{"_id":"69ee249a14ce162fc10d885a","slug":"20-cities-raise-voice-against-dairys-climate-impact-delhi-ncr-news-c-340-1-del1004-133951-2026-04-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi NCR News: 20 शहरों में डेयरी के जलवायु प्रभाव के खिलाफ उठी आवाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi NCR News: 20 शहरों में डेयरी के जलवायु प्रभाव के खिलाफ उठी आवाज
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। पृथ्वी दिवस के अवसर पर युवाओं ने डेयरी उद्योग के पर्यावरणीय और नैतिक प्रभावों को लेकर एक संगठित अभियान की शुरुआत की। 20 शहरों में चल रहे इस अभियान के तहत युवाओं ने डेयरी सेक्टर और गोमांस उद्योग के आपसी संबंधों को उजागर करते हुए लोगों से इस बारे में गंभीरता से विचार करने की अपील की। राजधानी के हौज खास क्षेत्र में युवा समर्थकों की ओर से एक विशेष इंस्टॉलेशन लगाया गया, जिसमें डेयरी उद्योग के पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव और पशुओं की आपूर्ति शृंखला को दर्शाया गया। अभियान का मुख्य संदेश था कि दूध और गोमांस एक ही पशु से जुड़े हैं, इसलिए उपभोक्ताओं को इसके व्यापक प्रभावों को समझना चाहिए।
आयोजकों ने बताया कि भारत में डेयरी उत्पादन के पर्यावरणीय प्रभाव भी गंभीर हैं। एक लीटर दूध उत्पादन में अत्यधिक जल की खपत होती है, जो पहले से जल संकट झेल रहे राज्यों पर अतिरिक्त दबाव डालती है। साथ ही, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा डेयरी और बूचड़खानों को रेड श्रेणी में रखा जाना इस उद्योग के प्रदूषण स्तर को दर्शाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पशुधन से होने वाला मीथेन उत्सर्जन भी जलवायु परिवर्तन का एक बड़ा कारण बन रहा है। उन्होंने कहा कि यह समय है जब नीति-निर्माता, संस्थाएं और आम नागरिक खाद्य प्रणालियों के पर्यावरणीय और नैतिक पहलुओं पर गंभीरता से विचार करें।
विज्ञापन
विज्ञापन
नई दिल्ली। पृथ्वी दिवस के अवसर पर युवाओं ने डेयरी उद्योग के पर्यावरणीय और नैतिक प्रभावों को लेकर एक संगठित अभियान की शुरुआत की। 20 शहरों में चल रहे इस अभियान के तहत युवाओं ने डेयरी सेक्टर और गोमांस उद्योग के आपसी संबंधों को उजागर करते हुए लोगों से इस बारे में गंभीरता से विचार करने की अपील की। राजधानी के हौज खास क्षेत्र में युवा समर्थकों की ओर से एक विशेष इंस्टॉलेशन लगाया गया, जिसमें डेयरी उद्योग के पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव और पशुओं की आपूर्ति शृंखला को दर्शाया गया। अभियान का मुख्य संदेश था कि दूध और गोमांस एक ही पशु से जुड़े हैं, इसलिए उपभोक्ताओं को इसके व्यापक प्रभावों को समझना चाहिए।
आयोजकों ने बताया कि भारत में डेयरी उत्पादन के पर्यावरणीय प्रभाव भी गंभीर हैं। एक लीटर दूध उत्पादन में अत्यधिक जल की खपत होती है, जो पहले से जल संकट झेल रहे राज्यों पर अतिरिक्त दबाव डालती है। साथ ही, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा डेयरी और बूचड़खानों को रेड श्रेणी में रखा जाना इस उद्योग के प्रदूषण स्तर को दर्शाता है।
विज्ञापन
विशेषज्ञों के अनुसार, पशुधन से होने वाला मीथेन उत्सर्जन भी जलवायु परिवर्तन का एक बड़ा कारण बन रहा है। उन्होंने कहा कि यह समय है जब नीति-निर्माता, संस्थाएं और आम नागरिक खाद्य प्रणालियों के पर्यावरणीय और नैतिक पहलुओं पर गंभीरता से विचार करें।
विज्ञापन