नई बसों को खरीदने का रास्ता साफ, तकनीकी जांच में अशोक लेलैंड की 150 बसें पास
परिवहन निगम की ओर से अशोक लेलैंड कंपनी से खरीदी जाने वाली 150 बसें सीआईआरटी पुणे के तकनीकी विशेषज्ञों की जांच में खरी उतरी हैं। इससे बसों की खरीद का रास्ता साफ हो गया है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि बसें जल्द बेड़े में शामिल होंगी।
परिवहन निगम प्रबंधन ने अशोक लेलैंड से 150 बसें खरीदी हैं। इन बसों को निगम के तकनीकी विशेषज्ञों की जांच रिपोर्ट के आधार पर खरीदा जाना था। लेकिन टाटा कंपनी से खरीदी गई बसों में खामियां उजागर होने के बाद निगम के प्रबंध निदेशक रणवीर सिंह चौहान ने इन बसों की तकनीकी जांच सीआईआरटी के विशेषज्ञाें से कराने का निर्णय लिया।
सीआईआरटी पुणे और परिवहन निगम के तकनीकी विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने कंपनी के अलवर प्लांट में जाकर दो दिन बसों की जांच की। इसमें सभी बसें मानकों पर खरी पाई गईं हैं। विशेषज्ञ जल्द रिपोर्ट परिवहन निगम को सौंपेंगे। उसके बाद खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
उम्मीद है कि इसी माह बसों को सड़कों पर उतार दिया जाएगा। आंकड़ाें पर नजर डालें तो परिवहन निगम के बेड़े में फिलहाल 1364 बसें हैं। बसों की भारी कमी को देखते हुए परिवहन निगम प्रबंधन ने 300 बसें खरीदी हैं। जिसमें 150 बसें टाटा और 150 अशोक लेलैंड से खरीदी गई हैं।
डिस्प्ले बोर्ड पीछे करने का दिया सुझाव
विशेषज्ञों ने जांच के दौरान बसोें के डिस्प्ले बोर्ड को थोड़ा आगे पाया। जिस पर विशेषज्ञों ने कंपनी को सुझाव दिया कि इसे थोड़ा और पीछे किया जाए। ताकि चालकों को बसें चलाने में आसानी हो। ब्रेकेट को भी दुरुस्त करने का सुझाव दिया है। विशेषज्ञों का खास फोक्स गियर लीवर पर रहा।
75 करोड़ से खरीदी जा रही 300 बसें
टाटा व अशोक लेलैेंड से खरीदी जा रही 300 बसों के लिए प्रबंधन 75 करोड़ का लोन लेने जा रहा है। लोन प्रक्रिया तो पहले शुरू की थी। लेकिन जैसे ही टाटा कंपनी की बसों में गियर लीवर समेत तमाम खामियां उजागर हुई तो प्रबंधन ने लोन प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी।
एक बार फिर नहीं भेजे गए चालक
बता दें कि टाटा बसों में उजागर खामियाें के बाद परिवहन निगम ने फैसला लिया था कि बसों की जांच करते समय चालकों की टीम को भेजा जाएगा। लेकिन चालकों को अशोक लेलैंड कंपनी नहीं भेजा गया।
500 बसें और खरीदे प्रबंधन
परिवहन निगम कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि परिवहन निगम प्रबंधन को 500 और बसें खरीदनी होगी। कारण कि इन 300 बसों से कुछ नही होने वाला है। परिवहन निगम के बेड़े से हर साल 180 बसें बाहर हो रही है। ऐसे में साल दर साल बसें कम हो रही है। निगम में कम से कम 2000 बसों की जरूरत है। जबकि वर्तमान में सिर्फ 1364 बसें ही है।
- अशोक चौधरी, प्रदेश महामंत्री , उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन
अशोक लेलैेंड से खरीदी जाने वाली बसों की तकनीकी जांच पूरी कर ली गई है। जांच में बसें तमाम निर्धारित मानकों पर खरी पायी गई हैं। डिस्प्ले बोर्ड थोड़ा आगे था जिसेे और पीछे करने को कहा गया है। इसके अलावा बस तमाम मानकों पर खरी उतरी है। उम्मीद है कि कंपनी द्वारा 150 बसों की आपूर्ति जल्द की जाएगी। जिसकी प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।
- दीपक जैन , महाप्रबंधक परिवहन निगम