रसूख वालों के 15 करीबियों का न्यायिक सेवा में चयन
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दिल्ली न्यायिक सेवा परीक्षा के जरिए कुल 80 लोगों का चयन होना था लेकिन केवल 15 का ही चयन हुआ। इन 15 लोगों में अधिकतर न्यायिक अधिकारियों के करीबी हैं।
केंद्रीय कानून मंत्री सदानंद गौड़ा ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। ऐसे में हाईकोर्ट के जिन दो जजों के बच्चे इस परीक्षा में सफल रहे हैं उन्हें उन मामलों से फिलहाल अलग रखा जाना चाहिए जिनमें भारत सरकार पक्षकार है।
रोहिणी कोर्ट बार एसोसिएशन ने कहा है कि दिल्ली हाईकोर्ट के उन दो जजों को फिलहाल भारत सरकार से जुड़े मामलों से अलग रखा जाए, जिनके बच्चे कथित तौर पर दिल्ली न्यायिक सेवा परीक्षा, 2014 में सफल हुए हैं।
रोहिणी कोर्ट बार एसोसिएशन ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर यह आग्रह किया है। पत्र में बार एसोसिएशन ने कहा है कि इस परीक्षा के जरिए कुल 80 लोगों का चयन होना था, लेकिन केवल 15 का ही चयन किया गया है। आरोप है कि इन 15 लोगों में अधिकतर न्यायिक अधिकारियों के करीबी हैं।
कानून मंत्री ने दिए जांच के आदेश
चूंकि केंद्रीय कानून कानून मंत्री सदानंद गौड़ा ने इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं इसलिए हाईकोर्ट के उन दो जजों, जिनके बच्चे इस परीक्षा में सफल रहे हैं, को उन मामलों से फिलहाल अलग रखा जाए जिनमें भारत सरकार पक्षकार है।
एसोसिएशन ने तो यह भी कहा कि अगर संभव हो तो इन दोनों जजों को फिलहाल दिल्ली के बाहर ट्रांसफर कर दिया जाए, जिससे कि मामले की निष्पक्ष तरीके से जांच हो सके। एसोसिएशन का मानना है कि न्यायपालिका पर लोगों का भरोसा कायम रहे, इसलिए ऐसा करना जरूरी है।
यह एक तरह का घोटाला है। परीक्षा दिल्ली हाईकोर्ट के द्वारा आयोजित की जाती है। प्रश्न पत्र जजों के द्वारा तैयार होते हैं। उत्तर पुस्तिका भी जज जांचते हैं और साक्षात्कार भी जज ही लेते हैं। नियुक्तियां भी दिल्ली हाईकोर्ट के जज ही करते हैं।-इंदर सिंह सरोहा, अध्यक्ष रोहिणी कोर्ट बार एसोसिएशन