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Delhi NCR News: नोएडा और गुरुग्राम के लिए उपयोगी ठगी का पैसा म्यूल खाते में खपाने के लिए खोलीं 20 फर्जी कंपनियां, दो गिरफ्तार
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- नई दिल्ली जिले की साइबर थाना पुलिस ने दो को किया गिरफ्तार
- आरेापियों ने एक व्यक्ति के नाम से बना दी थीं 20 फर्जी कंपनियां
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। नई दिल्ली जिले की साइबर थाना पुलिस ने साइबर जालसाजों को म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले दो आरोपियों अमायरा होम, सेक्टर 10 ग्रेटर नोएडा, यूपी निवासी सुशील चावला (58) पुत्र शिव लाल चावला और शोभा सिटी, सेक्टर-108, द्वारका एक्सप्रेसवे, गुरुग्राम निवासी राजेश कुमार (39) पुत्र जयराम को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने साइबर फ्रॉड के जरिये ठगे पैसे को निकालने के लिए 20 अलग-अलग कंपनियां खोली थीं। और एक व्यक्ति को कंपनियों का डायरेक्टर बना दिया था। आरोपियों ने उससे उसके नाम बैंक खाते खुलवा लिया था। बैंक खाते को दोनों आरोपी ऑपरेट करते थे।
नई दिल्ली जिला पुलिस उपायुक्त नई दिल्ली जिले के अधिकार क्षेत्र में कई हॉटस्पॉट चिह्नित किए थे, जो कई धोखाधड़ी वाले लेनदेन का संकेत दे रहे थे। एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायतों की जांच में यह पाया कि नई दिल्ली जिले के इलाके में आईडीएफसी बैंक का 1 बैंक खाता साइबर-फ्रॉड की रकम पाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। शुरुआती जांच से पता चला कि यह खाता एक कंपनी नाम की कंपनी के नाम पर रजिस्टर्ड था, जिसका पता स्टेट्समैन हाउस, 148, बाराखंभा रोड, कनॉट प्लेस, नई दिल्ली है। साइबर थाना प्रभारी हरीश चंदर की टीम को जांच में पता लगा कि ठगी की रकम पाने के तरीके से ऐसा लगा कि इसका इस्तेमाल ठगे पैसे को पाने और भेजने के लिए म्यूल अकाउंट के तौर पर किया जा रहा था। शिकायतों की संख्या से पता चलता है कि यह एक छोटा संगठित साइबर अपराध है। मामला दर्ज कर नई जिले के साइबर थाना प्रभारी हरीश चंदर की टीम ने जांच शुरू की।
जांच में पता लगा कि यह राजेश खन्ना नाम के एक व्यक्ति के नाम पर रजिस्टर्ड था। एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायतों की जांच में यह पाया गया कि इस अकाउंट के खिलाफ कुल 4 शिकायतें दर्ज थीं। जांच के दौरान आरोपी राजेश खन्ना ने बताया कि वह अपने दो जान-पहचान वाले लोगों सुशील चावला और राजेश कुमार शर्मा के कहने पर डायरेक्टर बना और कंपनी का अकाउंट खोला। फंड ट्रांसफर का कंट्रोल राजेश और सुशील दोनों के हाथों में था। उसने यह भी बताया कि उन्होंने ठगी की रकम को निकालने के लिए 20 और कंपनियां खुलवाई थीं। जांच में ये पता लगा कि कंपनियों के डिटेल्स और बैंक अकाउंट की जांच करने पर पता चला कि ये शेल कंपनियां और म्यूल अकाउंट पूरे भारत में किए गए साइबर फ्रॉड की ठगी की रकम को निकालने के लिए खोले गए थे।
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ठगी की आई थीं 176 शिकायतें
आगे की जांच में कुल 176 एनसीआरपी साइबर फ्रॉड शिकायतें, जिनकी कुल रकम लगभग 180 करोड़ रुपये थी, जुड़ी हुई पाई गईं, जिसमें इन शेल कंपनियों के अकाउंट में कथित तौर पर अलग-अलग ठगी और विवादित रकम कई लेयर्स में आ रही थी। तफ्तीश में पता चला कि आरोपी राजेश खन्ना की जांच के दौरान नोएडा में मौत हो गई है। आरोपी सुशील चावला और राजेश कुमार शुरू में केस की जांच में शामिल हुए, लेकिन उन्होंने जांच के दौरान सहयोग नहीं किया। ये दोनों शेल कंपनियों से जुड़े अकाउंट्स के बारे में संदिग्ध चैट कर रहे थे। इसके बाद, उन्हें इस मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। उनके फोन में मिली चैट और उपलब्ध सबूतों के अनुसार यह सामने आया कि आरोपी राजेश खन्ना का इस्तेमाल सुशील चावला और राजेश कुमार के निर्देशों पर एक मोहरे के तौर पर किया जा रहा था। शुरुआती जांच में उन्होंने बताया कि वे पवन रुइया के लिए काम कर रहे थे, जो कथित तौर पर पश्चिम बंगाल में इसी तरह के साइबर फ्रॉड मामलों में शामिल है।
