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उत्तराखंड: एसटीएफ ने झारखंड और राजस्थान से 14 साइबर ठगों को दबोचा, दो ने डीजीपी की फर्जी फेसबुक आईडी से मांगे थे रुपये
Sun, 27 Jun 2021 08:56 PM IST
अलका त्यागी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: अलका त्यागी
Updated Sun, 27 Jun 2021 08:56 PM IST
सार
जांच के दौरान यह पाया गया कि इस प्रकार के अपराध मेवात क्षेत्र, पलवल व नूह ( हरियाणा) एवं भरतपुर व अलवर ( राजस्थान ) एवं जामतारा (झारखण्ड) क्षेत्र से संचालित हो रहे है ।
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आरोपियों को लेजाती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
डीजीपी अशोक कुमार की फर्जी फेसबुक आईडी बनाने वाले को एसटीएफ ने भरतपुर (राजस्थान) से गिरफ्तार किया है। एसटीएफ को आरोपी का 2200 किलोमीटर विजयवाड़ा हैदराबाद तक पीछा करना पड़ा। इसके अलावा एसटीएफ ने 15 दिन के ऑपरेशन में साइबर ठगों के गढ़ जमतारा (झारखंड), भरतपुर (राजस्थान), मेवात (हरियाणा) से कुल 14 आरोपियों को पकड़ा है। ये सभी प्रदेश के अलग-अलग जिलों में दर्ज मामलों से संबंधित हैं।
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डीआईजी एसटीएफ डॉ. निलेश आनंद भरणे और एसएसपी अजय सिंह ने पत्रकार वार्ता में बताया कि गत 15 जून को शहर कोतवाली में डीजीपी अशोक कुमार की फर्जी फेसबुक आईडी बनाने का मामला दर्ज हुआ था। इसके बाद मुख्यालय ने आरोपियों की धरपकड़ के लिए आठ टीमों का गठन किया था। इसके तहत 200 पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों की टीमें साइबर ठगों के गढ़ों में गईं।
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डीजीपी वाले मामले में सामने आए मोबाइल नंबर के बारे में पता चला कि यह भरतपुर राजस्थान में चल रहा है। इसकी आईडी किसी रामलखन निवासी लखीमपुर खीरी के नाम पर है। वहां जाकर मालूम हुआ कि उनके गांव में राशन कार्ड बनाने वाली एक टीम आई थी, जिसने गांव वालों के अंगूठे मशीनों पर लगवाए और आईडी ली थी। इस मामले में फेसबुक से भी जानकारी ली गई। यह आईडी भरत में किसी शेर मोहम्मद के नाम से संचालित हो रही थी।
शेर मोहम्मद के बारे में पता चला कि उसकी मृत्यु अप्रैल में हो चुकी है। शेर मोहम्मद के दामाद इरशाद निवासी जुरूहेरा, भरतपुर इस आईडी के माध्यम से लोगों की आईडी बनाकर उन्हें ठगता है। शेर मोहम्मद का दूसरा दामाद अरशद और बेटा जाहिद भी उसके साथ मिले हुए हैं। इस पर एसटीएफ ने जाहिद को गिरफ्तार कर लिया। जाहिद ने बताया कि इरशाद मालवाहक ट्रॉले से हैदराबाद गया है। इस पर एसटीएफ भी उसके पीछे 2200 किलोमीटर तक हैदराबाद जा पहुंची। मगर, इरशाद वहां से निकलकर भरतपुर आ गया। यहां उसे एक टीम ने गिरफ्तार कर लिया।
12वीं तक पढ़ा है इरशाद
इरशाद केवल 12वीं पास है। उसने पुलिस को बताया कि उसके गांव में बहुत लोग इस तरह के काम करते हैं। वे साइबर ठगी के अन्य माध्यमों से भी लोगों को ठगते हैं। इसके लिए पुराने लोग उन्हें बाकायदा स्कूलों में ट्रेनिंग देते हैं। जैसे-जैसे लोग पुराने होते जाते हैं, उनका ओहदा भी बढ़ता जाता है। इसके बाद सभी जूनियर लोग उनके साथ अदब से पेश आते हैं और जो वह बोलते हैं वही करते हैं।
गांव में ही लगे हैं कई एटीएम
पुलिस के अनुसार यहां के लोग ठगी करने के बाद काफी दिनों तक अपने गांवों में ही रहते हैं। भरतपुर, जमतारा, मेवात आदि सभी जगहों के अपराधियों की एक जैसी कार्यशैली है। यहां गांवों में ही छोटे-छोटे एटीएम रखे गए हैं। इनके माध्यम से ये यहीं से रुपये निकाल लेते हैं। रुपयों का लेनदेन करने के लिए ये कहीं बाहर नहीं जाते।