{"_id":"5f460f168ebc3edd187153a7","slug":"uttarakhand-weather-today-update-news-in-hindi-in-roorkee-uttarakhand-weather-ganga-water-level-rises-five-thousand-bigha-crop-can-be-ruin","type":"story","status":"publish","title_hn":"Uttarakhand Weather : गंगा का जलस्तर बढ़ा, पांच हजार बीघा फसल बर्बाद होने की कगार पर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Uttarakhand Weather : गंगा का जलस्तर बढ़ा, पांच हजार बीघा फसल बर्बाद होने की कगार पर
Wed, 26 Aug 2020 01:20 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, रुड़की
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, रुड़की
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Wed, 26 Aug 2020 01:20 PM IST
विज्ञापन
गंगा का जलस्तर बढ़ने से खेतों में भरा पानी
- फोटो : अमर उजाला
बरसात के मौसम में गंगा का जलस्तर बढ़ने व घटने का क्रम जारी है। ऐसे में गंगा का पानी भर जाने से क्षेत्र की करीब पांच हजार बीघा भूमि पर खड़ी फसल बर्बादी की कगार पर पहुंच गई है। ऐसे में किसानों को चिंता सता रही है कि यदि जल्द ही पानी नहीं उतरा तो फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगी।
लक्सर और खानपुर के खादर क्षेत्र से गंगा नदी होकर जाती है। बरसात के दिनों में अक्सर गंगा का जलस्तर बढ़ जाता है। पिछले सप्ताह गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया था। इस कारण डूमनपुरी, बालावाली, कलसिया, इदरीशपुर, रामसहायवाला, हिम्मतपुर बेला आदि गांव की कृषि भूमि पर खड़ी फसलों में पानी भर गया था।
हालांकि इसके बाद कुछ फसलों से पानी उतर गया है, लेकिन आज भी करीब पांच हजार बीधा भूमि पर खड़ी फसलों में पानी भरा हुआ है। इस कारण किसानों को फसलों की बरबादी की कगार पर पहुंच गई है।
विज्ञापन
किसान तुषार, प्रदीप कुमार, अमित कुमार, देवेंद्र कुमार आदि का कहना है कि यदि जल्द ही फसलों से पानी नहीं उतरा तो फसलें पूरी तरह से चौपट हो जाएगी। इसके साथ ही कुछ किसानों के सामने चारे का संकट भी खड़ा हो गया है। क्योंकि पानी भर जाने के कारण किसान खेतों से चारा नहीं काट पा रहे है। ऐसे में पशुओं को सूखा भूसा खिलाना पड़ रहा है।
भूमि में होता है कटाव, नहीं मिलता मुआवजा
स्थानीय किसानों का कहना है कि प्रत्येक वर्ष गंगा व सोलानी नदी के कारण काफी फसलें बर्बाद हो जाती हैं। इसके बाद सरकार कुछेक लोगों को ही मुआवजा देती है। अधिकतर किसानों को मुआवजा नहीं मिल पाता। कई बार गंगा के बहाव में बड़ी मात्रा में भूमि का कटाव हो जाता है। इससे किसानों की भूमि किसी काम की नहीं रहती, लेकिन आज तक इसका मुआवजा किसानों को नहीं मिल पाया है।
तटबंध हो दुरुस्त तो बने बात
गंगा का तटबंध लक्सर व खानपुर क्षेत्र में तीन जगह से क्षतिग्रस्त है। इसे ठीक कराने के लिए ग्रामीण लंबे समय से मांग करते आ रहे हैं। वहीं कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने भी तटबंध का हवाई सर्वे किया था, लेकिन आज तक तटबंध को दुुरुस्त नहीं कराया गया है। यदि तटबंधों को दुरुस्त करा दिया जाएगा तो किसानों की मुश्किलें काफी कम हो जाएगी।