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- आरेापियों ने एक व्यक्ति के नाम से बना दी थीं 20 फर्जी कंपनियां
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। नई दिल्ली जिले की साइबर थाना पुलिस ने साइबर जालसाजों को म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले दो आरोपियों अमायरा होम, सेक्टर 10 ग्रेटर नोएडा, यूपी निवासी सुशील चावला (58) पुत्र शिव लाल चावला और शोभा सिटी, सेक्टर-108, द्वारका एक्सप्रेसवे, गुरुग्राम निवासी राजेश कुमार (39) पुत्र जयराम को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने साइबर फ्रॉड के जरिये ठगे पैसे को निकालने के लिए 20 अलग-अलग कंपनियां खोली थीं। और एक व्यक्ति को कंपनियों का डायरेक्टर बना दिया था। आरोपियों ने उससे उसके नाम बैंक खाते खुलवा लिया था। बैंक खाते को दोनों आरोपी ऑपरेट करते थे।
नई दिल्ली जिला पुलिस उपायुक्त नई दिल्ली जिले के अधिकार क्षेत्र में कई हॉटस्पॉट चिह्नित किए थे, जो कई धोखाधड़ी वाले लेनदेन का संकेत दे रहे थे। एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायतों की जांच में यह पाया कि नई दिल्ली जिले के इलाके में आईडीएफसी बैंक का 1 बैंक खाता साइबर-फ्रॉड की रकम पाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। शुरुआती जांच से पता चला कि यह खाता एक कंपनी नाम की कंपनी के नाम पर रजिस्टर्ड था, जिसका पता स्टेट्समैन हाउस, 148, बाराखंभा रोड, कनॉट प्लेस, नई दिल्ली है। साइबर थाना प्रभारी हरीश चंदर की टीम को जांच में पता लगा कि ठगी की रकम पाने के तरीके से ऐसा लगा कि इसका इस्तेमाल ठगे पैसे को पाने और भेजने के लिए म्यूल अकाउंट के तौर पर किया जा रहा था। शिकायतों की संख्या से पता चलता है कि यह एक छोटा संगठित साइबर अपराध है। मामला दर्ज कर नई जिले के साइबर थाना प्रभारी हरीश चंदर की टीम ने जांच शुरू की।
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जांच में पता लगा कि यह राजेश खन्ना नाम के एक व्यक्ति के नाम पर रजिस्टर्ड था। एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायतों की जांच में यह पाया गया कि इस अकाउंट के खिलाफ कुल 4 शिकायतें दर्ज थीं। जांच के दौरान आरोपी राजेश खन्ना ने बताया कि वह अपने दो जान-पहचान वाले लोगों सुशील चावला और राजेश कुमार शर्मा के कहने पर डायरेक्टर बना और कंपनी का अकाउंट खोला। फंड ट्रांसफर का कंट्रोल राजेश और सुशील दोनों के हाथों में था। उसने यह भी बताया कि उन्होंने ठगी की रकम को निकालने के लिए 20 और कंपनियां खुलवाई थीं। जांच में ये पता लगा कि कंपनियों के डिटेल्स और बैंक अकाउंट की जांच करने पर पता चला कि ये शेल कंपनियां और म्यूल अकाउंट पूरे भारत में किए गए साइबर फ्रॉड की ठगी की रकम को निकालने के लिए खोले गए थे।
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ठगी की आई थीं 176 शिकायतें
आगे की जांच में कुल 176 एनसीआरपी साइबर फ्रॉड शिकायतें, जिनकी कुल रकम लगभग 180 करोड़ रुपये थी, जुड़ी हुई पाई गईं, जिसमें इन शेल कंपनियों के अकाउंट में कथित तौर पर अलग-अलग ठगी और विवादित रकम कई लेयर्स में आ रही थी। तफ्तीश में पता चला कि आरोपी राजेश खन्ना की जांच के दौरान नोएडा में मौत हो गई है। आरोपी सुशील चावला और राजेश कुमार शुरू में केस की जांच में शामिल हुए, लेकिन उन्होंने जांच के दौरान सहयोग नहीं किया। ये दोनों शेल कंपनियों से जुड़े अकाउंट्स के बारे में संदिग्ध चैट कर रहे थे। इसके बाद, उन्हें इस मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। उनके फोन में मिली चैट और उपलब्ध सबूतों के अनुसार यह सामने आया कि आरोपी राजेश खन्ना का इस्तेमाल सुशील चावला और राजेश कुमार के निर्देशों पर एक मोहरे के तौर पर किया जा रहा था। शुरुआती जांच में उन्होंने बताया कि वे पवन रुइया के लिए काम कर रहे थे, जो कथित तौर पर पश्चिम बंगाल में इसी तरह के साइबर फ्रॉड मामलों में शामिल है।