उत्तराखंड में जंगल की आग : वन अधिकारियों की छुट्टी पर रोक, दस नोडल अधिकारी बनाए
- वनाग्नि के बढ़ते मामलों को देख प्रमुख वन संरक्षक राजीव भरतरी ने जारी किया आदेश, 24 घंटे का अलर्ट, हर सप्ताह देनी होगी रिपोर्ट, करना होगा निरीक्षण
विस्तार
एक सप्ताह में वनाग्नि के बढ़ते मामलों को देखते हुए प्रमुख वन संरक्षक और हॉफ राजीव भरतरी ने वन अधिकारियों की छुट्टी पर रोक लगा दी है। इन्हें हर सप्ताह वन मुख्यालय को वनाग्नि के मामलों की रिपोर्ट देनी होगी और क्षेत्र का निरीक्षण करना होगा।
उत्तराखंड : एक जंगल बुझ रहा तो दूसरे में लग रही आग, अब विकराल हो गई वनाग्नि, तस्वीरें
प्रमुख वन संरक्षक की ओर से जारी आदेश के तहत जिला प्रभागीय वन अधिकारियों, वन संरक्षक और फील्ड कर्मियों को 24 घंटे सतर्क रहने को कहा गया है।
अधिकारियों से कहा गया है कि वे अपने क्षेत्र में ही बने रहेंगे और अगर उन्हें क्षेत्र से बाहर जाना ही हुआ तो उन्हें इसके लिए वन मुख्यालय से अनुमति लेनी होगी। इसी तरह से अधिकारियों से कहा गया है कि एक तिहाई कार्यदिवस में निरीक्षण जरूर करें। प्रभागीय वन अधिकारियों और सहायक वन संरक्षकों को विशेष परिस्थितियों में ही छुट्टी दी जाएगी।
पिथौरागढ़ जिलाधिकारी की तारीफ
पिथौरागढ़ जिलाधिकारी की ओर से प्रभागीय वन अधिकारी को पत्र लिखकर नुकसान की तुरंत सूचना देने और क्षतिपूर्ति का भुगतान करने के लिए कहा गया है। प्रमुख वन संरक्षक राजीव भरतरी ने अन्य जिलाधिकारियों से भी संपर्क करने को कहा है।
हर शुक्रवार को होगी समीक्षा
वनाग्नि के बढ़ते मामलों को देखकर प्रमुख वन संरक्षक राजीव भरतरी ने पहली समीक्षा नौ अप्रैल को बुलाई है। हर शुक्रवार को अब समीक्षा होगी और इसमें प्रभावित क्षेत्रों के प्रभागीय वन अधिकारियों को भी शामिल किया जाएगा।
दस नोडल अधिकारी भी बनाए
वनाग्नि पर नियंत्रण के लिए वन मुख्यालय की ओर से दस नोडल अधिकारी भी बनाए गए हैं। नोडल अधिकारियों को तीन से पांच दिन के अंदर जिले का भ्रमण करने को कहा गया है।
1. प्रमुख वन संरक्षक विजय कुमार
2. प्रमुख वन संरक्षक समीर सिन्हा
3. प्रमुख वन संरक्षक कपिल जोशी
4. प्रमुख वन संरक्षक सरगम सिंह
5. प्रमुख वन संरक्षक रंजन मिश्रा
6. प्रमुख वन संरक्षक बीके गांगटे
7. मुख्य वन संरक्षक आईपी सिंह
8. मुख्य वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी
9. मुख्य वन संरक्षक नरेश कुमार
10. मुख्य वन संरक्षक रमेश कुमार
वनाग्नि के संबंध में मैंने वन विभाग के अधिकारियों से जानकारी ली है। सभी को पूरी क्षमता के साथ जुटने के निर्देश दिए हैं। आग बुझाने के लिए दो हेलीकॉप्टर की व्यवस्था की जा रही है।
- तीरथ सिंह रावत, मुख्यमंत्री
आग की लपटों में धधक रहे जंगल
गौहरीरेंज अधिकारी धीर सिंह ने बताया कि शनिवार को भी आग बुझाने के लिए 26 वनकर्मियों को भेजा गया है। वनकर्मी आग को बुझाने में जुटे हुए हैं। जल्द ही आग पर काबू पाया जाएगा। वहीं यमकेश्वर ब्लॉक अंतर्गत कुकरेतीधार, फल्दाकोट, दुबडा, तौलसारी आदि गांवों के समीप जंगलों में भी आग लगी हुई है।
