यूकेएसईई काउंसिलिंग सवालों के घेरे में, बिना बताए कर सीटों का आवंटन
उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय की उत्तराखंड स्टेट एंट्रेंस एग्जामिनेशन (यूकेएसईई) काउंसिलिंग सवालों के घेरे में आ गई है। काउंसिलिंग बोर्ड के सदस्यों का कहना है कि उन्हें बिना बताए ही सीटों का आवंटन कर दिया गया, जबकि विवि के कुलपति का कहना है कि काउंसिलिंग में सदस्यों की जरूरत नहीं है।
तकनीकी विवि ने एक से तीन अप्रैल के बीच बीफार्मा, बीएचएमसीटी, एमबीए, एमसीए जैसे कोर्सेज में दाखिले को यूकेएसईई काउंसिलिंग आयोजित कराई। काउंसिलिंग में नियमानुसार राज्य सरकार की ओर से गठित नौ सदस्यीय काउंसिलिंग बोर्ड के कम से कम 50 प्रतिशत सदस्यों का उपस्थित होना जरूरी थी।
लेकिन यहां न तो विवि के परीक्षा नियंत्रक को इसकी जानकारी मिली और न ही कुलसचिव को। काउंसिलिंग बोर्ड में विवि के कुलपति चेयरमैन और परीक्षा नियंत्रक, कुलसचिव व तीनों संघटक कॉलेजों के निदेशक सदस्य होते हैं। एक सदस्य शासन द्वारा नामित भी होता है। आरोप है कि इन सभी सदस्यों को काउंसिलिंग की जानकारी ही नहीं मिल पाई। इससे विवि की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
बीटेक का सीट आवंटन भी सवालों में
बीटेक की पहले चरण की काउंसिलिंग भी सवालों में है। राज्य सरकार की ओर से जारी शासनादेश के मुताबिक सीटों के बंटवारे में नियमानुसार 85 प्रतिशत स्टेट कोटा और 15 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा होना चाहिए जबकि यहां 90 प्रतिशत स्टेट कोटा और 10 प्रतिशत सीटें ऑल इंडिया कोटे में दी गई हैं।
द्वारा इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक एवं बोर्ड के सदस्य डा. आरके सिंह का कहना है कि काउंसिलिंग कब हुई, कैसे हुई, कैसे सीट आवंटन हुई, हमें इसकी कोई जानकारी नहीं है। विवि को काउंसिलिंग से पहले सूचना भेजनी चाहिए थी। नियम के हिसाब से काउंसिलिंग बोर्ड के 50 प्रतिशत सदस्यों का काउंसिलिंग के दौरान मौजूद रहना जरूरी है।
यूटीयू के कुलपति प्रो. पीके गर्ग ने कहा कि काउंसिलिंग से पहले नियमानुसार बैठक बुलाई गई थी। काउंसिलिंग में किसी भी बोर्ड सदस्य के मौजूद रहने की जरूरत नहीं है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। नियमानुसार सीटों का आवंटन किया गया है। बीटेक की काउंसिलिंग में भी नियमों का पूर्ण पालन किया गया है।