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12 घंटे बाद क्लीयर हुआ टूंडला-गाजियाबाद रूट
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Mon, 28 Dec 2015 12:37 AM IST
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कोटगांव फाटक के पास डिरेल हुई मालगाड़ी के दो कोच को हटाने के बाद शनिवार को रात भर ट्रैक की मरम्मत का काम किया गया। रेलवे इंजीनियरों की टीम ने क्षतिग्रस्त हुए ट्रैक और स्लीपर को बदलवाया।
रात भर की मशक्कत के बाद करीब 12 घंटे बाद रविवार सुबह पांच बजे टूंडला-गाजियाबाद रूट क्लीयर कराया। हालांकि इसके बाद भी इस ट्रैक पर ट्रेनों को कॉशन लेकर कम स्पीड़ पर चलाया गया।
शनिवार शाम 5:40 बजे हुए हादसे के पौने तीन घंटे बाद ही रेलवे ने क्षतिग्रस्त मालगाड़ी के कोच को हटाकर मुरादाबाद-गाजियाबाद (अप) और गाजियाबाद-टूंडला (डाउन) रूट क्लीयर कर ट्रेनों का संचालन शुरू कर दिया था।
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हादसे में टूंडला से गाजियाबाद की ओर जाने वाला ट्रैक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। हालांकि रात साढ़े आठ बजे टूंडला से गाजियाबाद स्टेशन की ओर आने वाली ट्रेनों के लिए वैकल्पिक रूट को खाली करा दिया गया था और ट्रेनों को एक-एक कर प्लेटफार्म पर लाया जाना शुरू कर दिया गया था।
रातों रात रेलवे के इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट ने क्षतिग्रस्त ट्रैक और हादसे में टूट गए स्लीपर को निकालकर नए स्लीपर और ट्रैक लगाया।
सभी विभागों के अफसरों ने तैयार की ज्वाइंट रिपोर्ट
कोटगांव फाटक पर शनिवार को हुए हादसे के बाद रेलवे के स्थानीय अधिकारियों ने ज्वाइंट रिपोर्ट तैयार कर ली है। रेलवे सूत्रों के मुताबिक गोपनीय रिपोर्ट डीआरएम को भेज दी गई है।
इसमें हादसे के संभावित कारणों का भी जिक्र किया गया है। सूत्रों की मानें तो अचानक हुए ट्रैक फ्रैक्चर की वजह से मालगाड़ी के दो कोच डिरेल हुए। हादसे की गाज इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के अफसरों पर गिर सकती है।
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रात भर की मशक्कत के बाद करीब 12 घंटे बाद रविवार सुबह पांच बजे टूंडला-गाजियाबाद रूट क्लीयर कराया। हालांकि इसके बाद भी इस ट्रैक पर ट्रेनों को कॉशन लेकर कम स्पीड़ पर चलाया गया।
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शनिवार शाम 5:40 बजे हुए हादसे के पौने तीन घंटे बाद ही रेलवे ने क्षतिग्रस्त मालगाड़ी के कोच को हटाकर मुरादाबाद-गाजियाबाद (अप) और गाजियाबाद-टूंडला (डाउन) रूट क्लीयर कर ट्रेनों का संचालन शुरू कर दिया था।
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हादसे में टूंडला से गाजियाबाद की ओर जाने वाला ट्रैक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। हालांकि रात साढ़े आठ बजे टूंडला से गाजियाबाद स्टेशन की ओर आने वाली ट्रेनों के लिए वैकल्पिक रूट को खाली करा दिया गया था और ट्रेनों को एक-एक कर प्लेटफार्म पर लाया जाना शुरू कर दिया गया था।
रातों रात रेलवे के इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट ने क्षतिग्रस्त ट्रैक और हादसे में टूट गए स्लीपर को निकालकर नए स्लीपर और ट्रैक लगाया।
सभी विभागों के अफसरों ने तैयार की ज्वाइंट रिपोर्ट
कोटगांव फाटक पर शनिवार को हुए हादसे के बाद रेलवे के स्थानीय अधिकारियों ने ज्वाइंट रिपोर्ट तैयार कर ली है। रेलवे सूत्रों के मुताबिक गोपनीय रिपोर्ट डीआरएम को भेज दी गई है।
इसमें हादसे के संभावित कारणों का भी जिक्र किया गया है। सूत्रों की मानें तो अचानक हुए ट्रैक फ्रैक्चर की वजह से मालगाड़ी के दो कोच डिरेल हुए। हादसे की गाज इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के अफसरों पर गिर सकती है।