फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Uttarakhand Power corporation Employees Will not Get Unlimited Electricity Facility Now

उत्तराखंड: ऊर्जा निगमों के हजारों कर्मचारियों और पेंशनरों को लगेगा झटका, अब नहीं मिलेगी ये सुविधा

Fri, 15 Nov 2019 10:02 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल/देहरादून 
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल/देहरादून  Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 15 Nov 2019 10:02 AM IST
सार

  • ऊर्जा निगमों के कर्मचारियों को नहीं मिलेगी असीमित बिजली की सुविधा
  • यूपीसीएल ने शपथपत्र दाखिल कर दी जानकारी, कोर्ट ने पूरा ब्योरा मांगा
  • सचिव ऊर्जा, पिटकुल, यूजेवीएनएल को दिया 25 नंवबर तक का समय

विज्ञापन
Uttarakhand Power corporation Employees Will not Get Unlimited Electricity Facility Now
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

यूपीसीएल, यूजेवीएनएल और पिटकुल के उन हजारों कर्मचारियों और पेंशनरों को जोर का झटका लग सकता है, जिन्हें सस्ती दरों पर असीमित बिजली की खपत की सुविधा दी जा रही है। हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यूपीसीएल ने शपथपत्र पेश कर कहा कि तीनों निगमों में दी जा रही बिजली को सीमित किया जा रहा है और अब सस्ती बिजली नहीं दी जाएगी। 

विज्ञापन


राज्य के ऊर्जा निगमों के अधिकारी और कर्मचारियों को सस्ती बिजली देने और आम जनता के लिए बिजली की दरों को बढ़ाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर बृहस्पतिवार को मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई हुई।
विज्ञापन


देहरादून के आरटीआई क्लब की इस जनहित याचिका पर कोर्ट ने सचिव ऊर्जा, पिटकुल और तीनों निगमों को आदेश दिए कि वे अफसर-कर्मी और पेंशनरों को दी जा रही बिजली का संपूर्ण ब्योरा 25 नवंबर तक पेश करें। याचिकाकर्ता के वकील बीपी नौटियाल के मुताबिक, यूपीसीएल ने कोर्ट में कहा है कि 18 नवंबर को निदेशक मंडल की बैठक में असीमित बिजली खपत की सुुविधा को सीमित करने के संबंध में फैसला ले लिया जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

65 से 425 रुपये आता है बिजली कर्मियों का बिल

देहरादून के आरटीआई क्लब ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि सरकार ऊर्जा निगम में तैनात अधिकारियों से एक माह का बिल मात्र 65 से 425 रुपये ले रही है, जबकि इनका बिल लाखों में आता है और इसका बोझ सीधे जनता पर पड़ रहा है। याचिकाकर्ता का कहना था कि तमाम अधिकारियों के घर बिजली के मीटर तक नहीं लगे हैं और जो लगे भी हैं, वह खराब स्थिति में हैं।

कॉरपोरेशन ने वर्तमान कर्मचारियों के अलावा रिटायर और उनके आश्रितों को भी बिजली मुफ्त में दी है। याचिका में कहा कि उत्तराखंड ऊर्जा प्रदेश घोषित है और यहां हिमाचल से महंगी बिजली है, जबकि वहां बिजली का उत्पादन तक नहीं होता है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पिटकुल और यूपीसीएल के कार्मिकों को दी जा रही बिजली का संपूर्ण डाटा 25 नवंबर को पेश करने के आदेश सचिव ऊर्जा, पिटकुल और यूजेवीएनएल के अधिकारियों को दिए हैं।

बिजली कितनी भी खर्चें, बिल ये आता है

कर्मचारी श्रेणी        मासिक दर (रुपये में) 
चतुर्थ श्रेणी            65 
तृतीय श्रेणी            100
जेई व उसके समान    180
एई/ईई व उसके समान    250
डीजीएम व उसके समान    350
जीएम व उससे ऊपर        425
नोट: 2009 से लागू दरें अब तक रिवाइज नहीं हुई
सोर्स: आरटीआई क्लब का शिकायत पत्र

यूपीसीएल में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं हैं, जिनका खामियाजा महंगी बिजली के रूप में आम उपभोक्ताओं को चुकाना पड़ता है। क्लब की ओर से याचिका में वित्तीय कुप्रबंधन और अनियमितता के मसले उठाए गए हैं। हम चाहते हैं कि उच्च न्यायालय की निगरानी में इनकी एक उच्चस्तरीय जांच हो।
- बीपी मैठाणी, अध्यक्ष, आरटीआई क्लब

यूपीसीएल की ओर से उच्च न्यायालय में जवाब दाखिल कर दिया गया है। अफसरों और कर्मचारियों को दी जा रही बिजली सुविधा के बारे में सरकार और निगम के स्तर पर विचार चल रहा है। सभी पक्षों से बात करके इस पर निर्णय लिया जाएगा।
- बीसीके मिश्रा, प्रबंध निदेशक, यूपीसीएल

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed