उत्तराखंड : मानसून की बेरुखी ने मौसम विज्ञानियों को चौंकाया, आज जबरदस्त गर्मी पड़ने की संभावना
मौसम विज्ञानियों के मुताबिक राजधानी दून में वैसे तो आसमान साफ रहेगा, लेकिन आंशिक रूप से कहीं-कहीं बादल भी छा सकते हैं।
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मानसून ने राज्य में दस्तक बेशक दस दिन पहले दे दी हो, लेकिन हर साल की तरह इस बार मानसून मेें बारिश का वो नजारा नहीं दिखाई दे रहा है, जो अमूमन देखने को मिलता है। मानसून की बेरुखी देखकर मौसम विज्ञानी भी हैरान हैं।
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मौसम विभाग की रिपोर्ट में अगले 24 घंटे में उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, पिथौरागढ़ जैसे जिलों में कहीं-कहीं बहुत हल्की बारिश के साथ बौछार पड़ने की संभावना तो जताई गई है, लेकिन राज्य के बाकी जिलों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है।
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मौसम विज्ञानियों के मुताबिक राजधानी दून में वैसे तो आसमान साफ रहेगा, लेकिन आंशिक रूप से कहीं-कहीं बादल भी छा सकते हैं। वहीं, मौसम विज्ञानियों ने तापमान को लेकर जो भविष्यवाणी की है, उसके मुताबिक अगले 24 घंटे में लोगों को एक बार फिर जबरदस्त गर्मी का सामना करना पड़ेगा।
मौसम विज्ञानियों ने न्यूनतम तापमान 25 डिग्री तो अधिकतम तापमान 35 डिग्री तक पहुंचने की संभावना जताई है। ऐसे में एक बार फिर पारा चढ़ने के साथ ही लोगों को अगले 24 घंटे में गर्मी का सामना करना पड़ेगा।
कौन से हाईवे बंद और कौन से खुले
यमुनोत्री हाईवे कुथनौर के पास मलबा-बोल्डर आने से बंद था, जिसे बुधवार को खोल दिया गया है। बदरीनाथ हाईवे कर्णप्रयाग के समीप मंगलवार से बंद था, वह भी छोटे वाहनों के लिए खुल गया है। चमोली जिले में अभी भी 70 संपर्क मार्ग बंद हैं। मलारी हाईवे भी रैणी गांव के समीप बंद है। रुद्रप्रयाग-केदारनाथ राजमार्ग, ऋषिकेश-बदरीनाथ एवं रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राजमार्ग खुले हैं। ऋषिकेश-गंगोत्री मार्ग खुला हुआ है और सामान्य रूप से यातायात चल रहा है।
दो घंटे में बहाल हों सड़क, बिजली और पानी की सुविधा
प्रदेश में बरसात का सीजन शुरू होते ही संभावित आपदाओं के दृष्टिगत सभी विभागों को अलर्ट रहने को कहा गया है। जबकि एनएच, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई), लोनिवि, जल संस्थान और विद्युत विभाग के अधिकारियों को आपदा के दौरान दो घंटे के भीतर अपनी सेवाएं बहाल करने के निर्देश दिए गए।
विधानसभा में महत्वपूर्ण विभागों से जुड़े अधिकारियों की बैठक लेते हुए आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास राज्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड आपदा की दृष्टि से अति संवेदनशील है, जिसके मद्देनजर आपदा विभाग सहित तमाम रेखीय विभागों को 24 घंटे अलर्ट पर रहने की आवश्यकता है। खासकर एसडीआरएफ, पुलिस, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को हर समय चौकन्ना रहने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि राज्य में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए फिलहाल दो हेलीकॉप्टर किराये पर लिए गए हैं। एक की तैनाती पिथौरागढ़ में कर दी गई है, जबकि दूसरा हेलीकॉप्टर शीघ्र ही गौचर में तैनात कर दिया जाएगा।
बैठक में मौजूद अधिकारियों ने आपदा के दौरान सूचनाओं के आदान- प्रदान, त्वरित कार्रवाई, राहत और बचाव कार्यों के कुशल संचालन के लिए राज्य एवं जिला स्तर पर आधुनिक तकनीक और सुविधाओं से युक्त एक रिस्पांस सिस्टम तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया। जिसमें आपदा के दौरान आपदा प्रबंधन एवं विभागों के पास मौजूद उपकरणों, मानव संसाधनों एवं समस्याओं के निस्तारण की तकनीकी जानकारी तत्काल प्राप्त हो सके।
बैठक में अपर सचिव आपदा प्रबंधन सबिन बंसल, उप महानिरीक्षक एसडीआफएफ रिद्धिम अग्रवाल, महानिदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. तृप्ति बहुगुणा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीएमजीएसवाई एवं एमडी पेयजल निगम उदय राज सिंह, मुख्य अभियंता राष्ट्रीय राजमार्ग एसके बिरला, संयुक्त खाद्य आयुक्त पीएस पांगती, जीएम उत्तराखंड जल संस्थान आरके रोहिल्ला, एसके पाठक, अतुल कुमार, एनएस बिष्ट, के. मेहता, बीके यादव, अमित जोशी आदि अधिकारी उपस्थित रहे।