उत्तराखंडः भाजपा की चिंतन और कार्यसमिति की बैठक स्थगित, मंत्रिमंडल गठन के बाद तय होंगी तारीख
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उत्तराखंड भाजपा ने शुक्रवार से होने वाली चिंतन बैठक और उसके बाद प्रस्तावित प्रदेश कार्यसमिति की बैठक एक बार फिर टाल दी है। अब ये दोनों प्रमुख बैठकें प्रदेश में कैबिनेट के गठन के बाद होंगी। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बंशीधर भगत ने इसकी पुष्टि की है।
ऐसा दूसरी बार है जब प्रदेश संगठन को चिंतन बैठक टालनी पड़ी। इससे पहले पार्टी ने रामनगर के पास मर्चूला में 19 फरवरी से चिंतन बैठक रखी। सात फरवरी को चमोली जिले के रैणी में ऋषिगंगा में बाढ़ आने के बाद पार्टी ने इसे स्थगित कर दिया था।
इसके बाद पार्टी ने देहरादून में 12 से 13 मार्च तक चिंतन बैठक और 13 मार्च से 14 मार्च तक प्रदेश कार्यसमिति की बैठक करने का फैसला किया था। पार्टी स्तर पर इसकी तैयारियां भी शुरू गई थी। लेकिन मुख्यमंत्री पद से त्रिवेंद्र सिंह रावत को बदलने और नए मुख्यमंत्री की ताजपोशी के कारण पार्टी को दोनों अहम बैठकों को टालना पड़ा।
कैबिनेट गठन के बाद होगी बैठकें
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत के मुताबिक, हालात को देखते हुए स्थगित की गई चिंतन बैठक और प्रदेश कार्यसमिति की बैठक अब कैबिनेट के गठन के बाद होंगी। इसके बाद जिलों व मंडलों की कार्यसमितियों की बैठकें भी होंगी।
2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की रणनीति को लेकर भाजपा चिंतन बैठक का आयोजन कर रही है। अब इस बैठक उसे न सिर्फ सल्ट विधानसभा के उपचुनाव पर ही मंथन नहीं करना होगा। उसे मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के लिए सुरक्षित सीट के बारे में सोच विचार करना पड़ेगा। इतना ही नहीं उनके मुख्यमंत्री बनने से गढ़वाल संसदीय सीट भी खाली हो जाएगी। इस सीट पर चुनाव 2022 के विधानसभा चुनाव के साथ होने की संभावना है। इस लिहाज से पार्टी को चिंतन बैठक में नए सिरे से मंथन करना पड़ेगा।
तीरथ सिंह रावत के लिए विधानसभा सीट की खोज भी शुरू
नए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के लिए अब विधानसभा सीट की खोज भी शुरू हो गई है। सोशल मीडिया में उठे हंगामे के बीच चौबट्टाखाल विधायक सतपाल महाराज ने साफ इनकार कर इन चर्चाओं को और हवा दे दी है। इसी के साथ अब भाजपा को गढ़वाल लोकसभा सीट के लिए भी चेहरे की तलाश करनी होगी।
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भाजपा ने प्रदेश के किसी अपने विधायक की बजाय गढ़वाल सांसद तीर्थ सिंह रावत को मुख्यमंत्री बनाना स्वीकार कर एक साथ दो और उपचुनावों के लिए रास्ता खोल दिया है। भाजपा के तेज तर्रार विधायक सुरेंद्र सिंह जीना के निधन के कारण सल्ट सीट पर उपचुनाव अभी लंबित हैं। ऐसे में प्रदेश में अब विधानसभा चुनाव से पहले तीन उपचुनावों की भूमिका बन रही है।
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अब सियासी गलियारे में नए मुख्यमंत्री के लिए विधानसभा सीट की तलाश भी शुरू हो गई है। पार्टी नेेताओं की मानें तो नए मुख्यमंत्री के लिए सीट का चयन कई समीकरणों पर निर्भर करेगा। अभी मंत्रिमंडल का गठन होना है। इसके साथ ही पार्टी को लोक सभा के लिए प्रत्याशी भी चुनना है।
