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बकाया-आपत्तियों के पेच में फंसा फ्लैटों पर मालिकाना हक
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
Updated Sat, 23 Jan 2016 04:25 AM IST
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ओखला पक्षी विहार से 10 किलोमीटर के दायरे वाले प्रोजेक्टों के फ्लैट खरीदने वालों की परेशानी बरकरार है। बिल्डर पहले तो एनजीटी से रोक का रोना रो रहे थे और अब वहां से हरी झंडी के बाद बकाया धनराशि और प्रोजेक्ट पर आपत्तियों को बिल्डर खत्म नहीं कर पा रहे हैं, जिससे कंपलीशन सर्टिफिकेट नहीं मिल रहा और खरीदारों के नाम संपत्ति दर्ज नहीं हो पा रही है। इन प्रोजेक्ट में 15 हजार फ्लैट हैं।
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केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से ओखला पक्षी विहार का दायरा तय होने के बाद एनजीटी ने 26 अगस्त को कंपलीशन सर्टिफिकेट जारी करने पर लगी रोक हटा ली थी।
इस दायरे में करीब 45 प्रोजेक्ट अटके थे। रोक के दौरान जब भी खरीदार प्रोजेक्ट निर्माण में देरी या फ्लैट पर पजेशन देने के लिए दबाव डालते तो बिल्डरों की तरफ से एक ही जवाब दिया जाता था कि एनजीटी से रोक लगी है जिससे कंपलीशन सर्टिफिकेट नहीं मिल रहा, लेकिन एनजीटी के आदेश को करीब पांच माह बीत चुके हैं, फिर भी बिल्डर कंपलीशन सर्टिफिकेट नहीं ले पा रहे।
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45 में से अब तक एक दर्जन बिल्डर ही कंपलीशन सर्टिफिकेट ले पाए हैं। दिसंबर में एक भी प्रोजेक्ट को कंपलीशन सर्टिफिकेट नहीं मिला है। कंपलीशन सर्टिफिकेट न मिलने से खरीदार परेशान हैं। बिना इसके रजिस्ट्री नहीं हो सकती। रजिस्ट्री के बिना मालिकाना हक नहीं मिल सकता। तमाम बिल्डरों ने बिना रजिस्ट्री के ही पजेशन दे दिया है। लोग फ्लैटों में रहने भी लगे हैं।
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यह है वजह
प्राधिकरण के अधिकारी इसकी दो वजह बता रहे हैं। पहली, बिल्डर प्राधिकरण का बकाया नहीं जमा कर रहे। ज्यादातर बिल्डरों पर जमीन आवंटन का पैसा बाकी है। दूसरा, बिल्डरों ने तय लेआउट के अनुसार निर्माण नहीं किया है। कंपलीशन सर्टिफिकेट जारी करते समय प्राधिकरण संपत्ति खरीदारों से आपत्ति मांगता है। उस दौरान तमाम लोग आपत्ति लगा देते हैं।
किसी फ्लैट के सुपर और कारपेट एरिया में फर्क पर आपत्ति दर्ज है तो किसी में वादे के मुताबिक सुविधाएं नहीं दी गई हैं। उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट एक्ट में कंपलीशन सर्टिफिकेट तब तक न देने का प्रावधान है, जब तक खरीदारों से एनओसी न मिल जाए।