छात्रों ने बनाई बेमिसाल कार, हर जगह हुई वाहवाही
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अखिल भारतीय स्तर पर यूआईईटी कॉलेज पंजाब विवि की ओर से चंडीगढ़ में आयोजित ईएफएफआई कार डिजाइन प्रतियोगिता में हल्द्वानी (उत्तराखंड) के नितिन की टीम की कार का मॉडल अव्वल रहा।
सात सदस्यीय इस टीम ने ईको फ्रेंडली कार तैयार की है। टीम को एक लाख रुपये का पुरस्कार दिया गया है। नितिन की टीम में हल्द्वानी के ही रितेश और प्रशांत के अलावा चार विद्यार्थी कानपुर और बिहार के शामिल थे। हल्द्वानी निवासी संजीव दुआ के पुत्र नितिन दुआ, आरसी गुप्ता के पुत्र रितेश गुप्ता एवं आरसी बिनवाल के पुत्र प्रशांत बिनवाल रुड़की आईआईटी में इंजीनियरिंग कर रहे हैं।
इनके साथ कानुपर के उत्कर्ष कसेरा, बिहार के सुमित सुमन, अंकित राज और पुष्पक भी सहपाठी हैं। जुलाई 2015 में इस टीम ने अपने मॉडल का प्रस्तुतीकरण किया। मॉडल ओके होने के बाद उन्हें कार को स्वरूप देने को कहा गया। प्रतियोगिता में लगभग देशभर के विभिन्न कालेजों से तीन सौ टीमों ने अपने मॉडल का प्रस्तुतीकरण दिया था, जिसमें 36 का चयन हुआ था।
22 जनवरी से 24 जनवरी तक चली प्रतियोगिता में तकनीकी परीक्षण में 13 टीमें और बाहर हो गईं। फाइनल राउंड तक महज 23 टीमें ही पहुंच सकी। रविवार (24 जनवरी) को नितिन की टीम की कार के मॉडल को सर्वश्रेष्ठ चुना गया। सिटी रन ट्रैक का चक्कर कम समय में पूरा करने पर भी टीम को पुरस्कृत किया गया। टीम सितंबर 2015 से ही कार बनाने में जुट गई थी।
ये हैं कार की खासियत
खासियतें
850 वॉट की मोटर, टू सीटर, सामान सहित 500 किलो तक भार उठा सकती है।
सात से आठ घंटे में बैटरी से चार्ज हो जाती है और 120 किलोमीटर चलती है।
एक बार चार्ज करने पर सात से आठ यूनिट बिजली खर्च होती है।
छोटी होने के साथ आसानी से पार्क हो सकती है।
टीम में किसने क्या योगदान दिया
नितिन और प्रशांत ने बनाया पावर ट्रांसमिशन।
रितेश ने तैयार किया सस्पेंशन सिस्टम।
सुमित ने बनाई बाडी (रोल केज)।
उत्कर्ष ने बनाया स्टेयरिंग।
अंकित एवं पुष्पक ने बनाया इलेक्ट्रिकल सिस्टम।