दो लोगों की हो चुकी है मौत
जुलाई और अगस्त में दो किसानों की गंगा में डूबने के कारण मौत हो चुकी है। ये किसान गंगा का पार कर दूसरी ओर खेतों पर जा रहे थे। इस दौरान हादसे का शिकार हो गए थे। इसमें से एक दल्लावाला और दूसरा कलसिया गांव का रहने वाला है।
फसलों में भरे पानी की निगरानी की जा रही है। किसानों से इस बाबत जानकारी जुटाई जा रही है। यदि फसल बर्बाद होती है तो उच्चाधिकारियों से वार्ता करने के बाद सर्वे कराया जाएगा। इसके बाद नियमानुसार मुआवजा देने की कार्रवाई की जाएगी।
- विकेश यादव, मुख्य कृषि अधिकारी, हरिद्वार
विज्ञापन
लक्सर और खानपुर के खादर क्षेत्र से गंगा नदी होकर जाती है। बरसात के दिनों में अक्सर गंगा का जलस्तर बढ़ जाता है। पिछले सप्ताह गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया था। इस कारण डूमनपुरी, बालावाली, कलसिया, इदरीशपुर, रामसहायवाला, हिम्मतपुर बेला आदि गांव की कृषि भूमि पर खड़ी फसलों में पानी भर गया था।
विज्ञापन
हालांकि इसके बाद कुछ फसलों से पानी उतर गया है, लेकिन आज भी करीब पांच हजार बीधा भूमि पर खड़ी फसलों में पानी भरा हुआ है। इस कारण किसानों को फसलों की बरबादी की कगार पर पहुंच गई है।
विज्ञापन
किसान तुषार, प्रदीप कुमार, अमित कुमार, देवेंद्र कुमार आदि का कहना है कि यदि जल्द ही फसलों से पानी नहीं उतरा तो फसलें पूरी तरह से चौपट हो जाएगी। इसके साथ ही कुछ किसानों के सामने चारे का संकट भी खड़ा हो गया है। क्योंकि पानी भर जाने के कारण किसान खेतों से चारा नहीं काट पा रहे है। ऐसे में पशुओं को सूखा भूसा खिलाना पड़ रहा है।
भूमि में होता है कटाव, नहीं मिलता मुआवजा
स्थानीय किसानों का कहना है कि प्रत्येक वर्ष गंगा व सोलानी नदी के कारण काफी फसलें बर्बाद हो जाती हैं। इसके बाद सरकार कुछेक लोगों को ही मुआवजा देती है। अधिकतर किसानों को मुआवजा नहीं मिल पाता। कई बार गंगा के बहाव में बड़ी मात्रा में भूमि का कटाव हो जाता है। इससे किसानों की भूमि किसी काम की नहीं रहती, लेकिन आज तक इसका मुआवजा किसानों को नहीं मिल पाया है।
तटबंध हो दुरुस्त तो बने बात
गंगा का तटबंध लक्सर व खानपुर क्षेत्र में तीन जगह से क्षतिग्रस्त है। इसे ठीक कराने के लिए ग्रामीण लंबे समय से मांग करते आ रहे हैं। वहीं कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने भी तटबंध का हवाई सर्वे किया था, लेकिन आज तक तटबंध को दुुरुस्त नहीं कराया गया है। यदि तटबंधों को दुरुस्त करा दिया जाएगा तो किसानों की मुश्किलें काफी कम हो जाएगी।
दो लोगों की हो चुकी है मौत
जुलाई और अगस्त में दो किसानों की गंगा में डूबने के कारण मौत हो चुकी है। ये किसान गंगा का पार कर दूसरी ओर खेतों पर जा रहे थे। इस दौरान हादसे का शिकार हो गए थे। इसमें से एक दल्लावाला और दूसरा कलसिया गांव का रहने वाला है।
फसलों में भरे पानी की निगरानी की जा रही है। किसानों से इस बाबत जानकारी जुटाई जा रही है। यदि फसल बर्बाद होती है तो उच्चाधिकारियों से वार्ता करने के बाद सर्वे कराया जाएगा। इसके बाद नियमानुसार मुआवजा देने की कार्रवाई की जाएगी।
- विकेश यादव, मुख्य कृषि अधिकारी, हरिद्वार