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पहलू खान के गांव में गाय पालने वाले 10 मुसलमान गवां चुके हैं अपनी जान, अब छोड़ने वाले हैं ये पेशा

Wed, 12 Apr 2017 05:06 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम Updated Wed, 12 Apr 2017 05:06 PM IST
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10 muslims lost their lives in mewat agter cow
pahlu khan

राजस्थान के बहरोड़ में मेवात के गांव जयसिंहपुर निवासी पहलू की हत्या के बाद मेवात का मुस्लिम समाज अपने आप को असुरक्षित महसूस करने लगा है। मुस्लिम गोपालक को गोहत्यारा समझा जा रहा है।

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गाय का कारोबार अब तक मेवात के करीब दस मुस्लिम लोगों की जान ले चुका है। मुस्लिम गाय पालना छोड़ सकता है इसका फैसला जल्द ही पलवल जिले के हथीन में होने वाली महापंचायत में हो सकता है।
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इस महापंचायत में हिंदू और मुस्लिम गोत्र-पाल के प्रमुख लोगों को न्योता दिया जाएगा। महापंचायत बुलाने की बात हथीन से पूर्व विधायक मास्टर अजमत खां ने कही है।
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ये भी पढ़ें: गाय तस्कर समझ जिसकी भीड़ ने की हत्या वो रोजा रखने के लिए ला रहा था दुधारू गाय 

300 परिवार अभी भी करते हैं गाय पालन

10 muslims lost their lives in mewat agter cow

विधायक ने अपना दर्द सोमवार को गांव जयसिंहपुर में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर की उपस्थिति में सैकड़ों लोगों के सामने व्यक्त किया। मेवात के 75 फीसदी मुस्लिम घरों में गाय पाई जाती है।

मेवात में करीब 300 परिवार ऐसे हैं जिनके पास 20 से 200 तक गायें आज भी मौजूद हैं। दो साल पहले मेवात के एक दर्जन से अधिक मुस्लिम गोपालकों को फिरोजपुर झिरका में सम्मानित भी कर चुके हैं।

मेवात में गाय एक आस्था का केंद्र हैं। इन सब के बावजूद भी मेवात के लोगों पर गोहत्या का कलंक लगा हुआ है। मेवात के गांव हवननगर स्थित जीवरक्षा गोशाला को एक शिक्षित मुस्लिम युवक पिछले दो साल से चला रहा है।

300 परिवार अभी भी करते हैं गाय पालन

10 muslims lost their lives in mewat agter cow

विधायक ने अपना दर्द सोमवार को गांव जयसिंहपुर में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर की उपस्थिति में सैकड़ों लोगों के सामने व्यक्त किया। मेवात के 75 फीसदी मुस्लिम घरों में गाय पाई जाती है।

मेवात में करीब 300 परिवार ऐसे हैं जिनके पास 20 से 200 तक गायें आज भी मौजूद हैं। दो साल पहले मेवात के एक दर्जन से अधिक मुस्लिम गोपालकों को फिरोजपुर झिरका में सम्मानित भी कर चुके हैं।

मेवात में गाय एक आस्था का केंद्र हैं। इन सब के बावजूद भी मेवात के लोगों पर गोहत्या का कलंक लगा हुआ है। मेवात के गांव हवननगर स्थित जीवरक्षा गोशाला को एक शिक्षित मुस्लिम युवक पिछले दो साल से चला रहा है।

क्या कहते हैं पूर्व विधायक

10 muslims lost their lives in mewat agter cow

गोशाला संचालक आबिद हुसैन सिविल इंजीनियर है। उसने मुस्लिमों के सिर से गोहत्या का कलंक मिटाने कि नीयत से दो साल पहले गोशाला शुरू की थी।

उन्हों बताया कि गोशाला में ऊंट रखने का एक लाख रुपये का खर्चा आया था डीसी ने आज तक वो पैसा नहीं दिया इसके अलावा एक साल पहले आंधी में गोशाला कि टिन टूट गई थी जिसमें काफी नुकसान हो गया उसके लिए प्रशासन ने एक पैसा भी नहीं दिया। 

हथीन से पूर्व विधायक अजमत खां ने बताया कि बताया कि आरएसएस और बीजेपी के लोगों ने मेवात के मुसलमानों को गोहत्यारा साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

गाय को जंगल में ले जाने से डरने लगे हैं लोग

10 muslims lost their lives in mewat agter cow

अगर आज कोई आदमी अपनी गाय को जंगल में चराने के लिये ले जाता है तो उसे भी यही समझा जाता है कि इसकी हत्या करने के लिये ले जा रहा है। उन्होंने बताया कि गांव उटावड में तीन, जयसिंहपुर में पहलू और तावड़ू  के दो लड़कों सहित अब तक करीब 10 मुस्लिम गोहत्या के नाम पर मारे जा चुके हैं।

अब तो मेवात के मुसलमानों को गाय पालने से भी डर लग रहा है। उन्होंने कहा कि अब मेवात का मुस्लिम गोपालन का काम छोड़ सकता है। इसके लिए वह जल्द ही हथीन में एक हिंदू-मुस्लिम धर्म के प्रमुख लोगों की  महापंचायत करने जा रहे हैं। पंचायत में हिंदू धर्म के प्रमुख लोगों के सामने अपना दर्द बया करेंगे।

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