके पास से मोबाइल लैपटॉप और अन्य सामान बरामद किया गया। 

इनकी पहचान पवन मंडल (21), टिंकू कुमार मंडल (27), छोटू कुमार मंडल (24), संदीप मंडल (27), रामजीत मंडल (37), बिरेंद्र मंडल (31), सुशील कुमार मंडल (25), रवि कुमार मंडल (23), संजीत कुमार (26), राज किशोर मंडल (27), विकास कुमार मंडल  (20), महेंद्र मंडल (20), शंकर कुमार मंडल (33), पप्पू कुमार मंडल (27), कुलदीप मंडल (22), प्रमोद कुमार (21), बिनोद कुमार (36), नीरज शर्मा (26), टिंकू कुमार मंडल (24), टिंकू कुमार मंडल (26), उमेश कुमार मंडल (22), राजेंद्र मंडल (24) और संजय कुमार मंडल (26) के रूप में हुई है। पुलिस पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ कर मामले की छानबीन कर रही है।
 

हजारों लोगों करोड़ों की ठगी करने वाले गैंग के लोगों के अलग-अलग काम...

मामले की छानबीन कर रहे पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी पूछताछ जारी है कि इन लोगों ने देशभर में कितने लोगों को ठगा। माना जा रहा है कि हजारों लोगों से करोड़ों की ठगी की गई है। गैंग देशभर के कई राज्यों में फैला है। हर मॉड्यूल को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई थी।

. एक मॉड्यूल का काम फिशिंग लिंक और फर्जी पेज को तैयार करना होता था, जिससे ठगी की जा सके।
. दूसरा मॉड्यूल फर्जी आईडी सिमकार्ड लेता था, जिससे एक साथ बहुत एसएमएस भेजे जाते थे।
. अन्य मॉड्यूल का काम फिशिंग लिंक या फर्जी पेज भेजने का होता था, जिसमें केवाईसी करने के लिए कहा जाता था।
. एक अन्य मॉड्यूल का काम होता था, जैसे पीड़ित पेज पर अपनी जानकारी शेयर करता था, वह उसके अकाउंट को हैक कर रकम निकाल लेते थे, बाद में उनको अपने अकाउंट में ट्रांसफर कर लिया जाता था।
. एक मॉड्यूल का काम फर्जी आईडी के आधार पर बैंक खातों की जानकारी जुटाना होता था।
. आखिरी मॉड्यूल का काम बैंक में रुपये आते ही  उनको एटीएम के जरिये निकालना होता था।

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