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वनों के बाहर वन्य जीव वास स्थलों की होगी गिनती

Fri, 13 Jan 2017 12:45 PM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 13 Jan 2017 12:45 PM IST
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wildlife habitat sites will count out side of forest
- फोटो : demo pic

मध्य हिमालयी क्षेत्र में वन्य जीवों ने भी इंसानों की तरह रहने के लिए अपने नए वास स्थल आबाद कर लिए हैं। वन आरक्षित क्षेत्रों में तो उनके पुश्तैनी कॉरीडोर हैं ही, लेकिन इन वनों के बाहर भी वन्य जीवों के नए वास स्थल बन गए हैं, वन विभाग ने इन्हें अभी चिन्हित नहीं किया, लेकिन यहां आबादी अच्छी-खासी है।

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ऐसे वक्त में जब वन्य जीव तस्करों की गिरफ्त मजबूत हो रही है तो इन नए वास स्थलों का पता लगाया जा रहा है। महानिदेशक वन एवं पर्यावरण डॉ. एसएस नेगी ने भारतीय वन्य जीव संस्थान से इन्हें सूचीबद्ध करने के लिए कहा है। आकलन किया जा रहा है कि पूरे मध्य हिमालयी क्षेत्र में ऐसे नए वास स्थलों की संख्या एक हजार के लगभग है। ये वास स्थल वन्य जीवों ने खुद ही तय किए हैं।
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दो वन आरक्षित क्षेत्रों के बफर जोनों और कुछ वास स्थल आबादी के नजदीक वाले इलाकों में हैं। जंगलों के अंदर बिछ रहे सड़कों के जाल और मानव दखलंदाजी से परेशान वन्य जीव बस्तियों की तरफ खिसक रहे हैं। यही वजह है कि बीते पांच सालों में मानव-वन्य जीव संघर्ष केंद्रीय वन्य जीव एक्शन प्लान के एजेंडे में सबसे अहम बिंदु बनकर शामिल हुआ है।
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गैर चिन्हित वासस्थलों में बाघ, गुलदार, भालू, हाथी आदि बड़े वन्य जीव भी हैं। इनकी निशानदेही होती भी है। बीते साल उत्तराखंड के पूरबी तराई क्षेत्र में 23 बाघ मिले थे। वन विभाग के रिकार्ड में ये दर्ज नहीं हैं। इसी तरह अस्कोट क्षेत्र के हिम तेंदुआ के वासस्थलों में बाघ मिल गए। एक तरफ वन्य जीव एक दूसरे के इलाके में कब्जा कर रहे हैं और दूसरी तरफ नए वास स्थल बना रहे हैं।


वन्य जीवों के क्षेत्र में काम कर रही अंतरराष्ट्रीय संस्था डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने बाघों के नेपाल सीमापार भी नए वासस्थलों को चिन्हित किया है। डब्ल्युडब्ल्युएफ के टीम लीडर एके सिंह का कहना है कि वन्य जीवों ने नए वासस्थल बनाए हैं। इससे मानव-वन्य जीव संघर्ष की स्थिति पैदा हो रही है।

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