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Delhi : 15 साल की दुष्कर्म पीड़िता को सात माह का गर्भ समाप्त करने की अनुमति, मदद में देरी पर अदालत नाराज

Sat, 19 Apr 2025 06:24 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 19 Apr 2025 06:24 AM IST
सार

नाबालिग से चचेरे भाई ने दुष्कर्म किया था जिस कारण वह गर्भवती हो गई थी। अदालत ने मदद में मिली देरी पर भी नाराजगी जताई और जांच में देरी करने पर एलएनजेपी अस्पताल प्रभारी से स्पष्टीकरण मांगा है। 

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15-year-old rape victim allowed to terminate 7-month pregnancy
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

हाईकोर्ट ने 15 साल की दुष्कर्म पीड़िता के 27 सप्ताह से अधिक के गर्भ को समाप्त करने की अनुमति दे दी है। नाबालिग से चचेरे भाई ने दुष्कर्म किया था जिस कारण वह गर्भवती हो गई थी। अदालत ने मदद में मिली देरी पर भी नाराजगी जताई और जांच में देरी करने पर एलएनजेपी अस्पताल प्रभारी से स्पष्टीकरण मांगा है। यह दिल दहला देने वाला मामला न केवल एक मासूम बच्ची के दर्द को उजागर करता है, बल्कि व्यवस्था में समय पर मदद की कमी को भी सामने लाता है।

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न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि 15 साल की बच्ची ने पहले अपने चचेरे भाई के हाथों यौन शोषण का दर्द सहा। फिर सात महीने तक डर के कारण चुप रही। अब वह हर दिन उस दर्दनाक घटना को याद कर अस्पताल के बिस्तर पर पड़ी है। कोर्ट ने यह भी बताया कि गर्भपात की प्रक्रिया से गुजरने का शारीरिक दर्द उस मनोवैज्ञानिक पीड़ा की तुलना में कुछ भी नहीं है, जो वह रोज सह रही है।
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कोर्ट ने एलएनजेपी अस्पताल को तुरंत गर्भपात की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा कि बच्ची की देखभाल में कोई कमी न हो और यदि बच्चा जीवित पैदा होता है तो उसकी उचित देखभाल की जाए। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि गर्भपात से संबंधित सभी खर्चे सरकार वहन करेगी।
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मदद में देरी पर अदालत ने जताई नाराजगी
कोर्ट ने सिस्टम की खामियों पर गहरी नाराजगी जताई। एक अन्य मामले का इसमें हवाला दिया गया जिसमें पीड़िता को 9 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती किया गया था, लेकिन मेडिकल बोर्ड ने उसकी जांच में एक सप्ताह की देरी की। कोर्ट ने 2023 में दिए गए अपने निर्देशों का पालन न होने पर एलएनजेपी अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट से एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। इन निर्देशों में कहा गया था कि 24 सप्ताह से अधिक गर्भ वाली दुष्कर्म पीड़िताओं की तुरंत मेडिकल जांच होनी चाहिए, बिना कोर्ट के आदेश की प्रतीक्षा किए।

यह है मामला
माता-पिता की अनुपस्थिति में 1 नवंबर 2024 को चचेरे भाई ने पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया था। उस समय वह अपनी छोटी बहन के साथ घर पर थी। डर और धमकियों के कारण उसने इस घटना को किसी से साझा नहीं किया। सात महीने तक वह खामोशी में यह दर्द सहती रही। जब उसे मासिक धर्म नहीं हुआ तो उसकी मां ने उसकी जांच करवाई। 7 अप्रैल 2025 को अल्ट्रासाउंड से पता चला कि वह 25 सप्ताह और 6 दिन की गर्भवती है।


8 अप्रैल को लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल में उसकी मेडिकल जांच हुई जहां उसने डॉक्टर को अपनी आपबीती सुनाई। पीड़िता और उसकी मां ने गर्भपात की इच्छा जताई, लेकिन मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (एमटीपी) एक्ट के तहत 24 सप्ताह से अधिक के गर्भ को समाप्त करने के लिए कोर्ट की अनुमति आवश्यक थी। इसके लिए परिवार को पहले ट्रायल कोर्ट का रुख किया, लेकिन वहां से कोई राहत नहीं मिली। उसके बाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया।

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