{"_id":"58bacc7c4f1c1b2e4d830b5f","slug":"world-bank-will-give-money-for-earthquake-resistant-hospital","type":"story","status":"publish","title_hn":"वर्ल्ड बैंक के पैसे से भूकंपरोधी बनेंगे 100 अस्पताल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वर्ल्ड बैंक के पैसे से भूकंपरोधी बनेंगे 100 अस्पताल
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 04 Mar 2017 07:47 PM IST
विज्ञापन
HOSPITAL
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील उत्तराखंड में अधिकांश सरकारी इमारतें सरकार की चिंता का कारण बनी हैं। इनमें से कई पुराने भवन भूकंप के बड़े झटकों को झेलने की स्थिति में नहीं है।
विज्ञापन
ये तथ्य आपदा प्रबंधन विभाग के हाल ही में कराये एक सर्वे में सामने आया है। प्रारंभिक सर्वे के आधार पर अब विभाग ने सरकारी भवनों को भूकंप के खतरे से बचाने के लिए योजना तैयार की है।
विज्ञापन
योजना के तहत विभाग सरकारी इमारतों को विस्तृत सर्वे के जरिये यह संभावना टटोलेगा कि कितने भवनों को सुरक्षित बनाया जा सकता है और कितने भवनों का पुनर्निर्माण करने की आवश्यकता होगी। इसकी एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिसके लिये वर्ल्ड बैंक फंड देने को तैयार हो गया है।
विज्ञापन
कुछ दिन पूर्व विभाग और वर्ल्ड बैंक के उच्चाधिकारियों के बीच हुई प्रथम दौर की बैठक में फंडिंग को लेकर सैद्धांतिक सहमति हो चुकी है। ये राशि 700 से एक हजार करोड़ रुपये तक हो सकती है। इसकी पुष्टि करते हुए अपर सचिव (आपदा प्रबंधन) सी. रविशंकर ने कहा कि शासन को वर्ल्ड बैंक से पत्र आने का इंतजार है। तब तक फंड के बारे में सही जानकारी देना संभव नहीं।
खतरे में हैं सरकारी भवन
उत्तराखंड के जोन चार व पांच में होने की वजह से यहां सरकारी व निजी भवनों को बड़ा खतरा है। इस खतरे से निपटने का एक ही उपाय है कि भवनों को भूकंपरोधी बनाया जाए। सरकारी भवनों को सुरक्षित बनाने की दिशा में प्रयास शुरू हो गए हैं। आपदा प्रबंधन विभाग ने इस अभियान को चरणबद्ध ढंग से पूरा करने की ठानी है।
पहले चरण में सरकारी भवनों का त्वरित आरंभिक सर्वेक्षण हो रहा है। दूसरे चरण में विस्तृत सर्वेक्षण होगा और तीसरे चरण में सर्वेक्षण के जरिए पता लगाया जाएगा की कितने भवन हैं जिन्हें रेट्रोफिटिंग से सुरक्षित बनाया जा सकता है। जो इस काबिल नहीं होंगे उन्हें ध्वस्त करके दोबारा से बनाने की भी योजना है।
100 अस्पतालों से होगी शुरुआत
आरंभिक सर्वेक्षण में विभाग 5500 भवनों का सर्वे कर चुका है, जिन्हें सुरक्षित बनाए जाने की आवश्यकता है। विभाग शुरुआत 100 अस्पतालों से करने जा रहा है। अपर सचिव (आपदा प्रबंधन) सी. रविशंकर के मुताबिक, अस्पताल भवनों का भूकंपरोधी होना सबसे आवश्यक है क्योंकि आपदा की स्थिति में ये सबसे अनिवार्य सेवा है। विभाग की दूसरी प्राथमिकता में स्कूल भवन हैं। तीसरे चरण में अन्य सरकारी भवनों को शामिल किया गया है।
तैयार होगी डीपीआर, टेंडर होंगे
100 अस्पताल भवनों को भूकंप रोधी बनाने के लिए वर्ल्ड बैंक से फंडिंग का इंतजाम हो चुका है। इस राशि से डीपीआर तैयार होंगी और इसके बाद भवनों के सुधारीकरण काम शुरू होगा। फंड की स्वीकृति होते ही दो महीने में टेंडर बुलाकर विस्तृत सर्वे का काम शुरू हो जाएगा।