स्थानीय निवासी नंदकिशोर कंडवाल ने बताया कि कुछ दिन पूर्व उमड़ा, कंडवाल गांव, सिन्दुडीं, फल्दाकोट, बिनक, पोखरखाल आदि जगहों में आग लगने से जंगल के साथ ही खेत पर घास, पेड़ों के जलने से बहुत नुकसान हुआ है, जो कि अभी भी लगातार जारी है। गांव के समीप आग बुझाने के लिए ग्रामीण ही प्रयासरत हैं।
राजाजी टाइगर रिजर्व के जंगल में लगी आग
हरिद्वार में तेज हवाएं चलने से जंगलों में आग लगने का सिलसिला शुरू हो चुका है। राजाजी टाइगर रिजर्व के जंगल में भी आग लग गई। हालांकि कर्मचारियों ने आधा घंटे में ही आग पर काबू पा लिया।
शनिवार को तीन बजे राजाजी टाइगर रिजर्व की हरिद्वार रेंज की मनसा देेवी पर जाने वाले सीढ़ी मार्ग के निकट जंगल में आग लग गई। जंगल से धुआं निकलते देख पेट्रोलिंग कर रही टीम ने आग को बुझाना शुरू कर दिया। रेंजर विजय कुमार सैनी ने बताया कि जहां आग लगी है, उसके पास आबादी क्षेत्र है। मनसा देवी मंदिर में भी यात्री आते रहते हैं। आग को फैलने से पहले ही बुझा दिया गया है। संवाद
मसूरी में कैंपटी के भेड़ियाना गांव के पास जंगल में लगी आग खेतों तक पहुंच गई। इससे गेहूं की कई बीघा फसल जल गई। साथ ही तीन गोशाला भी जलकर राख हो गईं। घटना के वक्त गोशालाएं खालीं थी। कैंपटी पुलिस, वन विभाग, फायर ब्रिगेड कर्मचारी और ग्रामीण देर रात तक आग बुझाने में जुटे थे।
भेड़ियाना गांव के पास जंगल में लगी आग तेज हवा के कारण खेतों तक पहुंच गई। इसे बुझाने के लिए गांव के युवा, महिलाएं सहित ग्रामीण मौके पर पहुंचे और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। सूचना पर कैंपटी पुलिस, फायर ब्रिगेड और वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची और आग बुझाने में जुट गई।
कड़ी मश्क्कत के बाद खेतों और गोशालाओं में लगी आग तो बुझा ली, लेकिन जंगल में देर रात आग बुझाने के पयास जारी थे। आग से आम के बगीचे को भी भारी नुकसान हुआ है। कैंपटी थानाध्यक्ष नवीन जुराल ने बताया कि भेड़ियाना गांव डिम्टा बैंड और गश्ती बैंड क्षेत्र में लगी आग अचानक गांव और खेतों की तरफ बढ़ गई। इससे मिलक पुत्र केशर सिंह, दिनेश सिंह पुत्र बलबीर सिंह और महावीर सिंह पुत्र केशर सिंह की गोशालाएं जलकर राख हो गईं।
साथ ही गेहूं की फसल भी जल गई। दीपक रावत ने बताया कि आधा दर्जन से अधिक खेतों में खड़ी गेहूं की फसल जलकर राख हो गई। तहसीलदार नैनबाग जालम सिंह राणा ने बताया कि आग से जनहानि की सूचना नही है। डीएफओ कहकंशा नसीम ने बताया कि जंगल में तीन तरफ की आग को बुझा लिया गया है। बाकी एक क्षेत्र में लगी आग को बुझाने के प्रयास जारी हैं। आग बुझाने में संदीप खन्ना, सचिन रावत, सुंदर सिंह, प्रदीप, अनिल, सोहनवीर, राजेंद्र, विजेन्द्र सिंह, सुरेंद्र पंवार, संजू चौहान, रधुवीर, सुरज, सोमपाल आदि ने सहयोग किया।
