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ऋषिकेश एम्स नियुक्ति फर्जीवाड़ा: पांच आरोपियों की जमानत खारिज, नौकरी दिलाने के नाम पर की थी ठगी

Fri, 09 Oct 2026 09:14 PM IST
Alka Tyagi संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश Published by: Alka Tyagi Updated Fri, 09 Oct 2026 09:14 PM IST
सार

एम्स प्रशासन की शिकायत पर पुलिस ने पांचों आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था। दीपक के कब्जे से 2 लाख बरामद किए जाने का दावा भी किया गया था।

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Rishikesh AIIMS recruitment fraud Bail rejected for five accused had committed fraud In Name of jobs
कोर्ट - फोटो : ANI (File)

विस्तार

एम्स के किच्छा स्थिति सेटेलाइट सेंटर में नौकरी दिलाने के नाम पर कथित धोखाधड़ी के मामले में प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश कंवर अमनिंदर सिंह की अदालत ने पांच आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। आरोपियों में दीपक गुसाईं, दीपांशु मंडल, दीपना मंडल, गणेश निसार और सुब्रत बछाड़ शामिल हैं।

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एम्स प्रशासन की शिकायत पर पुलिस ने पांचों आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था। दीपक के कब्जे से 2 लाख बरामद किए जाने का दावा भी किया गया था। मामले में दो फर्जी नियुक्ति पत्र भी मिले थे। आरोपियों ने जमानत के लिए प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश कंवर अमनिंदर सिंह की अदालत में प्रार्थना पत्र दायर किए थे। बीते बृहस्पतिवार को जमानत पर बहस के बाद शुक्रवार को अदालत ने आदेश जारी किए।
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अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि एम्स ने निर्माणाधीन सैटेलाइट सेंटर में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती के लिए किसी एजेंसी को निविदा, अनुबंध या वर्क ऑर्डर जारी नहीं किया था। इसके बावजूद नियुक्ति पत्र जारी किए जाने और भर्ती के नाम पर धनराशि लेने के आरोपों को अदालत ने गंभीर माना।

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अदालत ने कहा कि मामले में आरोपियों की भूमिका की विस्तृत जांच आवश्यक है। इस स्तर पर जमानत देने से आरोपियों के फरार होने या महत्वपूर्ण साक्ष्यों को प्रभावित करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

अदालत ने विवेचक को एम्स परिसर के सीसीटीवी फुटेज, संबंधित कंप्यूटर सिस्टम और दस्तावेजों को सुरक्षित कर जांच करने के निर्देश भी दिए। साथ ही एम्स के संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज कर भर्ती प्रक्रिया और एजेंसी की भूमिका की जांच करने को कहा। अदालत ने पांचों आरोपियों की जमानत खारिज की।

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