फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   When will the sky rain down

खेत कैसे हों तर जब नहरें हैं क्षतिग्रस्त

Wed, 20 Jan 2021 12:23 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 20 Jan 2021 12:23 AM IST
विज्ञापन
When will the sky rain down
विकासनगर/साहिया। जनवरी माह में अपेक्षाकृत कम बारिश होने से जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर में खेतीबाड़ी करने वाले काश्तकारों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच आई हैं। क्षेत्र की 12 से अधिक सिंचाई गूल मरम्मत के अभाव में लंबे समय से क्षतिग्रस्त पड़ी हैं। ऐसे में काश्तकारों को खेतों की सिंचाई का संकट सताने लगा है। रह-रहकर उनकी आंखें आसमान की ओर टकटकी लगाकर देख रही हैं।
विज्ञापन

जनजातीय क्षेत्र में रहने वाले ज्यादातर लोगों का मुख्य पेशा खेतीबाड़ी से जुड़ा हुआ है, लेकिन क्षेत्र की 12 से अधिक सिंचाई गूलें बीते छह साल से क्षतिग्रस्त पड़ी हैं। इसके चलते पूरी खेतीबाड़ी बारिश पर निर्भर होकर रह गई है, लेकिन इस बार बादलों ने भी किसानों से अपना मुंह फेर लिया है। जनवरी माह के शुरुआती दिनों को छोड़ दिया जाए तो क्षेत्र में अब तक बारिश ही नहीं हुई है, जिससे खेत सूखने लगे हैं। काश्तकारों को सिंचाई का संकट सताने लगा है। क्षेत्र में इन दिनों गेहूं, मटर, मसूर की फसल बोई हुई है। पाले से बचाव के लिए इन फसलों की समय-समय पर सिंचाई बेहद जरूरी है।
विज्ञापन

काश्तकार महेंद्र सिंह, सुरेंद्र सिंह, जितेंद्र सिंह पंवार, सुरेंद्र सिंह पंवार, रण सिंह राठौर और गोपाल राठौर आदि का कहना है कि शिकायत के बाद भी लघु सिंचाई विभाग क्षतिग्रस्त सिंचाई गूल की सुध नहीं ले रहा है। पाले के चलते फसल सूख रही है। यदि आने वाले समय में भी फसलों की सिंचाई नहीं हुई तो उन्हें खासा नुकसान उठाना पड़ेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

===========
2015 से क्षतिग्रस्त हैं सिंचाई गूल
जनजातीय क्षेत्र जौनसार के अंतर्गत चरगाड़ खड्ड, जड़वाला, सेवना, रमवाड़ा, स्यारली खड्ड, साहिया छानी, जमाड खड्ड, अस्टीगाड़, सुइनाड़, चरखेता, पंजियागाड, अच्छेड़पुल समेत 12 से अधिक सिंचाई नहरें क्षतिग्रस्त है़। 2015 में बरसात के दौरान आपदा के दौरान कई सिंचाई गूल के हेड क्षतिग्रस्त हो गए थे, जबकि, कई नहरें मलबे के नीचे दब गई थीं। इनकी अब तक मरम्मत नहीं हो सकी है।

क्षतिग्रस्त नहरों की मरम्मत के लिए आपदा के तहत प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जा चुका है। इसे अब तक मंजूरी नहीं मिल सकी है। एक बार फिर से नहरों की मरम्मत के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
-रविंद्र प्रसाद ईई लघु सिंचाई विभाग
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed