फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   vishal faced many problem in his life

परेशानियों के पहाड़ से बन गया 'विशाल'

Mon, 13 Jan 2014 11:14 AM IST
अंशुल डांगी/ अमर उजाला, देहरादून
अंशुल डांगी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 13 Jan 2014 11:14 AM IST
विज्ञापन
vishal faced many problem in his life

जूनियर नेशनल वॉलीबाल चैंपियनशिप में उत्तराखंड की टीम में शामिल रुड़की के विशाल जोश और जज्बे से लबरेज नजर आते हैं।

विज्ञापन


जुनून ने हौसला दिया
मैच के दौरान साथियों संग उनका सहयोग और उत्साह देखते बनता है। लेकिन वे दुश्वारियों के ढेर से विशाल बने हैं। पिता के निधन के बाद विशाल टूट चुके थे। लेकिन खेल के प्रति जुनून ने उन्हें हौसला दिया।

पढ़ें, रात को 'लड़की' को बुलाया, जब नींद खुली तो उड़े होश
विज्ञापन


सुविधाओं और पैसे के अभाव के बावजूद विशाल ने शिखर की ओर बढ़ना शुरू किया। गुरबत से निकला यह खिलाड़ी अब राज्य वॉलीबाल के फलक पर उभरता सितारा है। चैंपियनशिप में उत्तराखंड के लिए जर्सी नंबर छह पहनकर उतरने वाले विशाल कुमार (17) प्रदेश की हर जीत में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


रुड़की के भारापुर भोरी गांव निवासी विशाल ने बताया कि उनकी पसंद ऊंची कूद थी, लेकिन बड़े भाई को गांव में खेलता देख वॉलीबाल में रुचि जगी। वर्ष 2007 में पहली बार वॉलीबाल पकड़ा और अगले ही साल स्टेट की टीम में खेलने का मौका मिल गया।

पढ़ें, मंत्री के भाई हैं तो क्या कुछ भी करेंगे?

जिस दिन टीम को खेलने के लिए रवाना होना था, उसी दिन हादसे में विशाल के पिता का निधन हो गया। विशाल खेलने नहीं जा सके। गरीबी की मार पहले से परिवार पर थी। अब खर्चे का जिम्मा बूढ़े दादा मोल्हड़ सिंह पर आ गया।

वर्ष 2011 में विशाल को स्कूल छोड़ना पड़ा, लेकिन वह वॉलीबाल को भुला नहीं सके। परिवार खेल का खर्चा नहीं उठा सकता, लिहाजा विशाल ने स्थानीय टूर्नामेंटों में भाग लेना शुरू किया।

पढ़ें, इस 'चिराग' ने रौशन किया उत्तराखंड का नाम

जीत से मिलने वाली रकम के भरोसे हर शाम गांव से करीब 15 किलोमीटर दूर हरिद्वार पुलिस लाइन में अभ्यास के लिए जाते हैं। 12वीं का प्राइवेट फॉर्म भर दिया है। पढ़ाई के साथ वॉलीबाल की प्रैक्टिस पर फोकस है।


सहारा मिले तो...
कम संसाधनों के बावजूद खेल के दम पर विशाल राज्य की टीम में तो शामिल हो चुके हैं, लेकिन प्रदर्शन जारी रखने के लिए उन्हें और सहारे की जरूरत है।

विशाल कहते हैं कि खर्चा खुद उठाता देख परिवार ने खेल की इजाजत तो दे दी, लेकिन जरूरी प्रशिक्षण और संसाधनों का खर्चा कैसे उठाएं? कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश को पहचान दिलाने का सपना देखते हैं लेकिन...।

सोनिक और विक्रांत भी कमाल
उत्तराखंड वॉलीबाल टीम के लिफ्टर सोनिक सालार और अटैकर विक्रांत कुमार भी टीम के प्रमुख स्तंभ हैं। कुश्ती के शौकीन विक्रांत रुड़की के लिब्बरहेड़ी गांव के रहने वाले हैं।

पढ़ें, अपना दबदबा दिखाने की कोशिश में बहुगुणा कैंप

वर्ष 2007 में विक्रांत स्पोर्ट्स कॉलेज पहुंचे थे और यहां से पढ़ाई पूरी करने के बाद जालंधर स्पोर्ट्स कॉलेज में आगे का प्रशिक्षण ले रहे हैं। रुड़की के ही सोनिक सालार स्पोर्ट्स कॉलेज में 10वीं के छात्र हैं।

क्रिकेट के शौकीन सोनिक को वालीबाल की जानकारी कॉलेज में मिली। कॉलेज में पहली बार उन्होंने यह गेंद देखी और फिर शुरू हो गया सीखने का सफर। यह सोनिक की लगन ही थी कि सोनिक न सिर्फ नेशनल चैंपियनशिप में टीम के लिफ्टर बने, बल्कि अपने से सीनियर खिलाड़ियों की कप्तानी का भी उन्हें मौका मिला।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed