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Dehradun News: शहर में किसी की बने सरकार, चुनौतियों से पाना होगा पार...

Sat, 25 Jan 2025 01:14 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jan 2025 01:14 AM IST
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Whoever forms the government in the city, challenges will have to be overcome...
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II-देहरादून नगर निगम के मेयर का आज देर रात होगा फैसला
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I-पुराना कूड़ा निस्तारण, कूड़ा उठान, पथ प्रकाश, मलिन बस्तियां और अन्य मुद्दे रहेंगे शामिल
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Iराजधानी देहरादून के नगर निगम का मेयर कौन होगा, लोगों को आज शाम तक पता चल जाएगा। फिलहाल भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है। जीत का सेहरा जिसके भी सिर सजेगा उसके सामने शहर को स्वच्छ बनाने और विकास करने के अलावा कई बड़ी चुनौतियां मौजूद रहेंगी।
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Iइसमें पूरे शहर में घर-घर से कूड़ा उठान, शीशमबाड़ा में कई साल से जमा लाखों टन कूड़े का निस्तारण, मलिन बस्तियों का विकास कार्य, खाली पड़े नगर निगम के कोष को भरने के साथ ही कई बड़ी समस्याएं शामिल हैं। पेश है अमर उजाला की यह रिपोर्ट-
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I1-डोर-टू-डोर कूड़ा उठान व्यवस्था को बेहतर करना
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Iराजधानी के 100 वार्डों में से 98 वार्डों में कूड़ा उठान व्यवस्था पर सवाल उठते रहे हैं। पिछले एक साल से बोर्ड के जाने के बाद स्थिति और भी खराब हुई है। फिलहाल 47 वार्डों में वाटरग्रेस कंपनी काम संभाल रही है। इन वार्डों में कूड़ा उठान व्यवस्था खराब होने की वजह से पूर्व में नए टेंडर जारी किए गए थे, इनके जल्द ही खुलने की उम्मीद है। जबकि अन्य वार्डों में सनलाइट और इकोन कंपनी कार्य संभाल रही है। कई वार्डों में रोजाना गाड़ी नहीं पहुंचने की शिकायतें भी आती रहती हैं। नए मेयर के सामने पूरे शहर में साफ-सफाई व्यवस्था को बेहतर करनी की चुनौती रहेगी।
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I2-शीशमबाड़ा लिगेसी वेस्ट और नए कूड़े का रोजाना निस्तारण
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Iशीशमबाड़ा कूड़ा निस्तारण प्लांट देहरादून नगर निगम का बड़ा मुद्दा रहा है। पूरे शहर का करीब 450 टन कूड़ा निस्तारण के लिए शीशमबाड़ा जाता है। इसको निस्तारित करने के लिए फिलहाल नेकोफ कंपनी वहां काम कर रही है। वहीं कंपनियों की ओर से पूर्व में शीशमबाड़ा छोड़ा गया लाखों टन कूड़ा भी बड़ी समस्या है। इसकी वजह से वहां पर कूड़े के बड़े-बड़े पहाड़ दिखाई देते हैं। हालांकि कूड़े के निस्तारण का कार्य शुरू हो चुका है। डेढ़ वर्ष में कूड़े के निस्तारित होने की उम्मीद जताई जा रही है। मेयर के सामने यह चुनौती रहेगी कि वर्तमान में काम कर रही दोनों कंपनियां समय से कूड़े का निस्तारण करें ताकि वे एनजीटी के समक्ष मजबूती से नगर निगम का पक्ष रख सकें।
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I3-दूर-दजाज के वार्डों में बंद पड़े जोनल कार्यालयों को जीवित करना
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Iनगर निगम का क्षेत्रफल बड़ा होने की वजह से उसे कुल चार जोन में बांटा गया है। इसके लिए हर्रावाला, राजपुर रोड, मोथरोवाला सहित चार कार्यालय शहर के अलग-अलग हिस्सों में बनाए गए थे। इन कार्यालयोंं में अधिकारियों की ड्यूटी का भी आवंटन किया गया। बावजूद इसके लोगों को इसका कोई भी लाभ नहीं मिल सका। पांच साल बीतने के बाद भी लोगों को विभिन्न कार्याें के लिए नगर निगम देहरादून के चक्कर काटने पड़ते हैं। 10-15 किमी का सफर तय करके लोगों को नगर निगम की दौड़ नहीं लगानी पड़े, इसके लिए इंतजाम करना भी नए मेयर के सामने बड़ी चुनौती होगी।
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I4-निगम की आय बढ़ाना भी बड़ी चुनौती
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Iनगर निगम देहरादून की आय कैसे बढ़े यह भी नए मेयर के सामने चुनौती रहेगी। हालांकि निगम गृहकर, होर्डिंग कर सहित अन्य करों से प्रत्येक वर्ष करीब 200 करोड़ रुपये कमाता है। इसके बाद भी निगम को राज्य सरकार की वित्तीय सहायता की उम्मीद रहती है। इस साल नगर निगम में बजट की कमी रही थी। इसकी वजह से कई कार्यों को रोकना पड़ा था। ऐसी स्थिति में विकास के लिए प्रत्येक वार्ड को सिर्फ पांच लाख रुपये ही दिए गए थे। अब निगम के आय के स्त्रोत बढ़ाने के लिए भी नए मेयर के सामने चुनौती रहेगी।

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I5- मलिन बस्तियां
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Iदेहरादून में बड़ी संख्या में मलिन बस्तियां हैं। इनका विकास नगर निगम के लिए बड़ी चुनौती है। खासतौर पर रिस्पना-बिंदाल के किनारे बसीं मलिन बस्तियों का विकास करना नए मेयर के लिए चुनौती रहेगी। इन मलिन बस्तियों को सुरक्षित करने वाले अध्यादेश को एनजीटी ने कठघरे में खड़ा किया है। जिस पर सरकार और निगम को जवाब देना है। इन बस्तियों में करीब 40 हजार घर हैं। इन घरों में रहने वाले लोगों का घर टूटेगा या नहीं यह भी बड़ा सवाल है। इन बस्तियों के लोगों को सुविधाएं मुहैया कराना भी मेयर के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा।
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