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कुदरत ने बख्शी, अब सरकार भी नेमत बख्शे
चंद्रेश पांडे, अमर उजाला, हल्द्वानी
Updated Thu, 17 May 2018 12:32 PM IST
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उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने बुधवार को कुमाऊं के छह पर्यटक स्थलों को विकसित करने का फैसला किया है। ये पर्यटक स्थल वे हैं जिन्हें किसी पहचान की दरकार नहीं है। सरकार अपने वादे पर खरी उतरी तो इन स्थलों के दिन भी बदल जाएंगे।
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मुक्तेश्वर (नैनीताल) : नैनीताल जिला मुख्यालय से 52 किलोमीटर दूर स्थित है मुक्तेश्वर। यहां मुक्तेश्वर महादेव मंदिर, भारतीय पशु अनुसंधान संस्थान, केंद्रीय शीतोष्ण बागवानी संस्थान, चौली की जाली, फलों के बगीचे आदि आकर्षण के केंद्र हैं। यहां स्थित डाकबंगले से हिमालय का विहंगम नजारे को देखा जा सकता है। साल में दो लाख से अधिक सैलानी यहां पहुंचते हैं।
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समस्या : सार्वजनिक शौचालयों और का यहां अभाव है। मौसम आधारित पर्यटन का विकास नहीं हुआ
कटारमल (अल्मोड़ा) : अल्मोड़ा से 16 किलोमीटर दूर स्थित कटारमल में कत्यूरी शासन में स्थापित प्राचीन सूर्य मंदिर समूह है जिसकी स्थापना 10वीं से 12वीं सदी के मध्य हुई। मंदिर की स्थापना कत्यूरी शासक कटारमल ने की थी। इस सूर्य मंदिर है जिसकी मान्यता उत्तर भारत के प्रमुख सूर्य मंदिरों में है।
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समस्या : मूलभूत सुविधाओं का अभाव, यह मंदिर अल्मोड़ा-रानीखेत रोड से चार किलोमीटर भीतर की ओर है जहां पहुंचने के लिए अभी भी ऊबड़ खाबड़ और कच्ची सड़क है। ऐसे में चाहकर भी सैलानी यहां नहीं पहुंचते हैं।
गूलरभोज (ऊधमसिंह नगर) : ऊधमसिंह नगर जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर स्थित गूलरभोज में 1260 हेक्टेयर में फैले जलाशय की लंबाई साढ़े नौ किलोमीटर है। इस जलाशय में प्रवासी पक्षी आते हैं बल्कि यहां हर साल साहसिक खेल प्रतियोगिताएं भी होती हैं।
समस्या : जलाशय में साहसिक खेलों को बढ़ावा देने की अपार संभावनाएं हैं। जलाशय तक पहुंचने के लिए उचित मार्ग और मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। साल में हजारों सैलानी यहां पहुंचते हैं।
मोस्टमानू (पिथौरागढ़) : पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय से छह किलोमीटर दूर स्थित मोस्टमानू में प्राचीन शिव मंदिर है। चंडाक से लगभग एक किलोमीटर दूर होने के कारण चंडाक आने वाले अधिकतर सैलानी मंदिर में पूजा अर्चना को पहुंचते हैं।
समस्या : सभी बुनियादी सुविधाओं की कमी
गरुड़वैली (बागेश्वर) : बागेश्वर जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर स्थित गरुड़वैली में बैजनाथ मंदिर है। इस मंदिर की स्थापना कत्यूरी शासकों ने की थी। गरुड़ वैली क्षेत्र धान की पैदावार के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां साल में दस हजार से अधिक सैलानी पहुंचते हैं।
समस्या : गरूड़वैली क्षेत्र को मूलभूत सुविधाओं की दरकार है।
देवीधूरा (चंपावत) : जिला मुख्यालय से 59 किलोमीटर दूर देवीधूरा पाटी ब्लाक में है। यहां बाराही धाम मंदिर है जहां रक्षाबंधन से एक हफ्ता पहले धार्मिक मेला लगता है और रक्षाबंधन के दिन विश्व प्रसिद्ध बग्वाल खेली जाती है। बग्वाल को देखने के लिए लाखों देशी विदेशी सैलानी पहुंचते हैं।
समस्या : मेले के बाद यहां गिने चुने सैलानी ही आते है। जाड़ों में हिमपात को देखने भी यहां सैलानी पहुंचते है।