विकल्प 1:
मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की कर्मस्थली पौड़ी जिला ही रहा है। ऐसे में चौबट्टाखाल की सीट उनके लिए मुफीद मानी गई। कहा गया कि सतपाल महाराज इस सीट को छोड़ेंगे और उन्हें लोकसभा भेजा जाएगा। हालांकि खुद सतपाल महाराज ने इससे साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा है कि इस तरह का कोई फैसला नहीं हुआ है। वे चौबट्टाखाल के विधायक हैं और रहेंगे।
विकल्प 2:
पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत डोईवाला की सीट छोड़ें और खुद पौड़ी गढ़वाल से लोकसभा का उपचुनाव लड़ें। अभी इस विकल्प की कोई पुष्टि नहीं हुई है और न ही पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस तरह का कोई संकेत दिया है। हालांकि त्रिवेंद्र सिंह रावत को बड़ी जिम्मेदारी देने की बात भी की जा रही है।
विकल्प 3:
सल्ट से मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत चुनाव लड़ें। भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह जीना के निधन के कारण यह सीट खाली हुई थी और इस सीट पर उपचुनाव जल्द होने की संभावना है। भाजपा इस सीट को मुख्यमंत्री के लिहाज से सुरक्षित नहीं मान रही है। ऐसे में संभावना है कि इस सीट के उपचुनाव में भाजपा किसी दूसरे चेहरे को ही समाने लाए।
विकल्प 4:
पौड़ी गढ़वाल में ही सीट खाली कराएं। एक विकल्प यह भी है कि नए मुख्यमंत्री के लिए भाजपा को सारे समीकरण टटोलने होंगे और उपचुनाव को भी गंभीरता से लेना होगा। यह इस पर भी निर्भर करता है कि तीरथ के लिए कौन विधायक सीट खाली करने के लिए तैयार होगा।
चौबट्टाखाल विधानसभा सीट को नहीं छोड़ूंगा : महाराज
पौड़ी जिले के चौबट्टाखाल विधानसभा से विधायक एवं पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि पौड़ी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने का सवाल नहीं बनता है और न ही वे चौबट्टाखाल सीट को छोड़ेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया पर पौड़ी सीट से लोकसभा चुनाव लड़ने की चर्चाओं पर विराम लगाया है।
महाराज ने सोशल मीडिया में चौबट्टाखाल विधानसभा सीट खाली कर पौड़ी लोकसभा चुनाव लड़ने की बात को आधारहीन बताया है। उन्होंने कहा कि फिलहाल उनका ऐसा कोई इरादा नहीं है। चौबट्टाखाल विधानसभा सीट छोड़ कर पौड़ी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की बात निराधार है।
उन्होंने कहा कि चौबट्टाखाल की जनता का स्नेह और प्यार उन्हें निरंतर मिलता रहा है और आगे भी यूं ही मिलता रहेगा। इसलिए चौबट्टाखाल विधानसभा सीट को छोड़ने का प्रश्न ही नहीं होता।
बता दें कि तीरथ सिंह रावत के मुख्यमंत्री बनने के बाद इस बात कयास लगाए जा रहे हैं कि वे विधानसभा चुनाव किस सीट से लड़ेंगे। सोशल मीडिया पर चर्चा है कि महाराज चौबट्टाखाल की सीट खाली कर पौड़ी से लोकसभा चुनाव लड़ेंगे।
वर्ष 2012 में तीरथ सिंह ने चौबट्टाखाल से विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक बने थे। वर्ष 2016 में महाराज के भाजपा में शामिल होने के बाद वर्ष 2017 के चुनाव में तीरथ सिंह रावत का इस सीट से टिकट कट गया था।