उत्तराखंड छात्रवृत्ति घोटाला : सीवी रमन इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर समेत दो पर हुई कार्रवाई
- छात्रवृत्ति के 12 लाख हड़पे
- पौड़ी के 34 उच्च शिक्षण संस्थानों की एसआईटी जांच में पकड़ में आया मामला
विस्तार
छात्रवृत्ति घोटाला मामले में पौड़ी जिले की एसआईटी टीम ने कोटद्वार क्षेत्र में पूर्व में संचालित सीवी रमन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी पदमपुर सुखरो के डायरेक्टर समेत हरिद्वार के एक बिचौलिए के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। छात्रवृत्ति घोटाले पर पौड़ी जिले में हुई एसआईटी जांच में यह बात सामने आई कि इस इंस्टीट्यूट ने छात्रवृत्ति के 12 लाख हड़पे।
बुधवार को कोतवाली में मीडिया से वार्ता में अपर पुलिस अधीक्षक प्रदीप कुमार रॉय ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेशों के अनुपालन में एससी/एसटी/ओबीसी वर्ग को छात्रवृत्ति वितरण में बरती गई अनियमितताओं की जांच के लिए एसएसपी पौड़ी दलीप सिंह कुंवर के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया था। टीम ने जनपद के 34 उच्च शिक्षण संस्थानों की जांच की।
एसआईटी टीम ने समाज कल्याण विभाग की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर कोटद्वार के उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत दर्शाए गए एससी/एसटी/ओबीसी छात्रों का भौतिक सत्यापन किया।
जांच में वर्ष 2004-12 तक संचालित सीवी रमन इंस्टीट्यूट टेक्नोलॉजी, पदमपुर सुखरो में भारी अनियमितताएं पाई गई। संस्थान द्वारा समाज कल्याण विभाग पौड़ी से छात्रवृत्ति आवंटित कराकर राज्य सरकार के 12 लाख हड़पने और सरकारी धन के दुरुपयोग की बात सामने आई।
इस तरह पकड़ में आया था मामला
एएसपी प्रदीप राय ने बताया कि मामले में संस्थान के डायरेक्टर अनिल परिहार निवासी सत्तीचौड़ कोटद्वार और बिचौलिया बृजपाल सिंह निवासी ग्राम टांडा हसनगढ़ थाना भगवानपुर जनपद हरिद्वार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। बिचौलिया बृजपाल सिंह तब संस्थान में ही अध्ययनरत था।
एसआईटी ने जांच के दौरान वर्ष 2004-12 तक संचालित सीवी रमन इंस्टीट्यूट टेक्नोलॉजी, पदमपुर सुखरो में अध्ययनरत 38 छात्रों में से 32 छात्रों का सत्यापन किया। सत्यापन के दौरान कुछ छात्रों के खाते गलत पाए गए। अमूमन बैंक खाते में खाताधारक का खाता नंबर 12 से 16 अंकों का होता है, जबकि संस्था के दस्तावेजों में दर्ज खाता नंबर में महज 4 से पांच अंक ही पाए गए।
जांच में कुछ छात्रों के खाते दूसरे नाम से पाए गए। दस्तावेजों में कुछ छात्रों का समाज कल्याण विभाग से प्राप्त सूची में पता एवं खाता संख्या अंकित ही नहीं किया गया था। जांच में कुल 32 छात्रों को आवंटित छात्रवृत्ति में अनियमितता पाई गई। मात्र दो छात्रों को ही छात्रवृत्ति के रूप में केवल 12-12 हजार प्राप्त हुए, जबकि सात छात्रों को छात्रवृत्ति के रूप में कोई धनराशि प्राप्त नहीं हुई। नियमानुसार प्रति छात्र 32 हजार 500 की छात्रवृत्ति दी जानी थी।