उत्तराखंड: तो क्या सल्ट से चुनाव लड़ेंगे तीरथ सिंह रावत, सीएम बनने वाले हैं पांचवें सांसद
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उत्तराखंड में सबको चौंकाते हुए पौड़ी गढ़वाल सांसद तीरथ सिंह रावत उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बन गए। सीएम बनने के बाद तीरथ को अगले छह माह के अंदर ही विधानसभा की सदस्यता लेनी होगी। इसके लिए उन्हें उत्तराखंड की किसी विधानसभा सीट से उपचुनाव जीतना होगा। फिलहाल उत्तराखंड में सल्ट विधानसभा सीट खाली है। कयास हैं कि भाजपा के किसी नेता को विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिलाने की बजाय तीरथ सिंह रावत को सल्ट से भी विधानसभा का चुनाव लड़ाया जा सकता है।
सल्ट सीट भाजपा के ही विधायक सुरेंद्र सिंह जीना के निधन के बाद खाली हुई थी। इस सीट पर जल्द ही विधानसभा का उपचुनाव होने वाला है। यहां से भाजपा के स्थानीय नेता चुनाव लड़ने की तैयारी भी कर रहे हैं। ताजा सियासी घटनाक्रम के बाद अनुमान लगाया जा रहा है कि भाजपा तीरथ सिंह रावत को इस सीट से उम्मीदवार बना सकती है। इसके अहम कारण भी हैं। पहला यह कि सल्ट विधानसभा सीट पौड़ी गढ़वाल लोकसभा सीट से एकदम सटी हुई है।
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इसलिए यहां के लिए तीरथ रावत जाना पहचाना नाम हैं। दूसरा अगर इस सीट से भाजपा की ओर से सीएम चुनाव लड़ेंगे तो इस सीट से पार्टी की जीत भी लगभग तय मानी जाएगी। साथ ही तीरथ सिंह को चुनाव लड़वाने के लिए किसी विधायक से सीट भी खाली नहीं करवानी होगी। यही नहीं जातीय आधार पर देखें तो सल्ट विधानसभा सीट ठाकुर मतदाता बहुल सीट है। ऐसे में ठाकुर सीएम का यहां से जीतना आसान होगा।
सीएम बनने वाले पांचवें सांसद
एक अहम कारण यह भी है कि राज्य गठन से पहले से लेकर आज तक यह विधानसभा सीट विकास के मामले में पिछड़ी रही जबकि यहां पर विकास की काफी संभावनाएं हैं। सल्ट विधानसभा सीट से होकर ही रामनगर से गैरसैंण, कर्णप्रयाग के लिए सड़क है।
अगर यहां से स्वयं सीएम विधायक बनते हैं तो इस क्षेत्र का विकास के मामले में भी कुछ भला होने के आसार हैं। अब देखना यह है कि भापजा नेतृत्व सीएम को विधानसभा का सदस्य बनाने के लिए कहां से चुनाव लड़वाती है।
वहीं, आपको बता दें कि तीरथ रावत से पहले चार सांसद उत्तराखंड के सीएम बन चुके हैं। इनको विधानसभा सदस्य बनने के लिए बाद में उपचुनाव लड़ना पड़ा था। इस परंपरा की शुरुआत 2002 में तत्कालीन सीएम एनडी तिवारी ने की थी। वह नैनीताल से लोकसभा के सांसद थे। सीएम बनने के बाद उन्होंने रामनगर विधानसभा सीट से उपचुनाव जीता था। इसी तरह पौड़ी गढ़वाल से ही सांसद रह चुके भुवन चंद्र खंडूड़ी राज्य का सीएम बनने के बाद धूमाकोट से विधायक बने।
इसके बाद टिहरी से सांसद विजय बहुगुणा जब कांग्रेस की ओर से सीएम बने तो उन्होंने सितारगंज से विधानसभा का चुनाव जीता था। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत जब सीएम बने तब उन्होंने धारचूला से विधानसभा का चुनाव जीता था। उनके लिए पार्टी के ही विधायक हरीश धामी ने सीट छोड़ी थी।