विजय दिवस 2017: जांबाजों की शहादत पर कुछ वादे किए पूरे, ज्यादातर रह गए अधूरे
शहीदों के सम्मान में सरकार ने तमाम घोषणाएं की। कुछ वादे पूरे हो गए, लेकिन ज्यादातर आज भी अधूरे हैं। सरकारी दफ्तरों की फाइलों में दबे पूर्व सैनिकों, सैनिक आश्रितों के यह सपने आज तक पूरे नहीं हो पाए।
विजय दिवस हो या शौर्य दिवस, हर बार सरकारों की होने वाली घोषणाएं कागजों से आगे नहीं बढ़ पातीं। सरकार की घोषणा के तहत चीड़बाग में पहला स्टेट वार मेमोरियल तैयार हो रहा है, लेकिन तमाम सपने आज भी अधूरे हैं।
न तो हर जिले में शहीदों की याद में प्रेरणा स्थल बन पाए और न ही आज तक शहीदों के बच्चों के लिए छात्रावास। वीरों के बच्चों को आईआईटी, आईआईएम में चयन पर एक लाख रुपये देने की घोषणा भी शिगूफा है। वह भी तब, जब प्रदेश की 10 प्रतिशत आबादी या तो पूर्व सैनिक है या सैनिक आश्रित है। आज विजय दिवस पर सैनिकों से जुड़े ऐसे ही कुछ मामलों पर एक रिपोर्ट।
वादों का यह हाल
वादों का यह हाल
1. सरकार ने राज्य का स्टेट वार मेमोरियल बनाने की घोषणा की थी, जो चीड़बाग में निर्माणाधीन है।
2. शहीदों के नाम पर हर जिले में प्रेरणा स्थल बनाने की घोषणा देहरादून जिले से आगे नहीं बढ़ पाई।
3. सरकारी स्कूल और सड़कों का नाम शहीद सैनिकों के नाम पर करने की घोषणा की बेहद सुस्त चाल।
4. हर जिले में शहीद सैनिकों, पूर्व सैनिकों के बच्चों के लिए छात्रावास बनाने की घोषणा फाइलों में दबी।
5. उल्लेखनीय सेवाओं के लिए सैन्य पदकों की धनराशि बढ़ाने की घोषणा भी केवल शिगूफा निकली।
6. वीर नारियों के बच्चों के विवाह में एक लाख रुपये की धनराशि देने की घोषणा हुई पूरी।
7. एमबीबीएस, आईआईटी और आईआईएम में चयन पर एक लाख रुपये देने की घोषणा अधूरी।
इसलिए मनाते हैं विजय दिवस
वर्ष 1971 में शहीद और अलंकृत सैनिक
शहीद : 248
युद्ध अपंग : 78
वीरता पदक विजेता (मरणोपरांत) : 17
महावीर चक्र विजेता : 05
वीर चक्र विजेता : 31
इसलिए मनाते हैं विजय दिवस
25 मार्च 1971 को पाकिस्तान के सैनिक तानाशाह याहया खान ने पूर्वी पाकिस्तान की जनभावनाओं को सैनिक ताकत से कुचलने का आदेश दे दिया। शेख मुजीब को पूर्वी पाकिस्तान से गिरफ्तार कर लिया गया। वहां से लगातार शरणार्थी भारत आने लगे। जब भारत में पाकिस्तानी सेना के दुर्व्यवहार की खबरें आईं तो भारत पर वहां सेना के जरिये हस्तक्षेप का दबाव पड़ने लगा। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी चाहती थीं कि अप्रैल में पूर्वी पाकिस्तान पर आक्रमण किया जाए, लेकिन भारतीय सेना के सेनाध्यक्ष जनरल मानेकशाह इसके लिए तैयार नहीं थे।
भारत के पास सिर्फ एक पर्वतीय डिविजन था और इसके पास पुल बनाने की क्षमता नहीं थी। मानसून दस्तक देने वाला था। ऐसे में पूर्वी पाकिस्तान में प्रवेश करना मुसीबत मोल लेने जैसा था। जन. मानकेशाह ने इंदिरा गांधी को स्पष्ट कह दिया कि वह पूरी तैयारी के साथ ही युद्ध के मैदान में उतरेंगे। वर्ष 1971 के युद्ध में भारत के करीब 3,900 सैनिक शहीद हुए थे और 9,851 सैनिक घायल हुए थे।
इस युद्ध में पूर्वी पाकिस्तान के सैनिक कमांडर जन. एके नियाजी ने भारत के पूर्वी सैन्य कमांडर ले. जन. जगजीत सिंह अरोड़ा के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद 17 दिसंबर को 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों को युद्धबंदी बना लिया गया। जनरल नियाजी और जनरल अरोड़ा ने आत्मसमर्पण के दस्तावेज पर संयुक्त रूप से हस्ताक्षर किए। जन. नियाजी ने अपने बिल्ले उतारे और अपना रिवॉल्वर जन. अरोड़ा के हवाले कर दिया। आत्मसमर्पण के समय जन. नियाजी की आंखों में आंसू आ गए थे।
सीएम-राज्यपालने दी विजय दिवस की शुभकामनाएं
विजय दिवस सेना के शौर्य व पराक्रम का प्रतीक : राज्यपाल
प्रदेश के राज्यपाल डॉ. कृष्णकांत पाल ने वर्ष 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर अभूतपूर्व विजय की याद में मनाए जाने वाले विजय दिवस पर सभी नागरिकों, वीर सैनिकों, पूर्व सैनिकों और शहीद सैनिकों के परिजनों को बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि विजय दिवस, भारतीय सेना के शौर्य और पराक्रम का प्रतीक है। यह दिवस, दुनिया की श्रेष्ठ सेनाओं में शुमार भारतीय सेना के वीर पराक्रमी जवानों के प्रति आत्मिक सम्मान और गौरव व्यक्त करने का महान अवसर है, जिन्होंने अपनी प्राणों की आहुति देकर देश के मान-सम्मान की रक्षा की।
देश की आनबान और शान की रक्षा के लिए समर्पित सेना के प्रत्येक जवान और शहीद पर राष्ट्र के प्रत्येक नागरिक को गर्व है। राज्यपाल ने कहा कि भारतीय सेना ने सदैव ही बाहरी और आंतरिक सुरक्षा के साथ ही दैवीय आपदा और अन्य विपरीत परिस्थितियों में भी आम नागरिकों की रक्षा में अहम भूमिका निभाई है। भारत के प्रत्येक नागरिक के हृदय में भारतीय सेना के प्रति अपार स्नेह व सम्मान है।
सीएम ने भी दी विजय दिवस की शुभकामनाएं
सूबे के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विजय दिवस के अवसर पर भारतीय सेना, भूतपूर्व सैनिकों, देश एवं प्रदेश वासियों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना के वीर जवानों द्वारा पाकिस्तान पर ऐतिहासिक विजय प्राप्त करने के उपलक्ष्य में 16 दिसम्बर को विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिवस भारतीय सेना के शौर्य, पराक्रम और मान को स्थापित करता है।
मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि देश की रक्षा के लिए हमारे वीर सैनिक हमेशा तत्परता के साथ अपना योगदान देते हैं, जिस पर हम गर्व करते हैं। देश की सीमाओं की रक्षा के लिए वीर सैनिकों द्वारा किए गए सर्वोच्च बलिदान को हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि हमें अपने सैनिकों की वीरता पर नाज है और पूरा देश उनकी बहादुरी को नमन करता है।