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सहकारी समितियों का स्पेशल ऑडिट: बीस साल के लेखों की जांच, करीब दस लाख खातों का होगा मिलान
Wed, 01 Jul 2020 04:10 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Wed, 01 Jul 2020 04:10 PM IST
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प्रदेश की प्रारंभिक कृषि ऋण समितियों का अब 20 साल का लेखा जोखा खुलकर सामने आएगा। सहकारी मंत्री धन सिंह रावत के आदेश के बाद सहाकारिता विभाग ने वर्ष 2000 से समितियों का स्पेशल ऑडिट शुरू कर दिया है। इस ऑडिट को भी समय से पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है।
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समितियों में फर्जी लोन, गबन के मामले सामने आने केे बाद अब सहकारिता विभाग ने ऑपरेशन क्लीन की मुहिम भी छेड़ी है। सोमवार को सहकारिता मंत्री धन सिंह रावत ने विधानसभा में हुई बैठक में सहकारी समितियों के ऑडिट का आदेश दिया था।
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वैसे निबंधक के स्तर से हर साल समितियों के ऑडिट का आदेश जारी होता है। यह ऑडिट समितियां अपने स्तर पर कराती हैं। मुसीबत यह है कि ऑडिट रिपोर्ट कई बार सालों तक दबी रहती है। कहा यह भी जाता है कि गबन आदि के मामले अगर सामने आते हैं तो रिपोर्ट उच्च स्तर तक पहुंचती ही नहीं।
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इसी को देखते हुए सहकारिता विभाग ने अब अपने स्तर से राज्य गठन के समय से समितियों का स्पेशल ऑडिट करना शुरू कर दिया है। स्पेशल ऑडिट का मतलब है कि समितियों के हर खाते का मिलान किया जाएगा। प्रदेश में पैक्स के 10 लाख सदस्य हैं। इसका मतलब यह हुआ कि 10 लाख खातों का मिलान होगा।
वहीं, प्रदेश में 690 पैक्स हैं। सहकारिता विभाग के मुताबिक पैक्स में कम्प्यूटराइजेशन किया जाना है और इससे पहले भी समितियों के बही खातों का दुरस्त होना जरूरी है। यह अलग बात है कि कंप्यूटरीकरण का विरोध कर रहीं समितियां यह भी कह रहीं हैं कि यह समितियों को दबाव में लेने की कोशिश है।
स्पेशल ऑडिट को समय से पूरा कराया जाएगा। इसके लिए सूची जिलों को भेज दी गई है। एआर और बैंकों के जीएम को नोडल अधिकारी बनाया गया है। वित्त विभाग के एम्पैनल सीए इस काम को करेंगे।
- बीएम मिश्र, निबंधक
बैंकों की व्यवस्था का होगा अध्ययन
यह भी सामने आया था कि भूमि के सापेक्ष कोलेटर्र (संपत्ति को बंधक रखना) लोन सहकारी बैंकों में बहुत कम हैं। सहकारी बैंक एक एकड़ पर मात्र 32 हजार तक का ही लोन दे रहे हैं जबकि राष्ट्रीय बैंक तीन लाख तक का लोन दे रहे हैं।
निबंधक ने बताया कि इस मामले में राष्ट्रीय बैंकों की व्यवस्था का अध्ययन करने का आदेश जारी कर दिया गया है। वहीं, इसी मामले में मंत्री धन सिंह रावत के स्तर से सीएम से भी बातचीत की जा सकती है और इसे कैबिनेट में भी लाया जा सकता है।