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उत्तराखंडः दिलीप कुमार के 'दैय्या रे दैय्या' गीत ने दिलाई पहाड़ के घसियारी नृत्य को पहचान

Thu, 08 Jul 2021 02:37 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal चंद्रेश पांडे, अमर उजाला, नैनीताल
चंद्रेश पांडे, अमर उजाला, नैनीताल Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 08 Jul 2021 02:37 PM IST
सार

प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. अजय रावत द्वारा लिखी गई पुस्तक कल्चरल हिस्ट्री ऑफ उत्तराखंड में इस बात का उल्लेख किया गया है।

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veteran actor dilip kumar passed away : this song recognition ghasiyari dance of uttarakhand mountain
वर्ष 1958 में बनी फिल्म 'मधुमती' का एक दृश्य - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

वर्ष 1958 में बनी फिल्म 'मधुमती' में ट्रेजेडी किंग दिलीप कुमार और अभिनेत्री वैजयंती माला पर फिल्माए गए दो प्रमुख गीत और नृत्य के माध्यम से उत्तराखंड घसियारी नृत्य ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।

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प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. अजय रावत द्वारा लिखी गई पुस्तक कल्चरल हिस्ट्री ऑफ उत्तराखंड में इस बात का उल्लेख किया गया है। प्रो. रावत बताते हैं कि मधुमती फिल्म के एक गीत सुहाना सफर और ये मौसम हसीं...में घोड़ाखाल का चीड़ का जंगल और पहाड़ की हसीन वादियां नजर आती हैं, जबकि दूसरे प्रमुख गीत दैय्या रे दैय्या चढ़ गयो पापी बिछुवा... में पहाड़ के घसियारी नृत्य की छाप देखने को मिलती है।
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घसियारी नृत्य कुमाऊंनी झोड़ा और चांचरी दोनों की भाव भंगिमाओं का समावेश है। वह बताते हैं कि नृत्य सम्राट उदयशंकर ने दैय्या रे दैय्या गीत के नृत्य में कुछ स्टैप पहाड़ी नृत्य यानी घसियारी नृत्य के शामिल कराए थे। यह गाना तब खासा लोकप्रिय हुआ और पहाड़ी नृत्य और संस्कृति को दुनियाभर में पहचाना जाने लगा।

दैय्या रे दैय्या गीत में गीत की कॉस्ट्यूम डिजाइन वैजयंती माला की मां ने किया था और जो चांदी के गहने थे वो खुद वैजयंती माला के थे। बाद में प्रसिद्ध कोरियोग्राफर बनीं सरोज खान इस गीत में बैक ग्राउंड डांसर थीं।

क्लास बंक कर पैदल गए थे शूटिंग देखने

प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो.अजय रावत का कहना है कि जब फिल्म मधुमती की शूटिंग हुई तब वह सेंट जोजफ्स कालेज में अध्ययनरत थे। जैसे ही उन्हें शूटिंग के बारे में पता चला तो वह भी अपने साथियों के साथ स्कूल बंक कर नैनीताल से पैदल ही भवाली जा पहुंचे। लौटने पर सभी ने स्कूल में खूब मार खाई। 

भवाली स्थित चंद्र भवन में भी रहे दिलीप कुमार
फिल्म अभिनेता दिलीप कुमार और उनकी घोड़ाखाल रोड स्थित चंद्र भवन और आसपास के मकानों में भी रही। बता दें कि चंद्र भवन स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हीरालाल साह का बंगला है। वह भवाली के चेयरमैन भी रहे। स्व. साह के पुत्र अशोक साह ने बताया कि मधुमती फिल्म की शूटिंग के दौरान अक्सर अपने नाना के घर भवाली चले जाते थे। तभी उनकी पहचान दिलीप कुमार व अन्म कलाकारों से हुई थी।

हरि संकीर्तन सभा में सुनाया था गाना
मधुमती फिल्म की शूटिंग के दौरान दिलीप कुमार एक बार निर्माता-निर्देशक बिमल रॉय के साथ नैनीताल आए थे। वह यहां मल्लीताल स्थित हरि संकीर्तन सभा में आयोजित शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रम में भी शामिल हुए। रंगकर्मी सुरेश गुरुरानी ने बताया कि उन्होंने यहां शास्त्रीय संगीत पर आधारित गाना भी गाया और वहां मौजूद रजिस्टर में हस्ताक्षर भी किए। यह हस्ताक्षर अभी भी यहां सुरक्षित हैं।

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