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क्रूरता की हद लांघने में कोली ने नहीं छोड़ी कोई कसर, नौ केसों में हो चुकी है फांसी की सजा
Sat, 02 Mar 2019 04:49 AM IST
Priyesh Mishra
राहुल कुमार, गाजियाबाद
राहुल कुमार, गाजियाबाद
Published by: Priyesh Mishra
Updated Sat, 02 Mar 2019 04:49 AM IST
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surendra koli
14 साल पहले नोएडा के निठारी बहुचर्चित कांड था। मोनिंदर सिंह पंधेर की कोठी में नौकरी करने वाले सुरेंद्र कोली ने एक 14 साल की किशोरी का अपहरण कर उसे घर में लाया, जिसके बाद उसने हत्या और दुष्कर्म किया। इसके बाद कोली ने इंसानियत को शर्मसार करते हुए उस किशोरी के शरीर का अंग काटकर खा गया था, जिसकी जानकारी सीबीआई ने कोर्ट को अपने दस्तावेजों में दी थी।
निठारी की खूनी कोठी संख्या डी-5 के नौकर सुरेंद्र कोली को सीबीआई के विशेष न्यायाधीश अमित वीर सिंह की अदालत ने दोषी करार दिया है। सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक जेपी शर्मा ने बताया कि कोली ने अदालत को उलझाने की बहुत कोशिश की। उसने कई बार वकील बदलने की बात कहीं, तो कभी हाथ पैर नहीं उठने की बात कहते हुए कहा कि जेल में उसका इलाज नहीं हो रहा है।
अदालत ने जेल अधीक्षक व जेल डॉक्टर को तलब किया, जिन्होंने अदालत को कोली की मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर बताया कि वह बिल्कुल फिट है। कोली ने पुलिस, वकील, जज व अन्य अधिकारियों की कार्यवाही पर भी सवाल उठाए। वहीं, अदालत ने 270 दिन हुई सुनवाई के बाद कोली को 10वें केस में दोषी ठहराया है।
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खूनी कोठी का रहस्य जान दहल उठा था देश
निठारी की खूनी कोठी का रहस्य जानकर देशभर के लोगों में खलबली मच गई थी, जिससे लोगों के अंदर दहशत आ गई थी। यह एक ऐसा कांड था, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा की मांग देश केकोने-कोने से उठी। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच सीबीआई ने शुरू की। 11 जनवरी 2007 को सीबीआई ने पूरा केस अपने हाथ में ले लिया। 28 फरवरी और 01 मार्च 2007 को सुरेंद्र कोली ने दिल्ली में एसीएमएम के यहां अपने इकबालिया बयान दर्ज कराए थे। इन बयानों की वीडियोग्राफी भी हुई थी।
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निठारी की खूनी कोठी संख्या डी-5 के नौकर सुरेंद्र कोली को सीबीआई के विशेष न्यायाधीश अमित वीर सिंह की अदालत ने दोषी करार दिया है। सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक जेपी शर्मा ने बताया कि कोली ने अदालत को उलझाने की बहुत कोशिश की। उसने कई बार वकील बदलने की बात कहीं, तो कभी हाथ पैर नहीं उठने की बात कहते हुए कहा कि जेल में उसका इलाज नहीं हो रहा है।
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अदालत ने जेल अधीक्षक व जेल डॉक्टर को तलब किया, जिन्होंने अदालत को कोली की मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर बताया कि वह बिल्कुल फिट है। कोली ने पुलिस, वकील, जज व अन्य अधिकारियों की कार्यवाही पर भी सवाल उठाए। वहीं, अदालत ने 270 दिन हुई सुनवाई के बाद कोली को 10वें केस में दोषी ठहराया है।
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खूनी कोठी का रहस्य जान दहल उठा था देश
निठारी की खूनी कोठी का रहस्य जानकर देशभर के लोगों में खलबली मच गई थी, जिससे लोगों के अंदर दहशत आ गई थी। यह एक ऐसा कांड था, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा की मांग देश केकोने-कोने से उठी। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच सीबीआई ने शुरू की। 11 जनवरी 2007 को सीबीआई ने पूरा केस अपने हाथ में ले लिया। 28 फरवरी और 01 मार्च 2007 को सुरेंद्र कोली ने दिल्ली में एसीएमएम के यहां अपने इकबालिया बयान दर्ज कराए थे। इन बयानों की वीडियोग्राफी भी हुई थी।
कोली को नौ बार मिल चुकी फांसी की सजा
1. 13 फरवरी 2009 --मृत्युदंड
2. 28 अक्टूबर 2010 --मृत्युदंड
3. 12 मई 2010 --मृत्युदंड
4. 22 दिसंबर 2010 --मृत्युदंड
5. 24 दिसंबर 2012 --मृत्युदंड
6. 08 अक्टूबर 2016. --मृत्युदंड
7. 16 दिसंबर 2016 --मृत्युदंड
8. 24 जुलाई 2017 --मृत्युदंड
9. 08 दिसंबर 2017 -- मृत्युदंड
कोर्ट के बाहर पसरा रहा सन्नाटा
हर बार इस फैसले से पहले ही कोर्ट परिसर के बाहर लोगों व मीडिया का जमावड़ा लगा रहता था। इस बार कोर्ट के बाहर सन्नाटा पसरा रहा। वहीं, वहां से निकलने वाले लोगों का कहना है कि कोली और पंधेर को फांसी ही होनी चाहिए।
2. 28 अक्टूबर 2010 --मृत्युदंड
3. 12 मई 2010 --मृत्युदंड
4. 22 दिसंबर 2010 --मृत्युदंड
5. 24 दिसंबर 2012 --मृत्युदंड
6. 08 अक्टूबर 2016. --मृत्युदंड
7. 16 दिसंबर 2016 --मृत्युदंड
8. 24 जुलाई 2017 --मृत्युदंड
9. 08 दिसंबर 2017 -- मृत्युदंड
कोर्ट के बाहर पसरा रहा सन्नाटा
हर बार इस फैसले से पहले ही कोर्ट परिसर के बाहर लोगों व मीडिया का जमावड़ा लगा रहता था। इस बार कोर्ट के बाहर सन्नाटा पसरा रहा। वहीं, वहां से निकलने वाले लोगों का कहना है कि कोली और पंधेर को फांसी ही होनी चाहिए।
लोग बोले, इन्हें तो फांसी ही होनी चाहिए
कोली को दोषी ठहराए जाने के बाद लोगों ने कहा कि इन्हें तो हर बार फांसी की सजा ही मिलने चाहिए तभी बच्चों व युवतियों को न्याय मिलेगा। राजनगर निवासी कपिल गोयल का कहना है कि आखिर अदालत ने अपना फैसला सुनाकर बच्चों को न्याय दिया है। वहीं, नेहरूनगर की रहने वाले सुनीता ने बताया कि अदालत ने दोनों को फांसी सजा दे।
''अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुनाया है। अब शनिवार को सजा पर बहस होगी। इसके लिए तैयारियां की जा रही है। हम मजबूती से सीबीआई का पक्ष रखेंगे।'' -- जेपी शर्मा, विशेष लोक अभियोजक सीबीआई
''अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुनाया है। अब शनिवार को सजा पर बहस होगी। इसके लिए तैयारियां की जा रही है। हम मजबूती से सीबीआई का पक्ष रखेंगे।'' -- जेपी शर्मा, विशेष लोक अभियोजक सीबीआई