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घर के साथ छिनने वाली है 170 परिवारों की रोजी रोटी!

Thu, 21 Aug 2014 05:58 PM IST
Updated Thu, 21 Aug 2014 05:58 PM IST
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170 families between an unfinished flyover.

फ्लाईओवर दोनों ओर से बनकर तैयार है। बीच की कुछ दूरी का काम सालों से रुका हुआ है। इन दो हिस्सों के बीच लगभग 170 परिवार रहते हैं जिनका अस्तित्व इस फ्लाईओवर के पूरा होते ही खत्म हो जाएगा।

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सालों से पुल बंगश और नवाबगंज इलाके में रहने वालों को कहा जा रहा है कि उन्हें अपने आशियाने खाली करने पड़ेंगे क्योंकि रानी झांसी फ्लाईओवर का निर्माण्ा पूरा किया जाना जरूरी है।
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इस इलाके में रहने वाले आशीष का कहना है कि 2006 में इस पुल की घोषणा के बाद से ही उन्हें लगातार अपने घरों को खाली करने की नोटिस दी जा रही है।

आगे पढ़िए क्यों 170 परिवार और उनकी रोजी रोटी पर है खतरा...

साभार : इंडियन एक्सप्रेस

घर ही नहीं छिन जाएगी रोजी रोटी

170 families between an unfinished flyover.

आशीष का जन्म पुल के बीच में बने घर में हुआ है। उन्होंने अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी क्योंकि उन्हें अपने पिता के व्यवसाय में हाथ बंटाना था। उनका धंधा भी इसी घर की पहली मंजिल में बने गोदाम से चलता है।

इस इलाके में रहने वाले ज्यादातर लोगों के लिए बड़ी मुसीबत है कि फ्लाईओवर के निर्माण्‍ा से केवल उनका घर ही नहीं जा रहा है बल्कि उनकी रोजी रोटी छिन जाने का भी खतरा पैदा हो गया है।

अपने घर में ही मोबाइल की दुकान चलाने वाले राजेश गुप्ता का कहना है कि उनके मां-बाप ने अपने जीवन भर की कमाई से यह घर बनाया है। जबकि उसने अपनी मेहनत से यह दुकान खोली है जिससे उसके घर का खर्च चलता है।

घर ही नहीं पूजा स्‍थल भी हटाए जाएंगे

170 families between an unfinished flyover.

केवल घर ही नहीं फ्लाईओवर के रास्ते में पड़ने वाले प्राचीन हनुमान मंदिर को भी यहां से हटयाया जाना है। हालांकि ‌अधिकारियों ने लोगों को आश्वासन दिया है कि मंदिर को दूसरी जगह फिर से बनाया जाएगा।

घरों के अंतिम छोर पर लगभग छह साल पुरानी एक मस्जिद भी है। ‌स्‍थानीय निवासियों का कहना है कि मस्जिद को गिराने की योजना में प्रशासन ने तब्दीली लाई है। इलाके के लोगों ने शाही इमाम के साथ मिलकर प्रशासन को इस बात के लिए राजी किया है कि उन्हें कुछ और समय दिया जाए।

हालांक‌ि अब और समय मिलने की संभावना बहुत ही कम है। नॉर्थ दिल्ली प्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन के मुताबिक यह इलाका लैंड एक्यूजीशन कलेक्टर को सौंपा जा चुका है। इसक साथ ही मुआवजे के लिए 70 करोड़ की राशि भी उन्हें दी जा चुकी है।

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2011 में ही बना जाना था यह पुल

170 families between an unfinished flyover.

गत तीन अगस्त को इलाके के एसएचओ ने स्‍थानीय लोगों के साथ मीटिंग कर कहा कि जब तक सरकार द्वारा उनके रहने के लिए जमीन का आवंटन नहीं किया जाता उन्हें किसी वैकल्पिक ठिकाने का इंतजाम जल्द ही कर लेना चाहिए।

इस फ्लाईओवर के लिए 1990 में ही अनुमति मिली और इसकी आधार‌शिला 2008 में रखी गई थी। 27 महीने में इस पुल का निर्माण हो जाना था जो अभी तक अटका पड़ा है।

एनडीएमसी के चेयरमैन पीके गुप्ता का कहना है कि प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की जिम्मेदारी लैंड एक्वी‌जेशन डायरेक्टर की है। इस इलाके के मकानों को कब गिराया जाएगा इसकी नियत तारीख के बारे में कोई घोषणा अब तक नहीं की गई है।

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