कमाना होता तो नहीं खत्म करते कोटा, हाथ काटकर आपको दिए
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मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने नर्सरी दाखिले में कोटा खत्म करने पर कहा कि मैने अपना हाथ काटकर आपके (अभिभावकों) हाथ में दे दिया। कोटा और डोनेशन खत्म होगा। मैंने स्कूलों को कह दिया है कि दिल्ली सरकार से कोई सिफारिश नहीं आएगी।
कोई रिश्तेदार आता है कि दाखिला करवाओ, तो हम मना कर देते हैं, वो कहते हैं काहे के सीएम हैं, दाखिला नहीं करवा सकते। पैसा कमाना होता तो फिर कोटा खत्म नहीं करते, कार्यकर्ताओं के कहने पर दाखिला कराते और नाम भी कमाते।
मुख्यमंत्री ने एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में अभिभावकों के साथ संवाद में कहा कि सरकार 2016 शिक्षा और स्वास्थ्य को समर्पित करेगी। स्वास्थ्य विभाग की एक मीटिंग हो चुकी है, दूसरी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षकों की मीटिंग सोमवार को बुलाई है।
केजरीवाल ने कहा कि अभी लोग दाखिला कराने, अस्पतालों में बिस्तर के लिए सिफारिश कराने मेरे पास आते हैं। ये तो अधिकार है। इसलिए दोनो को दुरुस्त कर रहे हैं। अगले दो-तीन साल में सरकारी स्कूलों में प्राइवेट स्कूलों जैसी सुविधाएं होंगी तो अस्पताल में दिक्कत नहीं होगी।
गड़बड़ी देखकर भी हम चुप बैठ जाते तो हमें लोग गालियां देते।
मैं कहता हूं कि अगर मुख्यमंत्री के पास आना है तो बड़े काम के लिए आओ, ये दाखिला तो अधिकार है। केजरीवाल ने नर्सरी दाखिले में देरी से हस्तक्षेप पर कहा कि 31 दिसंबर तक तो स्कूलों को मानक डालने थे।
हमने स्कूलों पर विश्वास किया था, लेकिन कुछ स्कूलों ने विश्वासघात किया। दाखिले में मनमर्जी वाले मानक लगा दिए। मन में साफ है तो हम अच्छी सरकार हैं और स्कूलों के मन में काला है, गड़बड़ी करना चाहते हैं तो हमसे खराब कोई सरकार नहीं।
मुख्यमंत्री ने कहा, अगर गड़बड़ी देखकर भी हम चुप बैठ जाते तो हमें लोग गालियां देते। कहते केजरीवाल चुनाव के पहले कुछ बोलता था, अब बदल गया। कोटा खत्म करने का आदेश निकाला, जिसमें स्कूल स्टाफ, टीचर और प्रबंधन के बच्चों को दाखिला दिए जाने की छूट भी दी।
दाखिले को लेकर कोई कंफ्यूजन नहीं है। स्कूल बेवकूफ बना रहे हैं। 22 जनवरी के बाद मानक के नंबर देने हैं। दिल्ली सरकार का आदेश इन्हें मानना होगा, अगर नहीं मानेंगे तो मान्यता खत्म कर देंगे।
स्कूलों की दुकान नहीं चलने देंगे
उपमुख्यमंत्री के मुताबिक स्कूल ट्रस्ट चलाते हैं। प्रॉफिट मेकिंग नहीं होना चाहिए। स्कूलों को दुकान नहीं बनने देंगे। मैनेजमेंट कोटा वो विंडो थी, जहां से एडमिशन डोनेशन, सिफारिश से होते थे।
अदालत ने कभी नहीं कहा कि मैनेजमेंट कोटा ना हटाया जाए। मैनेजमेंट कोटा से रोक नहीं हटाएंगे। बहुत दबाव आ रहा है लेकिन पीछे नहीं हटेंगे। स्कूलों में अब दलाली और सिफारिश नहीं चलेगी।
दाखिला प्रक्रिया पारदर्शी होगी। मान्यता खत्म करने से दिक्कत होती है, अब केंद्र सरकार को अधिनियम में संशोधन करके फाइल भेजी है। तब और राहत मिलेगी।