दो दिन से जल रहे बैनोली, लोल्टी, थाला और जटेरा के जंगल
थराली में दो दिन से तहसील मुख्यालय के सामने बैनोली, लोल्टी, थाला और जटेरा के जंगलों में आग लगी हुई है। स्थानीय लोगों ने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन घना जंगल और पत्तियों के ढेर में आग लगी होने से उसे बुझाया नहीं जा सका।
ग्रामीण, रतन सिंह, सुरेंद्र सिंह, प्रेमबल्लभ, केदार सिंह ने कहा कि जंगलों पर ही उनकी आजीविका निर्भर है, यदि ये जंगल जल गए तो पशुओं के लिए चारा नहीं बचेगा और चूल्हा जलाने के लिए लकड़ियां भी नहीं मिल सकेंगी। साथ ही आग के आबादी क्षेत्र में भी पहुंचने का खतरा बना हुआ है। उन्होंने वन विभाग से जल्द जंगल की आग बुझाने की गुहार लगाई। वन क्षेत्राधिकारी मध्य पिंडर रेंज त्रिलोक सिंह ने कहा कि आग बुझाने के लिए टीम को मौके पर भेजा गया है।
संसाधन की कमी से जूझ रहा अग्निशमन विभाग
लक्सर में अग्निशमन विभाग संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में अगर कहीं कोई बड़ी की घटना होती है तो काबू पाना मुश्किल होगा। इतना ही नहीं विभाग के पास अपनी छत भी नहीं है। इसके चलते विभागीय कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है।
लक्सर तहसील क्षेत्र कृषि बाहुल्य क्षेत्र होने के चलते यहां हर साल बड़ी संख्या में अग्निकांड होते हैं। तहसील क्षेत्र के 165 गांव को अग्निकांड की घटनाओं से निजात दिलाने के लिए तहसील मुख्यालय पर अग्निशमन विभाग स्थापित किया गया है। इतने बड़े क्षेत्र की जिम्मेदारी के लिए विभाग के पास पर्याप्त संसाधन मौजूद नहीं है।
विभाग के पास कर्मचारियों सहित जरूरी सुविधाओं की कमी है। लक्सर अग्निशमन विभाग पर एक एफएसओ के अलावा एक दरोगा, चार लीडिंग फायरमैन, पांच चालक और 26 फायरमैन सिपाही के पद हैं। एफएसओ का पद लंबे समय से खाली है। चार लीडिंग फायरमैन व चार चालक के अलावा 11 फायरमैन हैं। 11 फायरमैन में से छह कुंभ मेले की ड्यूटी में भेजे गए हैं।
विभाग के पास दो गाड़ियां हैं, जबकि यहां तीन गाड़ियों की जरूरत है। दो गाड़ियों में से एक कुंभ मेले में भेजी गई है। विभाग को पिछले लंबे समय से हाई प्रेशर वाहन की जरूरत है, लेकिन हाई प्रेशर वाहन उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। विभाग के पास जो हाई प्रेशर वाहन मौजूद है, उसकी क्षमता केवल 300 लीटर पानी की ही है।
ऐसे में भीषण अग्निकांड की घटनाओं पर 300 लीटर पानी से आग बुझा पाना ऊंट के मुंह में जीरे के बराबर होता है। दमकल की गाड़ियों में पानी भरने के लिए लक्सर शुगर मिल व स्थानीय फैक्ट्री की ओर दौड़ लगानी पड़ती है। विभाग के पास अपना हाईडेंट सिस्टम भी नहीं हैं।
विभाग के पास वाहन व कर्मचारियों की कमी बनी हुई है। इसके बावजूद क्षेत्र में होने वाली आगजनी की घटनाओं पर नियंत्रण रखा जा रहा है। एक दमकरल के लिए विभाग को पत्र लिखा गया है।
- मेहताब आलम, द्वितीय अग्निशमन अधिकारी, लक्सर