Women Reservation: नई भर्तियां लटकीं, पुरानी भर्तियों के रिजल्ट भी अटके, इन कॉलेजों में दाखिलों का बढ़ा इंतजार
राज्य लोक सेवा आयोग ने नई भर्तियों का कैलेंडर तो जारी कर दिया है लेकिन आरक्षण पर रुख साफ नहीं है। ऐसे में चुनौती यह है कि अक्तूबर में जब भर्तियों के विज्ञापन जारी होंगे तो आयोग उनमें आरक्षण रोस्टर कैसे चुनेेगा। हाईकोर्ट ने आरक्षण संबंधी शासनादेश पर रोक लगाई हुई है, इस वजह से सभी दाखिले भी अटक गए हैं।
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उत्तराखंड में महिलाओं को सरकारी नौकरियों व सरकारी कोटे के दाखिलों में 30 फीसदी क्षैतिज आरक्षण पर हाईकोर्ट की रोक से भर्तियों के साथ ही दाखिले भी लटक गए हैं। सरकार ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर करने की तैयारी तो की है, लेकिन इसका इंतजार लंबा हो रहा है। सरकार अभी इसी विचार में उलझी है कि वह पहले याचिका दायर करे या अध्यादेश लाए। आइए जानते हैं, कैसे पड़ रहा है हाईकोर्ट के आदेश का असर।
नई भर्तियों में रुकावट
राज्य लोक सेवा आयोग ने नई भर्तियों का कैलेंडर तो जारी कर दिया है लेकिन आरक्षण पर रुख साफ नहीं है। ऐसे में चुनौती यह है कि अक्तूबर में जब भर्तियों के विज्ञापन जारी होंगे तो आयोग उनमें आरक्षण रोस्टर कैसे चुनेेगा। इसी प्रकार, आयोग की कई ऐसी भर्तियां हैं, जिनके रिजल्ट जारी होने हैं। आरक्षण की वजह से यह भी अटके हुए हैं। इसी प्रकार, उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड की असिस्टेंट प्रोफेसर और मेडिकल कॉलेजों में अन्य स्टॉफ, आयुष विभाग में होने वाली भर्तियां लटकी हुई हैं।
दाखिले भी अटके
प्रदेश में होने वाले एमबीबीएस, एमडी-एमएस, नर्सिंग, पैरामेडिकल के दाखिलों में भी उत्तराखंड की महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है। चूंकि हाईकोर्ट ने आरक्षण संबंधी शासनादेश पर रोक लगाई हुई है, इस वजह से सभी दाखिले भी अटक गए हैं। एचएनबी मेडिकल विवि ने शासन से इस मामले पर निर्देश मांगे हैं।
ऐसे समझें दाखिलों में 30 फीसदी महिला आरक्षण का लाभ
प्रदेश में चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की कुल 441 सीटें हैं। इनमें जनरल, ओबीसी, एससी, एसटी में 30-30 प्रतिशत सीटें यानी कुल मिलाकर 126 सीटें उत्तराखंड महिला के लिए आरक्षित हैं। इसी प्रकार तीन प्राइवेट कॉलेजों में राज्य कोटे की एमबीबीएस की 225 सीटें हैं, जिनमें से 30 प्रतिशत के हिसाब से कुल 66 सीटें उत्तराखंड महिला के लिए आरक्षित हैं। इसी प्रकार, अन्य पाठ्यक्रमों में भी 30 फीसदी का प्रावधान रहा है।
नौकरियों में ऐसे मिल रहा था लाभ
सरकारी नौकरियों में उत्तराखंड की महिलाओं को 30 फीसदी आरक्षण का लाभ अलग से मिलता है। मसलन, अगर किसी भर्ती में कुल 100 पद हैं तो सीधे तौर पर इनमें से 30 पद उत्तराखंड की महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगे। इन 100 में जनरल, ओबीसी, एससी, एसटी के पदों में अलग-अलग 30-30 प्रतिशत पद उत्तराखंड की महिलाओं के लिए आरक्षित होते आए हैं।
2001 में था 20 प्रतिशत, 2006 में कर दिया 30 प्रतिशत
18 जुलाई 2001 को सरकार ने एक शासनादेश जारी करते हुए महिलाओं को 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया। इसके बाद 24 जुलाई 2006 को इस शासनादेश को संशोधित करते हुए आरक्षण बढ़ाकर 30 प्रतिशत कर दिया गया। इसके साथ ही यह शर्त भी जोड़ दी गई कि आरक्षण का लाभ केवल उत्तराखंड की महिलाओं को मिलेगा। इस पर 24 अगस्त को हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी।
यूपी में बदल चुका है नियम
यूपी में पहले केवल प्रदेश की महिलाओं को आरक्षण का प्रावधान किया गया था लेकिन न्यायालय के आदेश के बाद राज्य ने यह क्षैतिज आरक्षण सभी महिलाओं के लिए कर दिया। हालांकि उत्तराखंड सरकार ने अभी इस दिशा में कदम नहीं उठाया।
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उत्तराखंड महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण पर रोक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एलएलपी दायर करने का निर्णय सरकार ने किया है। इस निर्णय के हिसाब से ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. ललित मोहन रयाल, अपर सचिव, कार्मिक, उत्तराखंड