मैं भी कह सकता हूं कि विपक्षी डेंगू के मच्छर लाकर यहां छोड़ रहे हैं: त्रिवेंद्र सिंह रावत
- देहरादून जिले में हालात चिंताजनक
- स्वास्थ्य विभाग ने जांच के लिए निजी अस्पतालों से सैंपल मंगाए
- दो मरीजों ने उपचार के दौरान ऋषिकेश के एम्स में दम तोड़ा
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डेंगू की रोकथाम में सरकार पर विफल रहने के आरोप पर मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर तंज कसा है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने टिप्पणी की कि मच्छर सरकार के घर में तो पैदा होता नहीं है। विपक्ष के इस तरह के आरोपों में कोई दम नहीं है। शनिवार को प्रधानमंत्री के सेवा सप्ताह के अंतर्गत कोरोनेशन अस्पताल में मरीजों की कुशलक्षेम पूछने और फल वितरण के बाद मीडिया के सवालों के जवाब में मुख्यमंत्री ने यह बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘मैं भी कह सकता हूं कि विपक्षी डेंगू के मच्छर लाकर यहां छोड़ रहे हैं।’
मीडिया ने पूछा कि कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा है कि डेंगू तो सरकार के आसपास दिल्ली से लेकर देहरादून तक घूम रहा है। इस पर सीएम ने कहा कि सबसे बड़ा डेंगू तो प्रीतम सिंह के आसपास घूम रहा है। दो साल से वह अपनी पार्टी का गठन नहीं कर पाए हैं। अब कह रहे हैं कि एक महीने में गठन कर देंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि डेंगू की रोकथाम के लिए डॉक्टरों की पूरी टीमें जुटी हुई हैं। सरकार लगातार इसकी मॉनीटरिंग कर रही है। अधिकारियों और डाक्टरों को दिशा-निर्देश भी दिए जा रहे हैं। विपक्ष को इस तरह के निराधार आरोप नहीं लगाने चाहिए।
बता दें कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने डेंगू के मुद्दे पर सीएम को घेरते हुए कहा कि राज्य के मुखिया और स्वास्थ्य मंत्री होने के नाते उनकी जिम्मेदारी सबसे बड़ी है, मगर इसका निर्वहन नहीं किया जा रहा है। सरकार के पास डेंगू प्रभावितों के असल आंकडे़ तक उपलब्ध नहीं है।
स्वास्थ्य विभाग को नहीं पता जिले में डेंगू के कितने मरीज
देहरादून जिले में डेंगू के मरीजों की संख्या को लेकर स्वास्थ्य विभाग खुद गफलत में है। डेंगू पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए स्वास्थ्य महानिदेशक डा. आरके पांडेय शुक्रवार को खुद सामने आए, लेकिन मरीजों की असल संख्या पर वे भी उलझ गए। जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों ने उन्हें जो संख्या बताई वह सरकारी अस्पतालों की रिपोर्ट से भी मेल नहीं खा रही है। स्वास्थ्य महानिदेशक ने मरीजों की संख्या 852 बताई, जबकि शहर के ही तीन सरकारी अस्पतालों में यह आंकड़ा 1592 पहुंच चुका है। जबकि, ऋषिकेश के आंकड़े इसमें शामिल नहीं हैं। चूक का अहसास होने पर स्वास्थ्य महानिदेशक ने आंकड़ों को दुरुस्त करने का निर्देश दिया।
टूट गया पिछला रिकॉर्ड
डीजी हेल्थ ने शुक्रवार को दून मेडिकल कालेज अस्पताल के सभागार में प्रेस कांफ्रेंस कर डेंगू से हुई मौतों और मरीजों के आंकड़े प्रस्तुत किए। स्वास्थ्य अधिकारियों की ओर से प्रस्तुत किए गए आंकड़ों के आधार पर उन्होंने बताया कि देहरादून जिले में बृहस्पतिवार शाम तक 831 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है। यह आंकड़ा शुक्रवार को 852 पहुंच गया। असलियत में यह आंकड़ा सिर्फ दून अस्पताल का है। वहीं, 27 अगस्त से कोरोनेशन और गांधी अस्पताल में हो रही डेंगू की जांच के आंकड़े इसमें शामिल ही नहीं किए गए। वहीं, ऋषिकेश और रायपुर के सरकारी अस्पतालों में भी एलाइजा जांच हो रही है।
आंकड़ों में हेरफेर पकड़ में आने पर डीजी हेल्थ ने सीएमओ डा. एसके गुप्ता को निर्देश दिए कि दोनों अस्पतालों में हो रही जांच की रिपोर्ट भी ली जाए। वहीं, कोरोनेशन और गांधी शताब्दी अस्पताल के सीएमएस डा. बीसी रमोला ने बताया कि उनके दोनों अस्पतालों में अब तक 740 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। उधर, सीएमओ डा. एसके गुप्ता का कहना है कि दोनों अस्पतालों में हुई डेंगू की जांच के आंकड़े मंगाए गए हैं।
जिले में डेंगू पीड़ित मरीजों की संख्या का पिछले तीन सालों का रिकॉर्ड टूट गया है। डीजी हेल्थ डा. आरके पांडेय ने सरकारी आंकड़ों के हवाले से बताया कि बृहस्पतिवार शाम तक एलाइजा जांच के बाद प्रदेश में 1400 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है। इनमें से सर्वाधिक 831 देहरादून और 460 नैनीताल जिले के मरीज शामिल हैं। वहीं, देहरादून जिले में वर्ष 2016 में 1434 डेंगू पीड़ित मरीज सामने आए थे। इस साल डेंगू के मरीजों की यह संख्या 1592 पहुंच चुकी है।